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महेंद्र सिंह टिकैत से रेयाज़ उल हक़ की बातचीत

संवाद

इंसान खाप पंचायत का समर्थन करेंगे

महेंद्र सिंह टिकैत से रेयाज़ उल हक़ की बातचीत

 

mahendra singh tikait




















किसान यूनियन के अध्यक्ष और बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत खाप पंचायतों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप के खिलाफ हैं. प्रेम विवाह को लेकर उनकी राय है कि इसमें लाज-लिहाज कुछ रह ही नहीं जाता. विवाह अधिनियम में संशोधन को लेकर उनका मानना है कि जो इंसान हैं, वो समर्थन करेंगे और जो राक्षस हैं, वो इसका विरोध करेंगे. उनसे की गई इस बातचीत के कुछ अंश तहलका में प्रकाशित हुये हैं. यहां पेश है पूरी बातचीत.

 
अब तो केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन करने की मांग पर गौर नहीं करेगी. खाप पंचायतें अब क्या करेंगी?

सरकार ने तो बोल दिया है, लेकिन जनता न तो चुप बैठेगी, न भय खाएगी. जो आदमी मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और मर्यादा के साथ जिंदगी जीना चाहे उसे जीने दिया जाए, हम यह चाहते हैं. सरकार को या किसी को भी जनता को ऐसा करने से रोकने का क्या अधिकार है? इस देश में गरीब और असहाय लोगों की प्रतिष्ठा को ही सब लूटना चाहते हैं. 'द्वार बंद होंगे नादार (गरीब) के लिए, द्वार खुलेंगे दिलदार के लिए'. आदमी इज्जत के लिए ही तो सब कुछ करता है. चाहे कोई भी इंसान हो, इज्जत से रहना चाहता है.

लेकिन समाज बदलता भी तो है. प्रतिष्ठा और मर्यादा के पुराने मानक हमेशा नहीं बने रहते. आप इस बदलाव को क्यों रोकना चाहते हैं?

तबदीली तो होती है, बहुत होती है. हमारे यहां भी बहुत तबदीली हुई. हमारी संस्कृति खत्म हो गई. हमारी देशी गाएं अब नहीं रहीं. हमारी जमीन बंजर हो गई. बस इनसान की नस्ल बची हुई है, उस पर भी धावा बोल दिया गया. अपनी नस्ल को भूल कर और उसे खत्म कर के कोई कैसे रह सकता है? और यह सारी बुराई रेडियो-टीवी ने पैदा की है.

रेडियो-टीवी ने क्या-क्या असर डाले हैं?


बहुत ही खराब. जहां बहन-भाई का भी रिश्ता सुरक्षित नहीं बना रहेगा, वहां इज्जत कैसे बचेगी? महर्षि दयानंद ने कहा था- सात पीढ़ियों को छोड़ कर रिश्ता होना चाहिए. लेकिन राजनीतिक पचड़ा इन बातों को बरबाद कर रहा है. हमारा मानना है कि इनसान का जीवन इनसान की तरह होना चाहिए. पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश के इलाकों में लोग इन नियमों का उल्लंघन बरदाश्त नहीं किया जाएगा.

आप प्रेम विवाह के इतने खिलाफ क्यों हैं?

लाज-लिहाज तो इसमें कुछ रह ही नहीं जाता. शादी मां-बाप की रजामंदी से हो, परिवार की रजामंदी से हो तो सब ठीक रहता है.

लेकिन लोगों को अपनी मरजी से जीने और साथी चुनने का अधिकार तो है?

अधिकार तो जरूर है. पशुओं से भी बदतर जिंदगी बना लो इनसान की, इसका अधिकार तो है आपको. लेकिन हम इसे बरदाश्त नहीं करेंगे कि हमारे रिवाजों और मर्यादा पर इस तरह हमला किया जाए.

और यह मर्यादा के ये पुराने मानक इतने महत्वपूर्ण हैं कि इनके लिए हत्या तक जायज है?

लज्जा, मान, धर्म रक्षा और प्राण रक्षा के लिए तो युधिष्ठिर तक ने कहा था कि झूठ बोलना जायज है. हम अपनी मर्यादा की रक्षा करना चाहते हैं और इसके लिए हम 23 मई को महापंचायत में बैठ रहे हैं जींद में. इसके बाद दिल्ली की लड़ाई होगी.

आपकी इस लड़ाई में कितने लोग आपके साथ आएंगे? कितने समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं आप?

मुझे नहीं पता. मुझे कुछ पता नहीं.

नवीन जिंदल और ओम प्रकाश चौटाला ने विवाह अधिनियम में संशोधन की मांग का समर्थन किया है. और कौन-कौन से लोग आपके साथ हैं?

इंसान तो इसका समर्थन करेंगे. जो राक्षस हैं, वही हमारी ऐसी मांगों का विरोध करेंगे. इस माहौल में कोई भी हो, चाहे गूजर हो, ठाकुर हो, वाल्मीकि हो, ब्राह्मण हो या हरिजन हो- ऐसी शादियों को कोई भी मंजूर नहीं करेगा. कोई भी इसे बरदाश्त करने को तैयार नहीं है. इतने सब लोग एक साथ हैं.

किसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी ने अब तक आपको समर्थन नहीं दिया है. कोई पार्टी आपके संपर्क में है? आप किससे उम्मीद कर रहे हैं?

पार्टी की बात नहीं है. यह राजनीतिक मुद्दा नहीं है. यह एक सामाजिक मुद्दा है और इसमें सब साथ आएंगे. वैसे हम किसी (पार्टी) के समर्थन के भरोसे नहीं बैठे हैं. हम आजाद हैं और सरकार को हमारी सुननी पड़ेगी.

लेकिन अब तक तो सरकार आपसे सहमत नहीं दिखती. अगर उसने नहीं सुना तो आपकी आगे की रणनीति क्या होगी?

वह नहीं मानेगी तो हम देखेंगे. हमारी क्षमता है लड़ाई लड़ने की और हम लड़ेंगे. मरते दम तक लड़ेंगे. (प्रधानमंत्री) मनमोहन सिंह का भी तो कोई गोत्र है. (हरियाणा के मुख्यमंत्री) हुड्डा का भी तो गोत्र है. क्या वे इसे मान लेंगे कि गोत्र में शादी करना जायज है?

देश के उन इलाकों में भी जहां गोत्र में शादी पर रोक रही है, अब यह उतना संवेदनशील मामला नहीं रह गया है. वहां से एसी कोई मांग नहीं उठी है. फिर खाप पंचायतें इसे लेकर इतने संवेदनशील क्यों हैं?

तमिलनाडू और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में तो भांजी के साथ शादी जायज है. हम उसके खिलाफ नहीं हैं. हमारा कहना है कि जहां जैसा चलन है वहां वैसा चलने दो. जहां नहीं है, वहां नई बात नहीं चल सकती. बिना काम के किसी बात को छेड़ना, कान को छेड़ना और मशीन के किसी पुरजे को छेड़ना नुकसानदायक है.

21.05.2010, 11.55 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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Dr.Lal Ratnakar (ratnakarlal@gmail.com) Ghaziabad

 
 यह कैसा सच है .
दैनिक जागरण से साभार -
मिर्चपुर में फिर बढ़ा तनाव
Jun 04, 2010
हिसार, जागरण संवाददाता। हरियाणा के मिर्चपुर गांव में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। बुधवार को दिल्ली में हिसार के उपायुक्त [डीसी] युद्धवीर सिंह ख्यालिया पर हमले की घटना ने आग में घी का काम किया है। गुरुवार को जाट समाज के लोगों ने लाठियां और गड़ासों सहित अन्य परंपरागत हथियारों से लैस होकर मिर्चपुर में शक्ति प्रदर्शन किया और जनसभा कर सरेआम धमकियां दीं। सभा में मौजूद लोगों ने कहा कि मिर्चपुर मामले में गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए और पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। यहां तक चेतावनी दी गई कि पुलिस अब आरोपियों को गिरफ्तार करने आई तो उसे गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा और पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया जाएगा।
राजनीतिक नेताओं पर माहौल को खराब करने का आरोप लगाते हुए ऐलान किया गया कि किसी भी नेता को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों का हुक्का पानी बंद करने की भी घोषणा की गई।
गुरुवार को मिर्चपुर काड को लेकर गाव के पशु अस्पताल में सभा हुई। इसे 36 बिरादरी की सभा का नाम दिया गया। इसकी अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष बिजेंद्र बिल्लू ने की। इस दौरान ग्रामीणों ने पूरे गाव के सभी गलियों की घेरेबंदी कर उन्हें बंद कर दिया। भाकियू के आह्वान पर गाव में सभा को लेकर सुबह से ही पूरे गांव में तनाव व्याप्त था। जाट समाज की महिलाएं व पुरुष सुबह दस बजे से ही गड़ासे व लाठियों से लैस होकर पशु अस्पताल के परिसर में पहुंचने शुरू हो गए थे।
सभा में बिल्लू खांडा ने कहा कि हम भाईचारा बनाना चाहते है लेकिन सरकार भाईचारा बनवाना नहीं चाहती। सरकार ने एक पक्ष की तो पूरी बात सुनी है, वहीं दूसरे पक्ष के लोगों की आज तक भी कोई बात नहीं सुनी गई। सारी कार्रवाई एकतरफा हो रही है। राजनीतिक नेताओं ने अपनी रोटिया सेंकने के लिए गाव का भाईचारा खराब किया है। हमारी लड़ाई गाव के किसी समुदाय से नहीं, बल्कि सरकार व प्रशासन के खिलाफ है। अगर सरकार इस काड की जाच सीबीआई से नहीं करवाएगी तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज की सभा में काफी संख्या में पुरुष और महिलाओं की हाजिरी ने यह साबित कर दिया है कि मिर्चपुर के लोग एकजुट है। सभा के जरिये हमारी सरकार व प्रशासन से माग है कि इस मामले की जाच सीबीआई से करवाई जाए और जो भी बेकसूर लोग गिरफ्तार किए गए है उन्हे तुरंत रिहा किया जाए। एसएचओ विनोद काजल व नायब तहसीलदार जागेराम को भी रिहा किया जाए और जब तक सीबीआई जाच पूरी न हो, तब तक गाव के किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी न हो। प्रदेश सरकार व प्रशासन के अधिकारियों ने गाव के बच्चे, बुजुर्ग व महिलाओं को तंग किया है। इस प्रकार के व्यवहार से सभी भयभीत है। यदि इन घटनाओं से गाव में जानमाल का नुकसान हुआ तो इसकी जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की होगी। भाकियू के नेता महेंद्र घिमाना ने कहा कि बुधवार को दिल्ली में डीसी युद्धवीर सिंह ख्यालिया पर हुआ हमला निंदनीय है। सभा में थाना प्रभारी रोहताश ने ग्रामीणों से शाति रखने की अपील की और कहा कि मामले की निष्पक्ष जाच की जाएगी।
बिना अनुमति की गई सभा : डीसी
हिसार, जागरण संवाददाता : मिर्चपुर गांव में हथियारों के साथ बैठक करने के मामले में उपायुक्त युद्धवीर सिंह ख्यालिया ने कहा कि इस बारे में उनसे कोई अनुमति नहीं ली गई।
उन्होंने कहा कि अभी तक बैठक करने व एसएचओ को ज्ञापन सौंपे जाने की भी उन्हें सूचना नहीं मिली है। बैठक में महिलाओं सहित लोगों के हथियारों से लैस होकर शिरकत करने बारे में उपायुक्त ने जांच करवाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसा पाया गया तो कानून की अवहेलना करने पर निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी। जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने आने वालों को बंधक बनाए जाने का ऐलान किया गया है तो उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने नहीं दिया जाएगा तथा गैरकानूनी तौर तरीके अपनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बिना अनुमति की गई बैठक में थानेदार के जाने व लोगों से ज्ञापन लेने के बारे में जिला पुलिस कप्तान सुभाष यादव का कहना है कि मिर्चपुर गांव में बिजली-पानी की किल्लत की आड़ में बैठक को अंजाम दिया गया है। उसके बावजूद पुलिस बल का पूरा प्रबंध पहले से किया गया था। अगर कोई व्यक्ति कानून के खिलाफ जाने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। हथियारों सहित बैठक में आई महिलाएं व पुरुषों के सवाल पर उन्होंने इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि किसी को कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा।
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यही हाल इनका हर जगह है 'कहाँ है मायावती का सर्व समाज' हरियाणा का दलित दलित नहीं है , इनकी लड़ाई कौन लडेगा क्या ये इन्सान नहीं है ? (मैंने जिस हैवानियत का जिक्र अपनी टिप्पणी में किया है उसका एक और उदहारण)
 
   
 

Dr.Lal Ratnakar (ratnakarlal@gmail.com) Ghaziabad

 
 सगोत्रियता की लड़ाई आदमी की अपनी रची हुई पीड़ा है, गोत्र और खाप पंचायत और खानदान हुक्का का सवाल तो बहुत अच्छा है पर 'टिकैत' जी आज किसान नेता का ख़िताब उन्हें न जाने किसने दे दिया यहाँ चौधरी साहब की बात लाने का कोई मतलब नहीं पर पूरे मिडिया ने उन्हें किसान नेता कभी नहीं कहा उनकी समाधी का नाम किसान घाट के रूप में उनके मरणोपरांत लोगों ने लड़ कर भले ही करा लिया हो, दुखद है की किसानों का नेता 'अपढ़' को बना दिया जाय और वह वे वजह की लड़ाईयां मोल लेता चल रहा हो 'ऐसा ही कुछ खाप के नाम पर हो रहा है आप मार बुरे को रहे हो या आदमी को. जो भी सगोत्री शादी(खाप के अनुसार) करता है उसे उसकी बुराईयाँ समझानी चहिये न की 'फतवा' जारी करना चाहिए ? कोई इनसे पूछे की प्रेम की वजह से किसी का जीवन ख़त्म कर देना 'मानवता' कैसे है यह खाप की 'दानवता' नहीं तो क्या है ?

टिकैत के खाप के कुछ लोगों को मै 'व्यक्तिगत तौर पर जनता हूँ' जिससे मै यह कह सकता हूँ की उनसे बड़ा अनैतिक दुनिया में कोई नहीं होगा, यदि नैतिकता की कुछ भी कदर करने की इक्षा हो तो सबसे पहले उन 'जडवत' दुराग्रही अनैतिकों को सिखाएं - नैतिकता, मुझे लगता है ये खापें 'आदिवासियों' की स्थिति में है.
 
   
 

महेश वर्मा (maheshverma1@rediffmail.com) अंबिकापुर, छत्तीसगढ़

 
 इनकी जगह जेल में है लेकिन ये किसानों के नेता कहलाते हैं... मध्य युग की मानसिकता वाले इन कचरा लोगों पर हत्याओं का समर्थन करने और संविधान की अवमानना करने का आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिये. 
   
 

रंगनाथ सिंह नई दिल्ली

 
 टिकैत जी को अपनी परिभाषा के आधार पर इंसान होने की बधाई। हम राक्षस ही सही ! 
   

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