पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

माफ़ी की वह माँग तो भाव-विभोर करने वाली थी

संघर्ष को रचनात्मकता देने वाले अनूठे जॉर्

पूर्वोत्तर व कश्मीर में घिरी केंद्र सरकार

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

पूर्वोत्तर व कश्मीर में घिरी केंद्र सरकार

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
बांस काटने वाले बांसुरी बजाने लग

बांस काटने वाले बांसुरी बजाने लगे

सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया बांसुरी वादन को अराधना मानते हैं और फ़िल्मों में संगीत देने को अपना शौक़. उनकी राय है कि संगीत के नाम पर टीवी में जो कुछ चल रहा है, वह दरअसल शोरग़ुल है. हालांकि वे यह भी मानते हैं कि आने वाला समय हमेशा अच्छा होता है. पिछले दिनों एक कार्यक्रम के लिए जब वो छत्तीसगढ़ आए तो आलोक प्रकाश पुतुल ने उनसे बातचीत की.

कहते हैं कि किसी संगीतज्ञ की जड़ें उसके बचपन में होती हैं. आप अपने बचपन को किस तरह याद करते हैं?

मेरे पास बचपन में याद करने लायक कुछ ख़ास नहीं है. जब मैं साढ़े चार-पाँच वर्ष का था, तभी माँ गुज़र गई थीं. आज इस उम्र में पहुँचकर भी जब किसी छोटे बच्चे को उसकी माँ के साथ देखता हूँ तो कलेजे में कहीं एक टीस-सी उठती है.
पिता पहलवान थे और चाहते थे कि मैं भी उनकी तरह पहलवान बनूँ. माँ के गुज़रने के बाद पिताजी ने हम चारों बच्चों को पाला. खाना बनाने से लेकर घर के सारे काम काज ख़ुद निपटाने वाले मेरे पिता बेहद सख़्त मिज़ाज थे. अकेलेपन ने जो अवसाद उनके मन में भरा था, उसके कारण यह सख़्ती कई बार बढ़ जाती थी.
पिताजी की इच्छा का सम्मान करते हुए मैं पहलवानी करता रहा और चुपके-चुपके अपने पड़ोसी पंडित राजाराम जी से हिन्दुस्तानी संगीत भी सीखता रहा. दो वर्षों तक गायन सीखने के बाद समझ में आया कि यह मेरे बस का नहीं है.
उस समय मेरी उम्र 14-15 वर्ष रही होगी, जब पहली बार मैंने आकाशवाणी इलाहाबाद से पंडित भोलानाथ जी का बांसुरी वादन सुना. मुझे लगा कि हाँ, मुझे इसी की तो तलाश थी. इस तरह बांसुरी वादन का सिलसिला शुरु हुआ.

संगीत का अधिकांश हिस्सा जब इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्रों से पटा पड़ा है, बांसुरी और इस तरह के वाद्य यंत्रों की जगह अब कहाँ सुरक्षित है?

जिन्हें संगीत से प्यार है, उनके हिस्से में बांसुरी और इस तरह के दूसरे पारंपरिक वाद्य यंत्र हमेशा सुरक्षित रहेंगे. इन यंत्रों में वही फ़र्क है, जो झरने के स्वच्छ पानी और बोतलबंद मिनरल वॉटर में होता है. न जाने कब के बोतलबंद पानी का, झरने के ताज़े पानी से क्या मुक़ाबला?
पारंपरिक वाद्य यंत्रों में जो मौलिकता है, वह लाजवाब है.
हमारी सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि हम इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्रों की ओर भाग रहे हैं और जिन्होंने इन इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्रों का आविष्कार किया है, वे हमारे पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर ज़्यादा भरोसा कर रहे हैं.

आपने दर्जनों फ़िल्मों में संगीत दिया और सफल भी रहे. लेकिन लंबे समय से आपने फ़िल्मों से दूरी बना रखी है?

फ़िल्मों में संगीत देना मेरे लिए शौक़ से अधिक कुछ नहीं है. मैंने फ़िल्मों के लिए संगीत तैयार किया, वह मेरे शौक़ का हिस्सा था. बांसुरी वादन मेरे लिए पूजा करने की तरह है और इन दिनों मैं अपना ज़्यादातर समय पूजा में लगा रहा हूँ. मैं मंदिरों में तो नहीं जा पाता. ऐसे में जब भी प्रार्थना करने की इच्छा होती है, ध्यान करने का मन होता है, बांसुरी को होंठो से लगा लेता हूँ.
कुछ लोग मानते हैं कि संगीत का दायरा बढ़ा है. आज गीत-संगीत के ही कई-कई टीवी चैनल हैं. जो फ़्यूजन चल रहा है, जो रिमिक्स चल रहा है, इन सबको लेकर आप क्या सोचते हैं?
चैनलों पर जो कुछ चल रहा है, वह संगीत नहीं शोरग़ुल है और जिसे आप फ़्यूजन बता रहे हैं, वह असल में कनफ़्यूजन है. इसमें न तो बाहरी आनंद है और न ही आंतरिक.
लेकिन मैं इसकी चिंता नहीं करता. सरगम के जो सात स्वर हैं, उनका आप कुछ नहीं बिगाड़ सकते. ये सात स्वर हमेशा सबसे ऊपर रहेंगे और शोरग़ुल का यह अस्थायी दौर भी खत्म होगा.मैं मानता हूँ कि आने वाला समय हमेशा अच्छा होता है. हर क्षेत्र में नए लोग आ रहे हैं और वे अच्छा कर भी रहे हैं.

लेकिन बांसुरी वादन में केवल हरिप्रसाद चौरसिया का नाम ही क्यों सामने आता है?

ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं बूढ़ा हो गया हूँ. सच तो यह है कि मैं आज भी संगीत सीख रहा हूँ. मैं अपने गुरुओं से भी सीखता हूँ और शिष्यों से भी. मैं आज भी जीवन के सबसे आनंददायक पल की तलाश कर रहा हूँ.

 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in