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अन्ना-रामदेव व्यक्तिवादी हैं

संवाद

अन्ना-रामदेव व्यक्तिवादी हैं

स्वामी अग्निवेश से आलोक प्रकाश पुतुल की बातचीत

छत्तीसगढ़ के शक्ति में पले-बढ़े आर्य समाजी नेता और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संयोजक स्वामी अग्निवेश ने धर्म, समाज और राजनीति के क्षेत्र में जिस तरह से हस्तक्षेप दर्ज किया है, उसमें वे लगातार चर्चा के केंद्र में रहे हैं. हर बार वे चर्चा में आते हैं और फिर चाहें-अनचाहे हाशिये पर चले जाते हैं. यह सिलसिला साठ के दशक से लगातार जारी है. यहां हमने उनसे ऐसे मुद्दों पर बातचीत की है, जो हमारे समकाल को प्रभावित करते हैं.

swami agnivesh


चैनलों पर इन दिनों एक नये तरह का आध्यात्म और उसके खिलाफ चैनलों का एक हांका भी चल रहा है. निर्मल बाबा एक छोटा सा उदाहरण हैं. आध्यात्मिक व्यक्ति के बतौर इस पूरे दृश्य को आप किस तरह देखते हैं ?

निर्मल बाबा फूहड़ तरीके से अंधविश्वास फैलाकर पैसे बटोर रहा है. उससे चैनल वालों को मुंहमांगा दाम भी मिल रहा हैं. पैसे देकर उन्होंने प्राइम टाइम न्यूज चैनल पर अपना प्रोग्राम कराया. लेकिन न्यूज एक्सप्रेस ने मना कर दिया और उसने स्टिंग ऑपरेशन किया. निर्मल बाबा के दरबार में एक महिला जो ये कह रही थी कि उनके पति का कैंसर बाबा की कृपा से ठीक हो गया है, उससे चैनल ने उनके पति के बारे में पूछताछ की. उसने कहा कि चार साल पहले उनका देहांत हो चुका है. इस स्टोरी से चैनल ने बाबा के खिलाफ समाचार दिखाने की शुरुआत की और अपने चैनल पर इस मुद्दे पर बहस कराई. इसके बाद दूसरे चैनलों ने भी निर्मल बाबा के खिलाफ प्रोग्राम दिखाना शुरु कर दिया.

अब लगातार-लगातार कई चैनल उसके विरोध में हो गए हैं. सभी नहीं हुए हैं, कुछ अभी भी दिखा रहे हैं. मुझे पता चला कि आईबीएन-7 विरोध में नहीं दिखा रहा है. मैं सभी चैनल नहीं देख पाता. मुझे सामान्य तौर पर यह जानकारी मिली. मुझे जानकारी मिली कि न्यूज एक्सप्रेस के संपादक मुकेश कुमार शुरु से ही बाबा का विरोघ कर रहे हैं.

जगह-जगह जो उनके चेले थे, उनमें थोड़ा हड़कंप है. जो पैसा जमा हुआ करता था, वो कम होता जा रहा है. रांची के बैंकों में न के बराबर पैसे जमा हो रहे हैं. सामान बिकना भी बंद हो गया है या कम हो गया हैं. मतलब असर हो रहा है. दो-चार जगह निर्मल बाबा के खिलाफ मुकदमे भी हो गये हैं. लेकिन वो इतना फूहड़, अवैज्ञानिक और गलत सलाह देता है, ईलाज भी बता देता है और लोगों की समस्याओं का समाधान भी कर देता हैं. ये उसकी कहानी है.

लोकतांत्रिक ढांचे में ऐसे लोगों को क्या कुछ ज्यादा जगह नहीं मिल रही है?

बहुत ज्यादा जगह मिल रही है और ऐसा अंधविश्वास...यही नहीं, ऐसे दूसरे लोग भी ऐसा कर रहे हैं. संविधान की धारा 51-1 कहता है कि देश के हर नागरिक को वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा देना चाहिये. तो इस तरह से देखे और कानून के ढंग से भी देखे तो ये नौसिखिये जिस तरह से ईलाज करते हैं और जिससे बीमारी बढ़ जाती है, यह उस कानून के दायरे में भी आता है. किसी उपभोक्ता को गलत तरीके से सामान बेचने का जो कानून है, यह उसका भी उल्लंघन है. इस तरह से देखें तो यह संवैधानिक तौर पर, कानूनी तौर पर, सामाजिक तौर पर और आध्यात्मिक तौर पर ये गलत है. हमारे तथाकथित लोकतंत्र में इस तरह की चीजों के लिए खुली छूट मिली हुई है. और यह छूट बहुत ज्यादा है.

जब आप इसे ‘तथाकथित लोकतंत्र’ कहते हैं, तो आपको लोकतंत्र का भविष्य संसदीय राजनीति में नजर आता है या बंदूक की नली का जो रास्ता है, वह बेहतर लोकतंत्र लायेगा ? या फिर क्या कोई और रास्ता आपको नजर आता है ?

नहीं, बंदूक की नली वाला तो कभी ला ही नहीं सकता. उसमें तो लोकतंत्र नहीं होगा. वह तो बंदूकतंत्र ही होगा. अभी तो कम से कम मुझे नहीं लग रहा है कि हमारे देश में बंदूक का तंत्र सफल भी होगा. उसे तो एक हद तक रास्ता बदलना ही होगा. जैसा बहुत हद तक नेपाल में लोगों ने बदला है. हमारे देश में भी माओवाद को अलग रास्ता चुनना पड़ेगा तो शायद कामयाबी हासिल. लेकिन फिलहाल अभी उनकी एक निश्चित भूमिका है. आदिवासियों के जल, जमीन, जंगल को लूटा जा रहा है. उनको कहीं न कहीं थोड़ी-सी राहत मिल रही है. लेकिन लोकतंत्र की संभावनाओं में मुझे उनकी भूमिका ज्यादा दिखती नहीं है. मुझे लगता है कि हमारे इस संसदीय लोकतंत्र में ही थोड़ी कसावट आनी चाहिए. अगर हम संविधान को आधार मानते हैं और उसे सर्वोच्च स्थान देते हैं तो संविधान को सख्ती से लागू करवाना बेहद जरुरी है. यह बात राजनेताओं को भी समझने की जरुरत है और कानूनदा लोगों को भी.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Guddu kumar mishra [guddu.mishra51@yahoo.com] Patnacity - 2012-05-20 14:51:11

 
  मै स्वामी अग्नीवेश से सहमत नही हूं अगर बाबा रामदेव और श्री अन्ना जी के प्रयास पर ऐसे बात नही कहना चाहिए था मेरा मानना है कि गलत के खिलाफ कोई भी और किसी तरह का विरोध सही है. 
   
 

upendra vahinipathi [sun.bilaspur@gmail.com] bilaspur (C.G.) - 2012-04-24 06:32:29

 
  आलोक प्रकाश पुतुल जी इस लेख में अन्ना-रामदेव कहा है ? 
   
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