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भारत की क्रांति से जुड़ा है नेपाल का भविष्य

संवाद


भारत की क्रांति से जुड़ा है नेपाल का भविष्य


मोहन वैद्य `किरण' से अंजनी कुमार की बातचीत


नेपाल की सीपीएन (माओवादी) पार्टी ने 20-25 नवम्बर के बीच अपना राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न किया। यह सम्मेलन ठीक उस समय हुआ, जब प्रचंड नेतृत्व की सरकार चौतरफा संकट से घिरी हुई है और पार्टी में दो लाइन का संघर्ष तीखा रूप ले चुका था। पार्टी के विभाजित होने, विचारधारा से भटक जाने इत्यादि के कयास व अफवाह का बाजा़र गर्म था। इन्हीं स्थितियों में पार्टी ने अपना ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न किया और अपनी वैचारिक सांगठनिक एकता को मजबूत करते हुए नवजनवादी क्रांति को सम्पन्न करने के लिए नई कार्यनीतियों का सम्पादन किया। पार्टी ने `जनता की संघीय जनवादी राष्ट्रीय गणतंत्र' के नारे को अख्तियार किया। इस नये बदलाव के मद्देनजर काठमांडू में सीपीएन (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व कामरेड मोहन वैद्य `किरन' से एक बातचीत
 

mohan baidya

सरकार और पार्टी के बीच अन्तर्विरोध की खबरें आ रही हैं। सरकार और पार्टी के बीच के रिश्तों में दरार क्यों आ रही है?

पार्टी ने ही तय किया था कि हमें सरकार में जाना है और उसे नेतृत्व देना है। प्रचंड के नेतृत्व में सरकार बनी। प्रचंड पार्टी के महासचिव भी हैं और सरकार में प्रधानमंत्री भी। पार्टी की केन्द्रिय कमेटी महासचिव के नेतृत्व में ही निर्णय लेती है। वर्तमान में पार्टी का नेतृत्व व सरकार का नेतृत्व एक ही है। सरकार के काम-काज की स्थितियां व निर्णय के संदर्भ अलग-अलग होने के चलते काम करते वक्त थोड़ी परेशानियां सामने आयी। सरकार व पार्टी के बीच का संतुलन बिगड़ा। इसके चलते थोड़े भ्रम भी पैदा हुए। वस्तुतः यह सरकार व पार्टी के काम-काज के बीच के कार्यविभाजन का ठीक ढंग से न हो पाने के चलते हुआ। एक ठीक कार्यपद्धति अपना कर काम करने से इन अंतर्विरोधों से बचा जा सकता था। हम अब इसे दुरूस्त करने की ओर बढ़ रहे हैं। अब पार्टी के काम-काज को पार्टी का संगठन ब्यूरो देखेगा।

वर्तमान सरकार के स्वरूप और दिशा को लेकर पार्टी के भीतर उठ खड़ी हुई बहस की चर्चा अखबारों में खुले आम हो रही है। आपको 'हार्डलइनर' बताया जा रहा है। वास्तविकता क्या है?

भारत सरकार ने मुझे लंबे समय तक जेल में रखा। जेल से बाहर आने के बाद से मेरे 'हार्डलाइनर' होने की बात को प्रचारित किया गया। यह प्रचार अब भी जारी है। वास्तव में यह बदनाम करने वाली बात है। वैचारिक-राजनीतिक मुद्दों पर बहस करना जरूरी है। यही मुख्य बात है। बहस को छोड़ देने से निर्णय लेने व आगे बढ़ने में दिक्कत आयेगी। अखबारों का मेरे बारे में इस तरह लिखने की मंशा वास्तविक मुद्दों को दरकिनार करना है। मैं भारतीय माओवादी की टिप्पणियों को सकारात्मक व गम्भीरता से लेता हूं।

सीपीएन (माओवादी) के सम्पन्न हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में दो समानान्तर दस्तावेज पारित हुए। पार्टी के भीतर चल रहे दो लाईनों के संघर्ष के बारे में बतायें!

राजा ने संसद को भंग कर निरंकुश राजशाही को एक बार फिर जनता पर लाद दिया था। इस विशिष्ट परिस्थिति में हमें संसदीय पार्टियों के साथ एकजुटता करनी पड़ी। इस स्थिति के लिए हमने एक कार्यनीति तय की थी। इन पार्टियों के साथ कुछ शर्तों पर समझौते किये थे। इन्हीं कार्यनीतियों के तहत अन्य पार्टियों ने लोकतांत्रिक गणतंत्र व संविधान सभा के चुनाव को स्वीकार किया। राजतंत्र का खात्मा हुआ। यह नेपाल की जनवादी क्रांति का पहला चरण था जो पूरा हुआ। अब यहां से आगे बढ़ना है। यह राज्य के वर्तमान स्वरूप के साथ आगे बढ़ना सम्भव नहीं है। इसीलिए यह जरूरी हो गया कि आगे की रास्ते की रणनीति और कार्यनीति पर विचार-विमर्श हो। राष्ट्रीय सम्मेलन के होने तक यह प्रक्रिया चली।

किसी भी क्रान्तिकारी कम्युनिस्ट पार्टी में दो लाईनों का संघर्ष उसके जीवंत बने रहने का सबूत है। मुख्य बात है कि यह संघर्ष किस तरह से चलाया जा रहा है। यह परिस्थितियों के उपर भी निर्भर करता है कि इस संघर्ष को किन पद्धतियों से चलाया जाए। अंतः पार्टी जनवाद के आधार पर ही यह संघर्ष स्वस्थ व सकारात्मक परिणामों के साथ चल सकता है। युद्ध की स्थिति में केन्द्रियता प्रधान पहलू था आज प्रधान पहलू जनवाद है। दो लाईनों के संघर्ष का केन्द्रिय मुद्दा था कि नेपाल में नवजनवादी क्रांति व समाज के निर्माण की तरफ बढ़ने का रास्ता क्या हो! राष्ट्रीय सम्मेलन में इस मुद्दे पर गहन विमर्श के बाद हमने इसे जनता के संघीय जनवादी राष्ट्रीय गणतंत्र के रास्ते के रूप में सूत्रबद्ध किया है। इससे पार्टी और मजबूत हुई, इससे वैचारिक एकता बढ़ी और पार्टी कैडर, नेतृत्व व जनता में जबरदस्त ऊर्जा का संचार हुआ।

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