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 पहला पन्ना
 

 
 कॉमनवेल्थ खेल : दिल्ली 
शोषण का खेल चालू है
राष्ट्रमंडल खेल के बड़े-बड़े दावों के बीच कहीं यह उपलब्धि छूट न जाए कि मजदूरों के नाम पर उपकर के जरिए सरकार ने केवल राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़ी परियोजनाओं से करीब 500 करोड़ रूपए उगाया है. और यह भी कि राष्ट्रमंडल खेल निर्माण स्थलों पर काम करते हुये सैकड़ों मजदूर मारे जा चुके हैं और उनमें से किसी को भी मुआवजे के रूप में एक धेला भी नहीं मिला है.
दिल्ली से शिरीष खरे की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : राजनीति 
मुस्लिम पर्सनल लॉ के संहिताबद्ध होने से डर कैसा
भारत, दुनिया का एकमात्र देश है, जहाँ उलेमा, पर्सनल लॉ को संहिताबद्ध किए जाने तक का विरोध कर रहे हैं. संहिताबद्ध होने से कानूनों में कोई परिवर्तन नहीं होगा बल्कि उन्हें पूरे देश में समान रुप से साथ लागू किया जा सकेगा. लेकिन उलेमा अड़े हुये हैं. इन उलेमा की जिद के चलते, मुस्लिम महिलाएं वे अधिकार भी नहीं पा सकी हैं, जो कुरान उन्हें देती है.
डॉ. असगर अली इंजीनियर का विश्लेषण
     
 कला : बात पते की 
पीपली लाइव का सीधा प्रसारण
देखते-देखते यह कैसा दौर आ गया कि सनसनी का तुमार कुछ इस तरह ताना जा सकता है कि वह महानता की जगह घेर ले और समाज बौरा जाये. दो लाख किसानों की आत्महत्याओं को इस तरह तयशुदा मजाक बना दिया जाये कि वे सोच-समझकर परिवार, समाज में लंबे समय तक बातचीत करके बेहद व्यवसायिक रूप से मुआवजा के लिए ही की गई है. जीवन का कैसा अवमूल्यन है और मृत्यु का कैसा अपमान.
कवि-कथाकार रामकुमार तिवारी का विश्लेषण
 
 मुद्दा : ओडीशा 
ब्रिटिश कंपनी से लड़ाई अभी जारी है
उड़ीसा के नियामगिरि पर्वत श्रृंखला और उसके आसपास रहने वाले आदिवासियों के जीवन और ब्रिटिश कंपनी वेदांता के लोभ पर टिके हितों के बीच का टकराव बढ़ता जा रहा है. पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने राय दी है कि वेदांता को इस इलाके में जनजातियों के अधिकारों की कीमत पर खनन की अनुमति देने से देश की सुरक्षा और बेहतरी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
भुवनेश्वर से वासुदेव महापात्रा की रिपोर्ट
     
 चुनाव 2010 : बिहार 
सामुदायिक समीकरण बनाम विकासीय समीकरण
15 वीं बिहार विधान सभा का चुनाव 2010 में दशहरा के बाद होने वाला है. चुनाव की तैयारियां शुरु हो गई हैं और राजनीतिक गणित उलझाये-सुलझाये जा रहे हैं. पटना से जुगनू शारदेय का विश्लेषण
 
 मुद्दा : राष्ट्र 
विचारहीन प्राथमिकताओं से आजादी
प्रश्न उठता है कि आजादी के 62 साल बाद देश की आम जनता स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे को फहराने के प्रति क्या उतनी ही उत्साहित है जितनी 50 वर्ष पूर्व थी.
मेधा पाटकर का विश्लेषण
 
     
 

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प्रीतीश नंदी

 
 
सलमान होने का मतलब






 
         
 मुद्दा : समाज 
अब तक नौ
देश भर में सूचना का अधिकार को लेकर सजग लोगों की एक के बाद एक हत्या हो रही है या उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है.चिन्मय मिश्र का विश्लेषण
 
 मुद्दा : समाज 
हिज़ाब पर हंगामा क्यों
यूरोप में हिज़ाब के मुद्दे पर उठा विवाद देश में बहस का मुद्दा बना हुआ है. कुरान में केवल पैगंबर मोहम्मद की पत्नियों, जिन्हें मुसलमान अपनी माँ मानते हैं, के संदर्भ में हिज़ाब की चर्चा है. डॉ. असगर अली इंजीनियर का विश्लेषण
 
 कला : उ.प्र. 
पिया मेंहदी लिआय दा मोतीझील से...
मिर्जापुर के इलाके में कजरी के दंगल सारी-सारी रात होते थे. जिसने सुनने वालों को बाँध लिया, वो जीत गया. मगर अब समय बदल गया. अखाड़े नहीं रहे. चबूतरों पर दुकानें उग आई हैं. मिर्जापुर से आवेश तिवारी और नीति शुक्ला की रिपोर्ट
         
 मुद्दा : कृषि 
किसानों के अंत की शुरुआत
भारत में रिटेल चेन कृषि क्षेत्र किसानों के लिए मौत का जाल है. आज अमरीका में किसानों की संख्या इतनी कम हो गई है कि सन 2000 के बाद की जनगणना में उनकी अलग से गिनती करनी बंद कर दी गई है. यूरोप में, बड़े रिटेलरों के बाजार में छाने के कारण हर मिनट में एक किसान खेती को त्याग रहा है. फ्रांस जैसे देश में 2009 में किसानों की आमदनी 39 फीसदी घट गई है.
कृषि एवं खाद्य विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का विश्लेषण
 
 मुद्दा : छत्तीसगढ़ 
छत्तीसगढ़, जीडीपी और कुल्हाड़ीघाट
छत्तीसगढ़ सरकार इस बात से प्रसन्न हो सकती है कि सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़ों में उसने बाजी मारी है. लेकिन इन लम्हों के बीच उसे विश्व बैंक की उस रिपोर्ट का भी अध्ययन कर लेना चाहिए, जिसमें दुनिया के देशों में गरीबी का मूल्यांकन किया गया है. रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को सबसे गरीब राज्य बताया गया है, जहां 45 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं.
रायपुर से दिवाकर मुक्तिबोध का विश्लेषण
 
 मुद्दा : बात पते की 
भगवा, हरा और काला आतंकवाद
क्या आतंकवाद को किसी रंग से जोड़ा जा सकता है, विशेषकर किसी ऐसे रंग से, जो समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ हो? अमरीका ने तेल व दुनिया के अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा जमाने के अपने अभियान को धर्म का जामा पहना दिया और इस्लामिक आतंकवाद जैसे शब्द गढ़ दिये गये. अमरीका द्वारा दुनिया भर में इस्लाम व मुसलमानों का दानवीकरण किया गया.
राम पुनियानी का विश्लेषण
             
 साहित्य : कविता 
पत्थरबाजी में कुछ टूट गया है
कौन हैं ये विद्वतजन
वर्तमान में
गिरहकट या लुटेरे
इन्हें क्या काम तुमसे...
शैलेन्द्र चौहान की दो कवितायें
 
 साहित्य : कविता 
डा. सुभाष राय
सूरज उगे, न उगे
चांद गगन में उतरे, न उतरे
तारे खेलें, न खेलें
मैं रहूंगा सदा-सर्वदा
 
 साहित्य : कहानी 
असलियत
सदाशिव चेतन अखबार पढ़ते हुए एक अपील पर अटके लेकिन उस अपील ने सदाशिव चेतन की असलियत को सामने खड़ा कर दिया. राहुल राजेश की कहानी.
 
 साहित्य : कविता 
रणेन्द्र
रणेन्द्र की इस कविता में विद्रोह भी है और करुणा भी. लेकिन निरपेक्ष या तटस्थ होने की तरह नहीं. एक बदलाव की उम्मीद की तरह.
             
 

तीसरी बीवी

अभिज्ञात

देव प्रकाश चौधरी

लुभाता इतिहास-पुकारती कला

सीखना दिल से

संयुक्ता

अरुण आदित्य

उत्तर वनवास

गीताश्री

नागपाश में स्त्री

 
 

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