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नक्सली नेता कानू सान्याल से बातचीत-दो
चारु मजुमदार में उतावलापन था
He betrayed me
He actually helped to destroy the movement
कानू सान्याल का मानना है कि किसी व्यक्ति को
खत्म करने से व्यवस्था नहीं बदलती. उनकी राय में भारत में जो सशस्त्र आंदोलन चल रहा
है, उसमें
एक तरह का रुमानीपन है. उनका कहना है कि
रुमानीपन के कारण ही नौजवान इसमें आ रहे हैं लेकिन कुछ दिन में वे जंगल से बाहर आ
जाते हैं. अपने साथी चारु मजुमदार को लेकर उनकी टिप्पणी है- उनमें उतावलापन था. वे
बड़ा नेता बनना चाहते थे. और यह भी कि He betrayed me. He actually helped to
destroy the movement.
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कानू सान्याल |
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अफसोस इस बात का कि I could not produce a communist party
although I am honest from the beginning. |
आलोक प्रकाश पुतुल द्वारा उनसे की
गई लंबी
बातचीत का दूसरा और अंतिम भाग यहां हम अविकल रुप में प्रस्तुत कर रहे
हैं.
पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक
करें
• ये जो हथियारबंद दस्ता है वो
कहता है कि हम लोग red corridor बना रहे है.
वो तो देखिए शब्दों का इस्तेमाल करना और media they help us in that way कि ये फैला
देता है बातों को. In that way it comes to the help of us. Print media हो चाहे
electronic media हो it helps us but it will not help the movement. पहले ही आप
जानकारी दे देंगे कि हमारा अस्तित्व यहां है तब तो माओत्से तुंग को इतना लड़ाई
लड़ना नहीं था. वियतनाम के आदमियों को American imperialism से वो लड़ा, 50 years
of struggle एक नहीं पीढ़ी पीढ़ी से वो लड़ा. इसलिए मैं कहूंगा कि unless they
change themselves. क्या change ? जनता के बीच में काम करने के लिए जाना. बंदूक
लेकर आप गांव में जाइए, आदमी को समझाइए. आप बोलिए कि व्यवस्था को challenge कीजिए
we will give you shelter. आप लोग समूचा जमीन कब्जा कीजिए, thousands of people
will come. हमने आंध्र में जा के बोला था, उन लोगों के नेताओं से, उन लोग के कैम्प
में जा कर बातचीत किया था, कि आप लोग क्यों नहीं, आप लोग बोलते हैं कि हमारे हाथ
में बंदूक है इतना. तो आप लोग क्यों किसानों को नहीं बोलते हैं कि जमीन जोतिए. आपके
छत्तीसगढ़ में भी तो यही हो रहा है. Congress they are mobalizing people क्या भूमि
सेना के नाम में….
• सलवा जुडूम
?
हां, सलवा जुडूम वो कर रहे हैं. अगर गांववाले अब दोनों के बीच में घिर गया. अगर
सलवा जुडूम में जाएं तो माओवादी मुझे मारेगा और अगर माओवादी के साथ में जाएं तो
सलवा जुडूम मुझको मारेगा, पुलिस हमको मारेगा. That is not the way. इसलिए उनको
बेहतर होगा they have to change their understanding. Pro-people line होना चाहिए.
Pro-people line मतलब किसानों का, मजदूरों को साथ देने के लिए वो कामयाब करने के
लिए, उनको आपका तरफ लाने के लिए आपको प्रोपोगेंडा में लाना चाहिए.
हमने देखा कि it failed. पार्टी टूट गया. Without party, without a scientific
communist party, struggling party, those who believe to use all methods to
defeat the enemy. तब तक वो कम्यूनिस्ट पार्टी नहीं रहा. एक सही कम्यूनिस्ट पार्टी
ही क्रांति को ले जा सकता है. इसलिए मैं कहूंगा कि we don’t condemn कि आज जो चल
रहा है ये जो हम बोलते हैं… आप तालिबान को क्या बोलते हैं. तालिबान जो बंदूक ले के
लड़ रहा है अपने देश के लिए shall I called him Maoist क्योंकि उनके हाथ में बंदूक
है. बंदूक उनको हाथ में है ले कर हम नहीं कहते हैं. बंदूक is a simple machinery
उसको use करना होगा for a particular purpose. वो purpose क्या ? देश का आर्थिक
राजनीतिक परिस्थिति को बदलने को चाहते हैं. ये बदलने के लिए चाहिए हमारे साथ जनता.
और वो जनता को कितनी जल्दी हम संगठित कर सकते हैं, उसके उपर priority देना होगा.
There we are failing. Indian माओवादी जो सशस्त्र संग्राम बना रहे हैं, कॉरिडोर बना
रहे हैं. मैं कहता हूं कि ये सब बकवास है. जनता अगर आपका साथ नहीं है... हिंदुस्तान
में जहां के आदमी जमीन में पानी नहीं है इसके लिए गरीब ब्राह्मण से लेकर एक हरिजन
उस जमीन के पानी के लिए एक होकर लड़ना नहीं चाहते हैं, इतना जात पात की व्यवस्था
है, उस देश में क्या हो सकता है ?
So we must teach them जिस जात में आपको जीने के लिए जो व्यवस्था है उसके लिए आइए
एक साथ मिलकर हम लोग लड़ेंगे. तो अगर आपका ये education नहीं रहेगा. कम्यूनिस्ट
आंदोलन को 70-80 साल का अनुभव, ये अनुभव आता है कि हम लोग we didn’t feel the pulse
of the people. देखिए गांधी जी से फर्क कहां है...
• मैं गांधी पर ही आना चाह रहा
था.
गांधी से फर्क कहां है ? Gandhiji was the intelligent most representative of the
burjuaji. वो हमारे देश के सरलता को लिया था. धोती पहनते थे, एक फतुआ लगा लेते थे.
एक लाठी लेकर, खडऊं पहनकर चलते थे. People loved that, asian people they love
simplicity. He could draw और इन्होंने समझा था कि वो कांग्रेस का पहले petionist
congress था. ये लिखापढ़ी जानने वाले को बीच में सीमित रह जाएगा होगा नहीं. आम जनता
को हमारी तरफ लाना होगा. इसलिए दांडी अभियान शुरु किया. लेकिन 42 साल के आंदोलन
शुरु किया था non cooperation movement. जब वो सशस्त्र रूप में चले गए he opposed
it. He betrayed that. गांधीजी भी betray किया है, People call. इसलिए कांग्रेस देश
को आजादी लाया, नहीं. देश का आजादी की लड़ाई में किसान, गांव का किसान पहले शुरु
किया था. तो नील विद्रोह से लेकर और और कितना विद्रोह हाजिम विद्रोह, संथाल विद्रोह
ये समूचा विद्रोहों के बहुत बाद में कांग्रेस बना. But Gandhi ji felt the pulse of
the people. हमारे देश का आदमी को समझा था कि फिर कुछ लिखपढ़ करने वाले आदमी को
नेता बनाकर रख देने से होगा नहीं. पहले जमाने में जो कांग्रेस के नेता लोग बैरिस्टर
वगैरह सब कुछ होते थे, लेकिन गांधीजी भी बैरिस्टर होते हुए भी he felt the pulse of
the people. और इसलिए वो जनता के प्रति, सामाजिक व्यवस्था को पलटने के लिए अछूतों
को विरोध में, छुआछूत के विरोध में ये सब कुछ सामाजिक आंदोलन करने लगे.
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So naturally he felt. he was the intelligent most leader of the burjuji. वो अगर
नहीं होते तो ये कांग्रेस कुछ भी नहीं होती, जवाहर लाल से नहीं होता था. इसलिए मैं
कहूंगा जे हाथ में बंदूक है red corridor करेगा ना yellow corridor करेगा, वो बात
नहीं है. तालिबान के हाथ में बंदूक है तो क्या तालिबान भी कम्यूनिस्ट है ? नहीं.
इराक people एक विशेष Csuse के लिए लड़ता है. वहां कानूनी कोई रास्ता नहीं है.
American imperialism आर्मी लेकर बैठा हुआ है. बंदूक के बदले बंदूक, हां ये करना ही
होगा उनके सामने. इराक को अगर अमरीका को खदेड़ना है तो. हमारे देश में तो वो हालत
नहीं है. We should make them understand. We should utilize mainly to make the
people understand. ये हमें सब कोई हाथ लगाना होगा.
ये हाथ लगाने के लिए पूरी व्यवस्था को बदलना होगा. मजदूरों को अपना केवल मजदूरी
बढ़ाओ, इस बात पर सीमित रहना नहीं होगा. आपको वो जो मजदूरी कम रख रहा है, जो छटनी
चल रहा है, ये जो lockout चल रहा है वो व्यवस्था के कारण है. ये व्यवस्था को
उखाड़कर फेंकने के लिए मजदूर को एकत्रित करना है. इसलिए उनको संगठित करना, उनको
गोलबंद करना, उनको पॉलिटिक्स, कम्यूनिस्ट पॉलिटिक्स को ले के जाना है.
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जनता पार्टी नहीं खाता है, जनता झंडा नहीं खाता है. जनता चाहता है कि अपना जीवनशैली
मनुष्य जैसा हो. नेता खाएंगे हम भूखे रहेंगे ये हो नहीं सकता है. तो उसके लिए उनको
व्यवस्था करना चाहिए.
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So I don’t condemn the so called Maoists. I am telling you “so called Maoists.”
माओवाद बोलके कोई बात नहीं है. Marxism, Leninism ये एक माने साइंस है. You have to
learn it. देखिए बाहर का आदमी ताज्जुब होता है, सोवियत इतना बड़ा राष्ट्र वो अमरीका
coin कर दिया slogan समाजवाद चला गया. लेनिन वो बुश का जन्म का बहुत पहले लिखा है.
If we go through lenin’s words उन्होंने बताया है “सत्ता हथियाना जैसे कठिन है,
उससे ज्यादा कठिन है सत्ता को बचा के रखना”. लेनिन बताया. Restoration of
capitalism प्रत्येक moment में आपका गलतियों से restoration of capitalism हो सकता
है. लेनिन ने कम से कम उनका मरने के बहुत पहले से ये लिख चुके थे. उसको लेकर
कम्यूनिस्ट आंदोलन में पुरानी लड़ाई था county के खिलाफ. लड़ाई था. इसलिए जो पढ़े
नहीं है वो बंदूक के बल पर सब कुछ कर लेंगे तब तो revolution के नेता चाउशेस्कू
रोमानिया का. उनको वो ही जनता उनको मार डाला था. Because they went against the
interest. Socialism होने के बावजूद उनका 29 जोड़ी जूता और साधारण आदमी को एक पहनने
का कपड़ा भी नहीं है, खाने का जगह भी नहीं है, ये होगा.
जनता पार्टी नहीं खाता है, जनता झंडा नहीं खाता है. जनता चाहता है कि अपना जीवनशैली
मनुष्य जैसा हो. नेता खाएंगे हम भूखे रहेंगे ये हो नहीं सकता है. तो उसके लिए उनको
व्यवस्था करना चाहिए. तो naturally हम कहेंगे कि बंदूक पकड़ने से red corridor नहीं
बनता है. Unless there is people. जैसे मैं सोचता हूं कि उत्तरी बंगाल, उत्तरी
बंगाल पूर्वी भारत का neck है. उसको रख के दबाओ तो पूर्वी भारत बंद हो जाएगा. मतलब
you have to win over the people of this area. ये ही people के हाथ में बंदूक अगर
रहे तो वो कहां तक पहुँच जाएगा असम में. खाली गाड़ी उड़ा देने से, रण आदमी मरता
नहीं. खाली गाड़ी उड़ा दिया. मिलिट्री गाड़ी उड़ाया तो एक बात समझा जाता है. पब्लिक
जाता है, उनके उपर अब गाड़ी उड़ा देंगे, this is wrong idea. ये हो सकता है कि एक
मालगाड़ी में बंदूक, सामान, फौज जाता है तो उसको उड़ा दिया ये समझा जा सकता है.
लेकिन ये समझा नहीं जा सकता है कि पब्लिक जा रहा है वो गाड़ी को उड़ा दो.
• लेकिन गाड़ियों में भी जैसे कई
बार पुलिस के जवान जो हैं, जो आदिवासी भी हैं, वो भी
नौकरी कर रहे हैं. और लैंडमाइंस लगा दिये गए हैं. वो ब्लास्ट हो रहे हैं.
गलत है. देखिए अगर वो आदिवासी हो, बंगाली हो, बिहारी हो ये तो जाति का सवाल नहीं
है. Political lines, Military lines ये सब Marxism में है कैसे संघर्ष चलाना होगा,
Marxism में लिखा हुआ है. You apply it according to the Indian condition. In each
country इसका अलग अलग इस्तेमाल होगा उनका परिस्थिति के अनुसार. इसलिए नेपाल में
क्या करेंगे we will see, we will learn what they are doing. लेकिन हम देख रहे
हैं, हमारे सामने मिसाल है बंगाल के बुद्धदेव बाबू. अभी हम देखते हैं लोग कहते हैं
कि बिहार के आदमी बहुत घूसखोर है माने सरकार. आज अखबार में हमने पढ़ा यहां का एक
मंत्री ने 30 लाख रुपए खर्चा किया अपना बीवी का इलाज के लिए. दिल्ली में ले गया
प्लेन में which is against the laws and Buddhadev permitted it. एक ने चश्मा
बनवाया 14 हजार रुपये से अपनी बीवी के लिए. इसलिए ये बोलके वो एकदम मेरे उपर निर्भर
करता है बोलके वो मंत्री ने चिठ्ठी दिया, सीपीएम मंत्री. तो आज हम क्या देखते हैं.
साबित हो गया कि उनका बीवी Calcutta university का economics department में
प्रोफेसर है. She is not relying on her husband. तो क्यों आपको 14 हजार रुपए चश्मा
के लिए मिलेगा and बुद्धदेव बाबू permitted. तो क्या ये घूसखोरी नहीं है ये भी तो
घूसखोरी है.
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You are taking up the entire money. ये finer ways में लेते हैं. लालूजी जैसा
बोरा-बोरा में रुपया लेकर नहीं चले गये. लेकिन you are taking money. केंद्र से जो
fund आता है उसको आप खा जाता है. आता है पाँच लाख रुपया खर्च होता है एक लाख रुपया,
चार लाख रूपये आपकी पार्टी में चले जाता है. Finer method आपके पास है. Finer
method को आप इस्तेमाल करता है. लालूजी जैसा fodder scam में वो बोरा बोरा में
रुपया लेकर नहीं जाता है, चालाक है ये. तो naturally I will condemn them. It is a
form of stealing. But they are doing it, but as communist, as Marxist, Leninist,
as a follower of Mao Zedong thoughts मैं इस बात को मानेगा नहीं. हमारे देश का
struggle जो वो लोग कह रहे हैं, I don’t agree with it. मैं उनको सलाह दूंगा use
the gun go to the villages, go to the workers और उनको समझाओ कि आओ भई आप लोग, हम
लोग का साथ दो. एक मरने से 25 निकलेगा, एक मरने से 500 निकलेगा. इस तरह से आप
निकलिए उनके सामने. ये साठ साल की आजादी के बाद में धनी, धनी बनते गया, गरीब और
नीचे गिरते गया. इसलिए आओ साथ दो हम लोग ज्यादा दिन नहीं लेगा इनको खत्म करने में.
Physically खत्म करने नहीं, व्यवस्था को खत्म करने के लिए
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• लेकिन वो तो physically में
विश्वास रखते हैं दादा.
वो रखते हैं, वो जाने. लेकिन I don’t feel वो Mao Zedong का लेख पढ़ें है, लेनिन का
बड़ा भाई वो terrorism में विश्वास रखता था. उसको फांसी हुआ था. Lenin took lessons
from it. Marxism पढ़ा. पढ़ने के बाद ही ना Lenin became a communist and
international leader, communist leader. फिर किनका अनुभव मानेंगे. भारत में
माओवादियों का अनुभव, कि लेनिन का अनुभव. So, मैं अभी भी विश्वास करता हूं कि जनता
को गोलबंद करना है, संगठित करना है, using all the methods. But कभी भी
parliamentary व्यवस्था में विश्वास मत रखिए. Use it, आप use कीजिए all forms of
struggle. लेकिन mainly आप जनता को बताते जाइए armed struggle करना है. Without
armed struggle, you cannot drive them out from the forces.
• लगातार विनोद मिश्र जैसे जो
पार्टी के लीडर थे वो 18 साल तक 20 साल तक भूमिगत रहे.
उसके बाद आखिर में जो आईपीएफ था वो सीपीआई एमएल बना और वे घुस गए चुनाव के रास्ते.
देखिए let us take... Marxism मैंने बोला कि पूंजीवाद का restoration, सत्ता
हथियाना जितना कठिन है उससे ज्यादा कठिन है सत्ता बरकरार रखना, काहे कि Marxist,
Leninist must be dedicated to the country, dedicated to the people, dedicated to
the cause of socialism. आप व्यक्तिगत, आप जूता का सोने का लेस लगाइएगा और जनता
भूखा रहेगा, उनका बेरोजगारी रह जाएगा, it cannot be tolerated. People will
overthrow you. आज नहीं फेंकेगा तो पचास साल बाद फेंकेगा.
सत्तर साल का सोशलिस्ट देश सोवियत का पतन हो गया. क्यों, क्योंकि Marxism गलत नहीं
है, Marxism ठीक है. क्योंकि यदि 1848 में कोई बात को लिखा है, कितना दूरी तक देखने
वाले आदमी है वो, थे. बोला था उत्पादिका forces का, productive forces का निरंतर
विकास करके पूंजीवाद अपने को टिका के रखता है, रखने की कोशिश करेगा. तो Mao Zedong
ने भी बोला था, सांस्कृतिक क्रांति द्वारा कौन जीतेगा socialism या capitalism ? ये
लंबे दिन का फैसला है. We need 10 cultural revolutions क्योंकि culture परिवर्तन
करना है people को. ये देश का मालिक हम है, वो कतिपय पर मंत्री नहीं. मालिक हम है,
यानि सजग दृष्टिकोण व्यवस्था के प्रति, नेताओं के प्रति, पार्टी के प्रति, वो गलत
विचारों को विरोध में हमें सतर्क रहना है.
So I feel they are also taking up arms, they are killing people, they are doing
something, let them do. But ई कायदा से चलेगा तो they will fail, surely they will
fail. काहे कि वो दुश्मन की ताकत को छोटा करके देख लिया. मैं कहूंगा कि
strategically वो दुर्बल है, concretely हम. strategically वो दुर्बल है शक्तिशाली
नहीं है क्योंकि जनता जनता ही केवल बलवान है. और concretely they are powerful
क्योंकि उसके हाथ में साजो समान सब कुछ है to hoodooing the people सब कुछ वो कर
सकता है. तो इसलिए मैं एक बात कह सकता हूं कि our party CPI ML जो हम लोग बनाया है.
बहुत सा groups है सीपीआई एमएल का. उसके अंदर हमारे ग्रुप का नाम सीपीआई एम एल है.
हम ये peoples power, Marxism, Leninism, thoughts of Mao में हमारे विश्वास रखते
हैं, हम लोग काम भी कर रहे हैं. I am general secretary of the organization. But I
have asked them to retire me, please allow me to retire. क्योंकि जो आदमी काम
नहीं कर सकते हैं उनको क्यों आप जबरदस्ती रखना चाहते हैं, जबरदस्ती उनको रखना नहीं
चाहिए. काहे कि younger people they should come forward, they should lead the
organization, they should lead the people towards struggle to change the system.
Capitalist, feudalist system को बदल कर आपको real democracy में जाना है.
Democracy अगर आ जाएगा, आप समझिएगा तो उसके लिए तभी आप socialism में जा सकते हैं.
So naturally, आपके प्रश्न का जवाब मैंने दे चुका हूं.
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• एक सवाल मैं और जानना चाहता हूं
कि गांधी कोई मदद करते हैं क्या ? अभी आज के पोजिशन में जैसे ग्लोबलाइजेशन है,
हमारी उपभोग की संस्कृति बढ़ रही है. इन तमाम चीजों में गांधी को कहां देखते हैं आप
?
ना ना ना... गांधी he was a part of the capitalist system. He was a part of the
capitalist system. देखिए मरने से पहले लोग बहुत कुछ सोचते हैं. It was Gandhiji
who opposed partition of India and he accepted the partition of India. ये बात
देखिए गांधीजी 42 साल का quit India slogan दिया था. जब बिहार का आदमी, यूपी का
आदमी rail तोड़ कर आम आदमी उतार दिया था, Gandhiji stopped it, withdrew the
strategy, betrayed the people. तो, माने imperialism is more powerful. वो अपने
system को आज globalization के बाद में उनका लूटने का तौर तरीका अलग हो गय़ा है.
पहले फौज भेजता था, पीछे धार्मिक भेजता था, preacher, father को भेजता था. आज वो
नहीं करता है, वो जानता है कि पोप सब जगह में चर्च खोल चुका है. तुम Christianity
पालन करो, Muslim धर्म पालन करो, हिंदु धर्म पालन करो मेरा कोई आपत्ति नहीं है
लेकिन religion is opium for people. कोई भी आदमी हो.
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अगर यहां रात में कोई आदमी आकर हमको बोले कि कानू बाबू आप तो
लड़ाई का बात करते हैं, 100 राइफल रखिए. तो कहां रखेंगे. ये गांव का आदमी कल ही
पुलिस स्टेशन में खबर करेगा कि कानू बाबू के घर में बहुत बंदूक है. |
तो ये basic पोजिशन को मान कर आपको चलना है. अगर आप नहीं कर पाएंगे तो मतलब ये
नहीं. जनता का सेवा करने का मतलब ही है सबसे बड़ा उपलब्धि. जनता का जहां सेवा नहीं
है, आप जितने बड़े लीडर हों. I will say he is a bogus leader. अगर वो जनता की सेवा
की बात को भूल जाए. Gandhiji never told, खाली बोला था हां मिल जाएगा. लेकिन never
told land should go to…. और हमारे देश का पार्टी कभी गांधीजी को गाली दिया, समझने
की कोशिश नहीं किया और कभी कभी ये ही लीडर लोग क्या करने लगे, यही लोग गांधी का
इस्तेमाल करने लगा. So two pronged सवाल है. इसलिए मेरा कहना है कि mrxism,
Leninism को पढ़ना, देश का concrete condition को समझना, utilizing all methods of
struggle, चाहे कानूनी लड़ाई हो, चाहे parliamentary लड़ाई हो चाहे कोई भी लड़ाई
हो. Armed struggle में विश्वास का सवाल नहीं, armed struggle is a necessity.
क्योंकि capitalism को, imperialism को आप उखाड़कर फेंकना चाहते हैं तो वो रसदाना
तो आपको देगा नहीं, आपको मिठाई लाके देगा नहीं. They will fire on bullets. They
will kill us. They will drop bombs. So naturally हमें हर समय तैयार रहना होगा
हथियार बंद क्रांति करने के लिए. This is my उपलब्धि, ये ही मेरा उपलब्धि है, and I
am still on this line. लेकिन बात ये है कि जल्दीबाजी से, उतैलापन से कुछ होने वाला
नहीं है. एक कामरेड, तीन चार दिन पहले आ के बातचीत हो रहा था कि माओवादी को रास्ता
हम लोग लें लें, कितना जल्दी से.
ये जल्दीबाजी मत करो. तुम राजी हो, तो तुम्हारा नौकरी छोड़ के गांव में चले आओ.
मजदूरों के पास जाओ, संगठित करों, शहरों को, गरीबों को संगठित करो. Are you ready,
तब आप बोलेगा मेरा परिवार क्या करेगा. परिवार है, तो परिवार रहेगा, तुम परिवार को
नहीं समझा सकते हो तो तुम जनता को क्या समझाओगे. You cannot sacrifice with your
family. तो ये sacrifice करना होगा
• हथियारबंद दस्ता को भी जनता के
बीच में जाकर उनको संगठित करना चाहिए ?
देखिए कल अगर यहां रात में कोई आदमी आकर हमको बोले कि कानू बाबू आप तो लड़ाई का बात
करते हैं, 100 राइफल रखिए. तो कहां रखेंगे. ये गांव का आदमी कल ही पुलिस स्टेशन में
खबर करेगा कि कानू बाबू के घर में बहुत बंदूक है. So we have to create jungles of
people. जनता का जंगल पैदा करना होगा. ये नक्सलबाड़ी के संघर्ष में मेरी उपलब्धि ये
ही है, मेरी बड़ी उपलब्धि ये है कि मैं कभी भी कहां बाहर नहीं गया. किसान का घर में
रहा. अगर कोई गद्दारी नहीं करते तो डेढ़ साल मैं underground में था. ये गद्दारी के
कारण. एक आदमी जो मारा था, हम जेल से आने के बाद में वो आदमी को मारने के लिए गया
था. किंतु गरीब को मार के. वो गलती किया था, हमें पकड़वा के. किंतु इसके लिए हम
उसको मार दे क्या ? वो गलती को समझा. हां वो गलत किया था. Let him understand. हम
लोग बंगाली में कहते हैं “अनुसूचन”. हिंदी में क्या बोलेंगे ?
• पुनर्विचार
?
पुनर्विचार नहीं. दिल के भीतर से आपको भावना एक पैदा होगा, दुख होगा.
• आत्मग्लानि
आत्मग्लानि. Correct. आत्मग्लानि उनके अंदर पैदा हुई. मैं तो उनको कोई नुकसान ही
नहीं किया था. वो मुझे पकड़वाने क्यों गया था. पुलिस का साथ दिया था. अब उसको मार
के तुम क्या फायदा. कितना आदमी को मारोगे. हां. पैसा देगा वो लोग. They will create
betrayers. इसलिए एक आदमी अन्याय किया, एक आदमी उसको मार दिया, that is not the
correct approach.
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• ये जो हथियारबंद लोग हैं
वो तो कहते हैं कि कानू सान्याल जो हैं, वो संशोधनवादी हैं.
कहें. They are free to tell it. मैं जैसे उनको बोलते हैं. Maoism बोल के कोई चीज
नहीं है, मैं कहता हूं Marxism, Leninism, thoughts of Mao. हमारे तीन सूत्र हैं,
ideological एक stand है, हमारी फिलॉसोफी है the materialistic philosophy, खाली
materialistic नहीं, dialectical materialistic philosophy. हमारे सामने में, how
to develop society, उसका अनुभव हमारे सामने में है. How to develop armed
struggle, विभिन्न देशों का आदमी संघर्ष किया है. वो अनुभव तो हमारे पास है,
किताबों में है. Try to understand it, उपलब्धि में लाओ और अपना देश का concrete
condition में इस्तेमाल करो. इसलिए देखा, ये जो दार्जिलिंग में आ गया है अभी ये जो
नेपालियों के अलग प्रांत के बारे में. अभी कल ही हम लोग का मीटिंग था. I openly
declared in Siliguri, कि ये नेपालियों को अलग राज्य देना चाहिए.
• गोरखालैंड
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गोरखालैंड. ये होना चाहिए. पहले भी समर्थन दिया था, अभी भी मैं समर्थन देता
हूं. लेकिन सिलिगुड़ी जाएगा, ना जलपाईगुड़ी जाएगा, कौन जाएगा, कौन तरफ छूटेगा, उनके
साथ जुड़ेगा ? वो second SRC commission choose करेगा. दूसरी state re organization
committee किजिए. आप भी मांग कर सकते हैं उनके पास जा के they will enquire. They
will enquire about it, investigate about it then they will give you. अब
बंगालियों और नेपालियों के बीच में... सुभाष घीसिंग कौन था. वो तो नेपाली था, तो वो
क्यों लूटा मारा. जो भी जाएगा. देखिए हम बंगाली में एक कहावत कहते हैं – “जे जाए
लंका, शे होए रावण”. तो लंका में जाने ही से अगर आपके पास में ideology ही नहीं है,
आपके पास में लक्ष्य ही नहीं है. आपके पास में एक सही कम्यूनिस्ट पार्टी नहीं है तो
आप जरूर दलाल बन जाएंगे.
• ये सुभाष घीसिंग और बिमल गुरुंग
दोनों में क्या फर्क देखते हैं. ये तो वही आंदोलन है ?
ना movement ठीक है. They revolted. बिमल गुरुंग उसके अंदर था. इतना दिन कितना पैसा
पाया. सब पैसा सुभाष लोग खाया, गोरखालैंड के नाम में. Naturally, they wanted to
oust सुभाष घीसिंग. लेकिन गोरखालैंड का जो मांगदारी जो है वो ठीक है.
• आप बिमल गुरुंग के...
लेकिन हमने बोला कि ये बिहार उसको काटकर दो टुकड़ा किया झारखंड तो सबसे ज्यादा
नुकसान हुआ बिहार को क्योंकि बाढ़ पीडित इलाका बच गया. जितना कल-कारखाना, माइंस
वगैरह सब झारखंड में है. नुकसान किसको हुआ. But it was necessity इसलिए it is a
necessity for peace को कायम रखना चाहते हैं तो गोरखालैंड होना चाहिए. कम से कम
लड़ाई तो नहीं होगा. आत्मघाती लड़ाई तो नहीं होगा. नेपाली और बंगाली, बिहारी औऱ
बंगाली लड़ाई तो नहीं होगा. Let us try to understand it.
• कुछ लोग ऐसा कहते हैं कि
ये जो गोरखालैंड का मूवमेंट शुरु होता है. और अगर ये गोरखालैंड बनता है तो नेपाल के
जो maoist उनको entry मिलेगी इधर.
ना ना ना. That is bogus. ये माओवाद के नाम में आदमी को धोखा देना है. अभी कोई भी
आदमी प्रतिवाद करते हैं. आपको माओवाद का इतना विचार था तो फांसी में लटकाइए. जो लोग
को पकड़ते हैं उनको विचार में लाइए. अदालत में खड़ा कीजिए, उनका दोषी साबित कीजिए.
उनको विचार करके सजा दे दीजिए. फांसी में लटकाइएगा. उनको आजीवन कारावास दे दीजिएगा.
वो आप कर लिजिए. ये अलग है, लेकिन सिलिगुड़ी में हम लोग का मीटिंग हो रहा था बाघा
जितिन पार्क में बड़ा पार्क में बड़ा मैदान है.
• माकपा ने जो विरोध किया था.
हम लोग. हां... हम लोग वहां पर ज्यादा से संख्या में जमायत करके उन लोगों का विरोध
करते थे. हम लोग को last moment में ये दो दिन पहले इधर हम विचार कर चुके थे. So we
had to cartel our people. हम लोग सिर्फ कल एक हजार आदमी ले के गए थे. सड़कों पर हम
लोग पब्लिक मीटिंग करके चले आए थे. इसलिए कौन क्या किसको बोलते हैं वो अलग बात है.
सत्ता पाने से ही सब कुछ नहीं हो जाता है, सत्ता को टिका के रखना that is one of
the more important part. बंदूक हाथ में आने ही से सब कुछ नहीं होता है. बंदूक
पकड़ने वाला आदमी अगर आपको साथ नहीं रहेगा. तो एक मर जाएंगे तो उसके बाद में आप
नहीं रह सकेगा. You have to win them over.
• आपको लगता है कि ये जो maoist
movement का, ये जो हथियारबंद दस्ता आप जो कहते हैं तो उसका कोई भविष्य दिखता है
आपको भारत में ?
देखिए. मैंने बोला कि हथियारबंद दस्ता तो सब जगह है. तो क्यों नहीं भारत सरकार डरता
तालिबान से. उसका भी हथियार दस्ता है. तो उनसे भी डरेगा. ये अलग है लेकिन people
उनका साथ नहीं जाएगा. जंगल में रहकर you cannot liberate India. India is land of
not only jungles, बड़े बड़े शहर, बड़े बड़े देहाती इलाके, हजारों लाखों करोड़ों
किसान, कल-कारखाना में काम करने वाले एक एक प्रांत में 50-60 लाख मजदूर एक-एक
प्रांत में काम करते हैं. ये अगर आपको साथ ना दे तो आपको कामयाबी नहीं मिलेगा.
India and Nepal are not the same country. Backward most country. इसलिए जो कुछ भी
करें
आगे पढ़ें
• तो ये हथियारबंद होना क्या एक
प्रकार का रुमानी ख्याल है? क्या ये एक प्रकार का romanticism है ?
देखिए उनके हाथ में अगर बंदूक दे दी तो he will feel romanticism. Romantic boys
goes first. आप किताब पढ़ने दिजिए वो पढ़ेगा नहीं, Marxism पढ़ने दीजिए वो पढ़ेगा
नहीं.
लेनिन ने क्या लिखा, Mao Zedong ने क्या लिखकर गए हैं. वो तो अपना ताजा अनुभव को
लिखकर गए है ना किताब में. उसको पढ़िये, they will not take lessons from that.
They won’t. बंदूक आ जाए, रोमांच से आदमी आकर्षित होता है. ये जो सीपीआई एम एल जब
बना था. ये surrender का पोजिशन बहुत कम था. समझे ना. Surrender बहुत कम था. आजकल
surrender करने का संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गया है. कितने दिन जंगल में रहेगा. ये
आदमी रोमांच के लिए कुछ दिन जंगल में रहने के लिए जाएगा. उसके बाद में एक साल, डेढ
साल, दो साल. और इतना बड़ा देश है, हमें 10-20 साल लग सकता है, ये देश को पूंजीवाद,
सामंती व्यवस्था, साम्राज्यवादियों को अत्याचार और आज का जो ग्लोबलाइजेशन,
भूमंडलीकरण के खिलाफ नई व्यवस्था कायम करने के लिए एक लंबा Time लगेगा. India is a
vast country. ये देश में विदेश से बार बार आक्रमण हुआ. It’s a beautiful land.
इंडिया जमीन पर फसलों ऐसा पैदा होता है. जमीन के नीचे संपदा छिपा हुआ है.
हिंदुस्तान का आदमी का खुशी को तकलीफ होना नहीं चाहिए. चाहिए व्यवस्था का परिवर्तन.
• आपके जो मित्र हुआ करते थे जो
चारु मजूमदार और दूसरे लोग. तो चारु दा को किस तरह याद करते हैं आप ?
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मुझे बड़े पलंग में सोने वालों से कोई आपत्ति
नहीं है. पलंग में मैं भी सोना चाहता हूं. बिल्डिंग में मैं भी रहना चाहता हूं.
लेकिन मुझे वो करने का साधन नहीं है. अगर मुझे वो करना है तो मुझे चोरी चमारी करनी
होगी. |
He betrayed me. He actually helped to destroy the movement. सीपीआई एम एल
बनाकर जो रास्ता. किसी को बोलने का अधिकार नहीं है. सत्यनारायण सिन्हा, he came out
of CPI ML and formed a separate central committee. Naturally, हम कहेंगे he also
committed mistake. हम लोग बोलते हैं कि ये एक जड़ुआ है. Marxism के communist
आंदोलन के अंदर में ये एक जड़ुआ है. बाएं बाजू जड़ुआ, बायां बाजू विचार रखने वाले
आदमी और दाहिने विचार रखने वाले आदमी. ये कम्यूनिस्ट आंदोलन के बीच में ये संग्राम
के दौरान ये पैदा होता है. ये जड़ुआ से बचकर चलना होगा. You have to destroy. Lenin
had to destroy terrorism, anarchism तब कम्यूनिस्ट पार्टी develop हुआ. सही
कम्यूनिस्ट पार्टी. Within years 1903 में कम्यूनिस्ट पार्टी बना और 1905 साल में
ही क्रांति हुआ. Taking again lessons फिर हुआ taking again new lessons 1917 बारह
साल बाद में क्रांति सफल हुआ.
So you must understand your country, your people. आदमी क्रांति... , ये भावना के
कारण क्रांति का जरुरत नहीं है. भावना के कारण नहीं. मैं सोचता हूं. सोचने का जरुरत
है. आप सोचे या ना सोचे. आज क्रांति का जरुरत है इसलिए उत्पादिका व्यवस्था... आज हम
लोग बोलता है socialized. एक आदमी से पहले एक किसान अपना दवा, अपना कपड़ा, अपना
खेती, अपना सब कुछ बनाते थे. जब industrial revolution शुरु हुआ, तब division of
labour आ गया. किसान ही लोग मजदूर बना. तो naturally आज एक साइकिल बनाने के लिए, ये
साइकल बनाने के लिए, हैंडल बनाता है ये, सीट बनाता है ये. It is an assembly इसलिए
सामाजिक उत्पादन व्यवस्था संभालिए. तो उनका फल भोगेगा कौन समाज. समाज के आम आदमी जो
इस उत्पादन व्यवस्था के साथ जुड़े हुए हैं.
• चारु बाबू इन चीजों को समझ नहीं
पाए.
समझ नहीं पाए ना. ये गलती आएगा ही. Because he also belonged to the landlords
class. उतैलापन उनके अंदर था.
• हड़बड़ी.
उतैलापन हम लोग कहते हैं. Adventurism. कल ही कुछ कर देना चाहिए. बड़ा नेता बनना
चाहते थे. कोई कुछ नहीं कर रहा है, हम कर रहे हैं. बात ये नहीं है. मैं सोचता हूं,
इसलिए देश में क्रांति चाहिए. नहीं. There is a contradiction between productive
forces and production relation. ये दोनों का जब contradiction आएगा तभी क्रांति का
जरुरत आता है. तो naturally इसको hasten करने के लिए एक कम्यूनिस्ट पार्टी चाहिए.
जल्दी लाने के लिए. ज्यादा दिन हम उनका पीछे पीछे मालगाड़ी के डब्बे के माफिक
चलेंगे नहीं. We will lead them by forming a scientific communist party. We will
take lessons from the country. We will take lessons from the experiences of the
struggle in other country. लेकर अपना देश में concretely इस्तेमाल करेंगे.
उतैलापन आप जो बोला था रोमांच. रोमांच अलग चीज है. हड़बड़ी. रोमांच अलग चीज है.
रोमांच पैदा होता है आदमी में. बड़े बड़े पलंगों में नहीं सोता हूं तो मैं बड़ा
आदमी नहीं हूं. I don’t want to. I think.. I try to understand हमारा किसान किस
हालत में बिताता है. I should try to understand myself personally मुझे इस अनुभव
को लेना चाहता हूं. ये simply कोई दिखावा के लिए नहीं है. मुझे बड़े पलंग में सोने
वालों से कोई आपत्ति नहीं है. पलंग में मैं भी सोना चाहता हूं. बिल्डिंग में मैं भी
रहना चाहता हूं. लेकिन मुझे वो करने का साधन नहीं है. अगर मुझे वो करना है तो मुझे
चोरी चमारी करनी होगी. आदमी को ठगना होगा, यूनियन बनाकर मजदूरों को ठगना होगा.
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• लेकिन दादा आपको छत्तीसगढ़ में
लगता नहीं कि माओवाद का सबसे ज्यादा नाम भी हो रहा है, बदनाम भी हो रहा है ?
I closely follow it. लेकिन मैं कहूंगा terror campaign से होने वाला नहीं है.
Terror may act for sometime but not always. लेकिन अगर government really सोचेगा
तो this government is really powerful, it can do anything. इसलिए हम ये सरकार से
हम डरते नहीं. हम सोचते हैं कि ये people हमारा साथ रहेगा तो उनको डरना पड़ेगा.
काहे कि वो अपना सोशल के लिए वो बड़ा बनाने के लिए सब कुछ कर रहा है.
• इतनी उर्जी कैसे मिलती है आपको.
जबरदस्ती से. कल ही हमारे स्टेट कमेटी का सेकेट्री, कल ही वापस गए. उनको बोला कि आप
लोग संभालो मुझे छुट्टी दो. I am already 80, उमर कम है मैं चल नहीं पा रहा हूं.
Spondilitis, backbone का दर्द, आंख में नहीं दिखता है. अंधेरा होने के बाद मैं इसी
घर में अखबार नहीं पढ़ सकता हूं. अखबार पढ़ने के लिए बाहर आना पड़ता है. Already I
am invalid. लेकिन आप लोग बोलते हैं तो आपका साथ देता हूं. लेकिन please don’t
pressurize me. ये तो भावना से, कोई भी आदमी मुझे कह सकता है लेकिन People who know
me, they understand that I am not a cheat. क्रांति के नाम से आदमी के पास से घर
में, उन्हीं लोग के पार्टी का खबर कल हम अखबार में पढ़ा उनका treasurer दो करोड़
रुपये लेकर भाग गया. Such type of Communist, Maoist अखबार में पढ़ा. अब कौन कितना
मारता होगा, कौन कितना चोरी करता होगा कोई नहीं जानता. ये आंदोलन में जब anarchy
होता है तब बदमाश आदमी भी होता है आंदोलन में तो you must be very careful about
it.
• अभी ऐसे बदमाश लोगों की
संख्या ज्यादा बढ़ गई है.
अब बढ़ गया.
• ज्यादातर इस किस्म के लोग हैं
आंदोलन में.
ज्यादाकर नहीं. वो मैं नहीं कहूंगा. I can’t say. कौन किस्म का आदमी है. मैं कैसे
जानूंगा ? I cannot say कि वो लोग कैसा है. मैं उनको पहचानता नहीं हूं. इसलिए I
should not say नेपाल के बारे में बहुत सारे आदमी मुझे पूछता है. मुझे कहने के लिए
बहुत कुछ है लेकिन मैं नहीं कहूंगा it’s a separate country. I am not an advisor.
मैं business खोल के नहीं बैठा हूं यहां पर.
• दादा 80 साल की उम्र में आपको
जीवन में किन बातों का अफसोस है.
अफसोस इस बात का कि I could not produce a communist party although I am honest
from the beginning. नौकरी वौकरी छोड़ छाड़ के 1950 साल में कम्यूनिस्ट पार्टी में
निकला था.
• तो कहां नौकरी करते थे
?
दार्जिलिंग में कोर्ट में नौकरी करते थे. DM’s office, SDO’s office ये सब जगह अदली
बदली करता था. I was a government servant. मैं वो नौकरी को छोड़कर, अपने परिवार को
बताकर मैं चले आया. यहां का आदमी मैं नहीं हूं. I am not a son of this soil. मेरा
जन्म पहाड़ में है
• कहां ?
कुर्सियोंग. दार्जिलिंग के पहले. सिलिगुड़ी से 32 मील.
• बचपन वहीं बीता
?
up to matriculation. जिसे आजकल HSC बोलते हैं. Then I came back to plains. My
father retired, then I came back to the plains. सिलिगुड़ी शहर, वहां से मैं
जलपाईगुड़ी गया. एक ही कॉलेज था. वहीं पढ़ने चले गये. Since that time, I felt I
should do something. I couldn’t complete my education also. हम सोचे कि टाईम नहीं
है अभी. पढ़ता है तो सब कोई लेकिन देश का काम के लिए कितने आदमी जाता है ? चलो भई
मजदूर किसान को समझाए. कितना समझाया.
• तो उस समय क्या आपने कम्यूनिस्ट
मूवमेंट ज्वाइन कर लिया था ?
सीपीआई मैं ज्वाइन किया था. उससे पहले मैं कोई और कम्यूनिस्ट मूवमेंट नहीं join
किया था. I directly joined CPI. उस पार्टी underground था.
22.06.2008, 16.18 (GMT+05:30) पर प्रकाशित
Pages:
| | इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ | |
| | Deepak Upreti(dku131@yahoo.com) | | | | One does not become a revolutionary by merely holding a gun. If it were so then every policeman or an NSG gurad would be a revolutionary !.
Interview with Kanu Sanyal is authentic as it has been rerproduced without any editing. Interviewer has done well by playing a minimalist role- leaving Sanyal free with his thoughts....
A counter-view from ' an Indian Maoist' would be a good idea.
dku
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| | mithilesh kumar(k_mithilesh2001@yahoo.com) | | | | very good and very intresting. sply. arundhati and kanu sanyal intv. | | | | | |
| | ABDUL ASLAM(aslambspmedia@gmail.com) | | | | कानू सान्याल का मानना है कि किसी व्यक्ति को खत्म करने से व्यवस्था नहीं बदलती. उनकी राय में भारत में जो सशस्त्र आंदोलन चल रहा है.I AGREE WITH THE STATMENTS OF KANU SANYAL.REALLY INSPIRING INTERVIEW. ACTUAL INTERVIEW FORMAT IS EXCELLENT.
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| | अरिंदम राय(rustic.fervor@rediffmail.com) | | | | Adventurism आज के नक्सलवादियों का प्रमुख लक्ष्ण है. चारू बाबू में उतावलापन था और आज के नक्सलियों में भी उतावलापन है जिससे कि नक्सलवाद की मूल भावना नजरअंदाज होकर आज का नक्सल आंदोलन आतंकवाद बन गया है. | | | | | |
| | Ambarish Rai, Lok Sangharsh Morcha(amb1857@yahoo.com) | | | | inspiring interview.But i don't agree with his assessment regarding Charu Majumdar.We should rethink about our strategy and tactics about the transformation of indian society in the light of new era, while balance of power has been changed and imperialism has penetrated in the shape of exploitetive Globalization now, in the world. We should keep in mind that under Imperialist globalization Indian sate has also taken the path of disastrous liberlization. India state has become authoritarian now i.e. no space for democracy and livelihood opportunity for the poor. Semi colonial semi fudal system is still existing and state is camprador in nature...India needs a mass resistence against the system... need to bring like-minded people at same forum on the axis of strong marxist ideology. communist should also learn from international experiances, they should make themselves inclussive and equiped with today's marxism the science of class struggle. | | | | | |
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