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नक्सली नेता कानू सान्याल से बातचीत-दो

चारु मजुमदार में उतावलापन था

He betrayed me

He actually helped to destroy the movement

 

कानू सान्याल का मानना है कि किसी व्यक्ति को खत्म करने से व्यवस्था नहीं बदलती. उनकी राय में भारत में जो सशस्त्र आंदोलन चल रहा है, उसमें

एक तरह का रुमानीपन है. उनका कहना है कि रुमानीपन के कारण ही नौजवान इसमें आ रहे हैं लेकिन कुछ दिन में वे जंगल से बाहर आ जाते हैं. अपने साथी चारु मजुमदार को लेकर उनकी टिप्पणी है- उनमें उतावलापन था. वे बड़ा नेता बनना चाहते थे. और यह भी कि He betrayed me. He actually helped to destroy the movement.

 

कानू सान्याल

अफसोस इस बात का कि I could not produce a communist party although I am honest from the beginning.

आलोक प्रकाश पुतुल द्वारा उनसे की गई लंबी बातचीत का दूसरा और अंतिम भाग यहां हम अविकल रुप में प्रस्तुत कर रहे हैं.

 

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

ये जो हथियारबंद दस्ता है वो कहता है कि हम लोग red corridor बना रहे है.

वो तो देखिए शब्दों का इस्तेमाल करना और media they help us in that way कि ये फैला देता है बातों को. In that way it comes to the help of us. Print media हो चाहे electronic media हो it helps us but it will not help the movement. पहले ही आप जानकारी दे देंगे कि हमारा अस्तित्व यहां है तब तो माओत्से तुंग को इतना लड़ाई लड़ना नहीं था. वियतनाम के आदमियों को American imperialism से वो लड़ा, 50 years of struggle एक नहीं पीढ़ी पीढ़ी से वो लड़ा. इसलिए मैं कहूंगा कि unless they change themselves. क्या change ? जनता के बीच में काम करने के लिए जाना. बंदूक लेकर आप गांव में जाइए, आदमी को समझाइए. आप बोलिए कि व्यवस्था को challenge कीजिए we will give you shelter. आप लोग समूचा जमीन कब्जा कीजिए, thousands of people will come. हमने आंध्र में जा के बोला था, उन लोगों के नेताओं से, उन लोग के कैम्प में जा कर बातचीत किया था, कि आप लोग क्यों नहीं, आप लोग बोलते हैं कि हमारे हाथ में बंदूक है इतना. तो आप लोग क्यों किसानों को नहीं बोलते हैं कि जमीन जोतिए. आपके छत्तीसगढ़ में भी तो यही हो रहा है. Congress they are mobalizing people क्या भूमि सेना के नाम में….


सलवा जुडूम ?

हां, सलवा जुडूम वो कर रहे हैं. अगर गांववाले अब दोनों के बीच में घिर गया. अगर सलवा जुडूम में जाएं तो माओवादी मुझे मारेगा और अगर माओवादी के साथ में जाएं तो सलवा जुडूम मुझको मारेगा, पुलिस हमको मारेगा. That is not the way. इसलिए उनको बेहतर होगा they have to change their understanding. Pro-people line होना चाहिए. Pro-people line मतलब किसानों का, मजदूरों को साथ देने के लिए वो कामयाब करने के लिए, उनको आपका तरफ लाने के लिए आपको प्रोपोगेंडा में लाना चाहिए.

हमने देखा कि it failed. पार्टी टूट गया. Without party, without a scientific communist party, struggling party, those who believe to use all methods to defeat the enemy. तब तक वो कम्यूनिस्ट पार्टी नहीं रहा. एक सही कम्यूनिस्ट पार्टी ही क्रांति को ले जा सकता है. इसलिए मैं कहूंगा कि we don’t condemn कि आज जो चल रहा है ये जो हम बोलते हैं… आप तालिबान को क्या बोलते हैं. तालिबान जो बंदूक ले के लड़ रहा है अपने देश के लिए shall I called him Maoist क्योंकि उनके हाथ में बंदूक है. बंदूक उनको हाथ में है ले कर हम नहीं कहते हैं. बंदूक is a simple machinery उसको use करना होगा for a particular purpose. वो purpose क्या ? देश का आर्थिक राजनीतिक परिस्थिति को बदलने को चाहते हैं. ये बदलने के लिए चाहिए हमारे साथ जनता. और वो जनता को कितनी जल्दी हम संगठित कर सकते हैं, उसके उपर priority देना होगा. There we are failing. Indian माओवादी जो सशस्त्र संग्राम बना रहे हैं, कॉरिडोर बना रहे हैं. मैं कहता हूं कि ये सब बकवास है. जनता अगर आपका साथ नहीं है... हिंदुस्तान में जहां के आदमी जमीन में पानी नहीं है इसके लिए गरीब ब्राह्मण से लेकर एक हरिजन उस जमीन के पानी के लिए एक होकर लड़ना नहीं चाहते हैं, इतना जात पात की व्यवस्था है, उस देश में क्या हो सकता है ?
So we must teach them जिस जात में आपको जीने के लिए जो व्यवस्था है उसके लिए आइए एक साथ मिलकर हम लोग लड़ेंगे. तो अगर आपका ये education नहीं रहेगा. कम्यूनिस्ट आंदोलन को 70-80 साल का अनुभव, ये अनुभव आता है कि हम लोग we didn’t feel the pulse of the people. देखिए गांधी जी से फर्क कहां है...

मैं गांधी पर ही आना चाह रहा था.

गांधी से फर्क कहां है ? Gandhiji was the intelligent most representative of the burjuaji. वो हमारे देश के सरलता को लिया था. धोती पहनते थे, एक फतुआ लगा लेते थे. एक लाठी लेकर, खडऊं पहनकर चलते थे. People loved that, asian people they love simplicity. He could draw और इन्होंने समझा था कि वो कांग्रेस का पहले petionist congress था. ये लिखापढ़ी जानने वाले को बीच में सीमित रह जाएगा होगा नहीं. आम जनता को हमारी तरफ लाना होगा. इसलिए दांडी अभियान शुरु किया. लेकिन 42 साल के आंदोलन शुरु किया था non cooperation movement. जब वो सशस्त्र रूप में चले गए he opposed it. He betrayed that. गांधीजी भी betray किया है, People call. इसलिए कांग्रेस देश को आजादी लाया, नहीं. देश का आजादी की लड़ाई में किसान, गांव का किसान पहले शुरु किया था. तो नील विद्रोह से लेकर और और कितना विद्रोह हाजिम विद्रोह, संथाल विद्रोह ये समूचा विद्रोहों के बहुत बाद में कांग्रेस बना. But Gandhi ji felt the pulse of the people. हमारे देश का आदमी को समझा था कि फिर कुछ लिखपढ़ करने वाले आदमी को नेता बनाकर रख देने से होगा नहीं. पहले जमाने में जो कांग्रेस के नेता लोग बैरिस्टर वगैरह सब कुछ होते थे, लेकिन गांधीजी भी बैरिस्टर होते हुए भी he felt the pulse of the people. और इसलिए वो जनता के प्रति, सामाजिक व्यवस्था को पलटने के लिए अछूतों को विरोध में, छुआछूत के विरोध में ये सब कुछ सामाजिक आंदोलन करने लगे.

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