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 पहला पन्ना
 

 
 मुद्दा : कृषि 
कृषि में 0.2 प्रतिशत की विकास दर का मतलब
भारत एक कृषि प्रधान देश है, का रट्टा मारने वाले इस देश में कृषि विकास दर केवल 0.2 है. यह तब है, जब देश की सबसे बड़ी आबादी इसी कृषि पर ही निर्भर है. मनमोहन सिंह से लेकर प्रणव मुखर्जी तक अपने वार्षिक बजट के दौरान किसानों का गुणगान करते रहे हैं लेकिन भारत में किस तरह किसान और किसानी की अर्थव्यवस्था को मजबूत जाये, इसकी कोई योजना कभी नहीं बनाई जाती.
कृषि एवं खाद्य विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का विश्लेषण
 
 मिसाल बेमिसाल : झारखंड 
सूचना का प्रकाश
झारखंड के गिरिडीह जिले के एक छोटे-से गांव औंरा के प्रकाश चंद्र चंदन के नाम का प्रकाश अब सिर्फ औंरा गांव की सीमा तक ही नहीं फैला हुआ है बल्कि इसका दायरा बगोदर से लेकर गिरिडीह और राजधानी रांची तक फैल गया है. कल के आम प्रकाश आज खास हो गये हैं. भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई व्यवस्था के खिलाफ प्रकाश लगातार लड़ रहे हैं और उन्हें जीत भी हासिल हो रही है.
गिरिडीह, झारखंड से संदीप कुमार की रिपोर्ट
     
 मुद्दा : उड़ीसा 
अतुल्य भारत में अतुल्य भूख की कहानी
बोलांगीर में मौत अतिथि नहीं है. भारतीय खाद्य निगम के गोदाम भरे पड़े हैं. बाजारों में महंगी से महंगी शराबे मिलती हैं. छतों पर डिश एंटिना लगे हुए हैं. होटलों में शाही पनीर और मुर्गे की टांग मिलती है. फिर भी बोलांगीर में भूख है. दिल्ली से आलोक तोमर का विश्लेषण
 
 मुद्दा : अमरीका 
हैती का अपहरण
अब भूकंपग्रस्त हैती में अमरीकी टुकड़ियों का नियंत्रण है और ओबामा ने बुश को 'राहत कार्य' के लिए नियुक्त कर दिया है. भूकंप ग्रस्त लोगों को राहत देने के नाम पर अब हैती अमरीका के कब्जे में है. वरिष्ठ पत्रकार जॉन पिल्जर की टिप्पणी
     
 मिसाल बेमिसाल : समाज 
जान बचाने वाली ये औरतें
हमारे पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं को कमजोर समझा जाता है. लेकिन भारत में होने वाले सांप्रदायिक दंगों में महिलाओं ने जिस बहादुरी के साथ दंगाइयों का मुकाबला किया है, लोगों की जान बचाई है. डॉ. असगर अली इंजीनियर का विश्लेषण
 
 बहस : बात पते की 
विदेशियों को मताधिकार क्यों
अप्रवासी का वास्तविक अर्थ अल्प प्रवासी है. जो लोग विदेशी नागरिकता ले चुके हैं, वे भारतीय मूल के तो हैं, पर भारतीय नहीं हैं. ऐसे में इन विदेशियों को वोट का अधिकार क्यों देना चाहिए ? समाजवादी नेता रघु ठाकुर का विश्लेषण
 
     
 

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  नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पास
  नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल पर राज्यसभा में हंगामा
 
     
 

 
     
 
       


   
 

आनंद मिश्रा

 
 
और भी गम हैं...


 

प्रीतीश नंदी

 
 
तमाशबीनों का यह दौर





 
         
 हिंद स्वराज : सौ साल 
गांधी दर्शन का मौलिक सूत्र
हिन्द स्वराज गांधीजी के जीवन दर्शन का मौलिक सूत्र है और अन्तिम समय तक गांधीजी उसे ऐसा ही मानते रहे. वे देख रहे थे कि इन दिनों मानव सभ्यता एक आंतरिक क्रूरता की दिशा में बढ़ रही है और उसकी आंतरिक कोमलता की कुर्बानी देकर तथाकथित सभ्यता का ठाठ रचा जा रहा है. इसलिए गांधीजी ने यह बार-बार कहा कि-मानव परिवार को आंतरिक कोमलता का बलिदान नहीं करना चाहिए.
रामेश्वर मिश्र पंकज के विचार
 
 हिंद स्वराज : सौ साल 
दस्तक देता दस्तावेज
गांधीजी ने स्वयं ही कहा है कि उनके विचार उनके अपने हैं भी और नहीं भी. यह तो सही बात है कि विचार के क्षेत्र में विचार से ज्यादा वैचारिक दृष्टि का महत्व होता है. कहीं यह नहीं लगता कि गांधीजी ने केवल विरोध के लिए विरोध किया हो, न तर्क के लिए तर्क. आज हमें गांधीजी के संदर्भ में प्रचलित सफलता या असफलता जैसी कसौटी और परिभाषा को भी छोड़ना होगा.
नरेश मेहता के विचार
 
 हिंद स्वराज : सौ साल 
हिन्द स्वराजः कार्य योजना और नैतिक चेतना
यह एक विचित्र बात है कि संविधान सभा में गांधी जी का उल्लेख नहीं था. न ही उन्होंने किसी प्रकार का उसमें भाग लिया, जिस तरह की संवैधानिकता पर वर्तमान भारतीय व्यवस्था टिकी हुई है. प्रश्न उठता है कि ऐसी स्थिति में गांधीजी के विचारों का क्या संकलन हो सकता है? यह अपेक्षा कि एक कार्य योजना प्रस्तुत की जानी चाहिए, वास्तव में नितांत आधुनिक अवधारणा है.
गोविन्दचंद्र पांडे के विचार
         
 मिसाल बेमिसाल : आधी दुनिया 
अंधेरी गलियों के रौशन सितारे
शहरी झोपड़पट्टियों में रहने वाले बच्चों की जिंदगी को बोझिल, बेबस और हताश जानकर अक्सर उनसे मुंह फेर लिया जाता है. मगर एक सूझबूझ भरे प्रयास के चलते उसी दुनिया की कुछ लड़कियां आज न केवल सामाजिक अनदेखियों और तमाम बाधाओं से आगे निकल रही हैं, बल्कि खेलने-कूदने और पढ़ने-लिखने के रास्तों से उजाला भी दिखा रही हैं. शक्ति और अस्मिना की कहानी ऐसी ही है.
मुंबई से शिरीष खरे की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : जैव संवर्धन 
खतरे में सुंदरवन
दुनिया भर में अपने मैनग्रोव फारेस्ट के लिये मशहूर सुंदरवन को धरती का तापमान निगल रहा है. सुंदरवन में प्रति दशक 0.5 डिग्री सेंटीग्रेड की दर से तापमान बढ़ रहा है. यह औसत तापमान वृद्धि से आठ गुना ज्यादा है. धरती और जंगल के साथ-साथ पानी का तापमान बढ़ रहा है, बाघों और मनुष्य के बीच टकराव बढ़ रहा है और बढ़ रहा है सुंदरवन के खत्म हो जाने का खतरा.
सुंदरवन, बंगाल से लौटकर गीताश्री की रिपोर्ट
 
 बहस : बात पते की 
नक्सलियों से छत्तीसगढ़ के सवाल
छत्तीसगढ़ में लगभग 30 वर्षों में पला बढ़ा नक्सली आंदोलन अब बौद्धिक-राजनीतिक कम लेकिन यौद्धिक तेवर का ज्यादा दिखाई देता है.यदि भारत को माओवाद के रास्ते पर चलना ही होगा, तो वह तो जनता को तय करना होगा और उसे माओ की कदकाठी के नेता की भी प्रतीक्षा होगी. यह ठीक है कि आज की तारीख में माओ का फिलहाल कोई समानांतर नहीं है लेकिन गांधी का भी कहां है?
गांधीवादी चिंतक कनक तिवारी का विश्लेषण.
             
 साहित्य : भाषांतर 
ताओ ते चिंगः लाओ त्सु
ताओ ते चिंग की रचनायें केवल साहित्य या दर्शन भर नहीं है, वस्तुतः वे जीवन सार भी हैं. इन रचनाओं में एक ऐसा विस्तार है, जिनमें समूची मनुष्य जाति की व्याख्या होती है. इला कुमार का अनुवाद.
 
 बहस : बात पते की 
वीएन राय के नाम पत्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय पिछले कुछ महीनों से लगातार विवादों के घेरे में है. विश्वविद्यालय के कुलपति विभूतिनारायण राय के नाम सुभाष गाताडे का खुला पत्र.
 
 मुद्दा : बात पते की 
नोबेल की नाकाम अदा
नोबेल समिति को चाहिए कि वह संन्यास ले ले और अपनी अकूत सम्पदा को ऐसे किसी अन्तर्राष्ट्रीय शांति संगठन को को दे दे, जो स्टारडम और रेटरिक से अभिभूत न होती हो. इतिहासकार हॉवर्ड ज़िन की टिप्पणी.
 
 बहस : बात पते की 
क्या यह सब सलवा जुड़ूम है ?
रायपुर में प्रमोद वर्मा की स्मृति में हुए आयोजन पर प्रगतिशील-जनवादी लेखकों के खेमे में लगातार बहस चल रही है. प्रलेस से संबद्ध खगेंद्र ठाकुर की टिप्पणी
             
 

गीताश्री

नागपाश में स्त्री

गीत चतुर्वेदी

आलाप में गिरह

लाल्टू

लोग ही चुनेंगे रंग

अरुण आदित्य

उत्तर वनवास

रणेन्द्र

ग्लोबल गांव के देवता

 
 

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