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कुल्हे उभारने वाली पैंट

बहस

 

कुल्हे उभारने वाली पैंट

प्रीतीश नंदी


क्या आपने ध्यान दिया है कि हमने हाल ही के समय में धोखाधड़ी की कला को संस्थागत बना दिया है? वास्तव में हमने इसके इर्द गिर्द इतने सारे सफल उद्यमों का निर्माण कर दिया है कि अब हम भूल गए हैं कि ये उद्योग शुरु क्यों हुए थे.

शुरुआती दौर में बोटोक्स का इस्तेमाल हमारे सौंदर्य को निखारने के लिए नहीं था, जैसा कि हम भरोसा करने लगे हैं. इससे हमें अपनी उम्र के बारे में झूठ बोलने की अनुमति मिलती थी. शुरु में लिपस्टिक हमारे होठों को चमकदार और सुंदर बनाने के बारे में नहीं थी. इसका मतलब काले, फटे, सिगरेट पीने वाले, पतले, सिकुड़े, भद्दे होठों को और उस महिला को ज्यादा लुभावना और आमंत्रित करने वाले बनाना था.

ये सब तभी तक ठीक था, जब तक आप उस महिला को घर न ले जाते हों और अगली सुबह बिस्तर पर उसके बगल में उठने पर पाते हैं कि वो बिना उसके मेकअप, नकली बालों, उसके रंगीन लेंसो और दोहरी पैडिंग वाले पुश-अप ब्रा के है. ऐसे में वह बिल्कुल भी वो औरत नहीं लगती है, जिसके साथ कल रात आप डेट पर गए थे. हम लगातार ऐसी उपेक्षाओं को जन्म देते जा रहे हैं, जिन्हें हम कभी पूरा नहीं कर सकते हैं. यह एक झूठ है.

विज्ञापन इसी अवधारणा पर आधारित होती हैं, इसीलिए आजकल हम में से आधिकांश उस पर भरोसा करना छोड़ चुके हैं. फिल्मों का विपणन भी उसी आधार पर होता है, इसीलिए उनमें से कई असफल हो जाती हैं. शादियां उसी आधार पर हो रही हैं, इसीलिए तलाक के मामले आजकल तेजी से बढ़ रहे हैं. उपभोक्ताओं द्वारा की जा रही खरीदी, उसी आधार पर हो रही है, इसीलिए उपभोक्ता अदालतें आज कल इतनी व्यस्त हैं.

एक बढ़ते क्रम में सब कुछ झूठ पर आधारित होता जा रहा है. आप जितना देना चाहते हैं या दे सकते हैं, उससे ज्यादा देने का वादा करें. यह बताता है कि क्यों ब्रांडों के प्रति हमारी निष्ठा बार-बार बदल जाती है और क्यों विश्वास की डोर पर टिके रिश्ते टूटते जा रहे हैं.

वास्तव में उपभोक्तावाद की इस पीढ़ी में विश्वास ही सबसे पहले मारा जाता है. आज हर उपभोक्ता नई चीजों के लिए खरीददारी कर रहा है, क्योंकि वो इससे पहले वाली चीजों से निराश है. अगर ये गैरजरूरी चीजों के साथ होता है, तो कोई बात नहीं, आप इस अनुभव से सीखते जाते हैं. लेकिन अगर आपसे उन चीजों के बारे में धोखाधड़ी की जाती है, जिसने बारे में आप ख्वाब देखा करते थे, तो असली मुश्किलें चालू होती है.

आप एक फरारी नहीं खरीद सकते और पाते हैं कि ये 40 की उपर जाती ही नहीं है. आप एक ऐसी औरत के बारे में लिप्सा नहीं रख सकते, जिसके बारे में आपको पता चलता है कि उसके उन्नत वक्ष सिलिकॉन के बने हैं. आपको सिर्फ निराशा नहीं होती. आपको ऐसा लगता है कि आपके साथ विश्वासघात किया गया है.

यही कारण हैं कि देश नीचे जाते हैं, जब सरकारें नकली संपत्तियों के दर प्रकाशित करती हैं.


ब्रिटिश खुदरा चेन मार्क्स एंड स्पेंसर अभी पुरुषों के लिए एक ऐसी पैंट बेच रहे हैं, जिनके कूल्हे झूलते हैं, जैसे कि महिलाओं के लिए उनके स्तनों का आकार बढ़ाने वाली ब्रा बनाना ही काफी नहीं था.

अनुमान लगाएं जब पहली बार संबंध स्थापित करने के लिए अपने कपड़े उतारेंगे तब दोनों को एक-दूसरे से कितनी निराशा और नाराज़गी होगी. ये उस प्रकार है कि आप मिशेलिन शेफ को रखते हैं और पाते हैं कि वो सिर्फ चिकनाई भरा ऑमलेट बना पाता है.

लेकिन सबसे बढ़िया तो अभी आना बाकी है. मार्क एंड स्पेंसर पुरुषों के लिए ऐसी अग्रभाग उभारने वाली पैंटे लाने वाला है जिससे प्रतीत होगा कि उनके उभार काफी बड़े हैं. इसके पीछे के तर्क बहुत सरल हैं. अगर महिलाएं ऐसे सौंदर्य प्रसाधन और कपड़े पहन कर बच सकती हैं जो उनके रूप रंग में नकली बढ़ोत्तरी करते हो, तो पुरुष कुछ एक ऐसे ही झूठ के साथ बचकर क्यों नहीं निकल सकते? ये मार्स और वीनस के बीच एक नई लड़ाई को जन्म देता है. अगर तुम मुझे अपनी संपत्तियों के बारे में धोखे में रख सकती हो, तो मैं क्यों नहीं? ये आजकल के प्रेमियों के बीच में नया वाद-विवाद है. ये कंपनी एक ऐसी चीज का दावा करती है, जिसे उपलब्ध कराना उसके बस की बात नहीं है. ये ऐसी उम्मीदों को जन्म देती हैं, जो कभी पूरी नहीं हो सकतीं.

बॉडीमैक्स कलेक्शन, जैसा कि इस रेंज को कहा जा रहा है, पुरुषों को सेक्सी बनाने की पेशकश करता है. 25$ की ‘बमलिफ्ट अंडरपैंट्स’ न सिर्फ पुष्ठभाग को 20% बढ़ाने का वचन देता है बल्कि महिलाओं में गलत धारणा फैलाता है कि जिस पुरुष को वो डेट कर रही हैं, उनके पास बड़े और विशाल आकार वाले कूल्हे हैं. 15 $ वाली अग्रभाग उभारू पैंटे पुरुषों के उभारों में देखने पर 38% तक बढ़ाव लाने का दावा करती हैं, इसीलिए इन्हें मंगलभाषी ढंग से “एक अनिवार्य शेल्फ” कहा जा रहा है.

मार्क एंड स्पेंसर अंडरवीयर्स के बॉस दावा करते हैं कि “उनके प्रौद्योगविज्ञों ने ऐसी स्टाइल पाने के लिए बहुत मेहनत से काम किया है जिससे असली नतीजे मिले और पहनना भी आरामदाय़क हों”. कृपया शब्द “असली नतीजों” पर ध्यान दें. झूठ बोलने वाले अंडरवीयर क्या असली नतीजे दे सकते हैं? ये मेरी सामान्य सी शंका है. असली नतीजे सिर्फ असली पुरुष, जिनके पास असली संपत्ति हो दे सकते हैं न कि नकली पुरुष, जिन्होंने झूठी संपत्तियां पहनी हों.

यही कारण है बैंकों के नीचे जाने के पीछे, जब बैंककर्मी नकली सपत्तियां प्रायोजित करते हैं. यही कारण हैं कि देश नीचे जाते हैं, जब सरकारें नकली संपत्तियों के दर प्रकाशित करती हैं. और यही कारण है कि संबध नीचे जाते हैं, जब लोगों को पता चलता है कि दूसरे व्यक्ति के बारे में जो उनको सबसे प्रभावित करने वाला लगा था, वो मौजूद ही नहीं है, या कभी भी नहीं था. उन्होंने एक स्पष्ट, बेशर्मी भरा झूठ बेच दिया गया था.

कोई भी ये उम्मीद नहीं कर सकता कि पूरी दुनिया युधिष्ठिर के सच की तरह जिये. हालांकि युधिष्ठिर ने भी लड़ाई के सबसे नाजुक क्षण में झूठ बोला था, जिससे अनुचित रूप से द्रोण की हत्या होना उन्होंने स्वीकारा. लेकिन लगभग पूरे झूठों की इमारत पर एक उपभोक्ता समाज बनाना शायद उतना बढ़िया नहीं है. ये सिर्फ निराशाओं, दिल टूटने और कम होते विश्वास की ओर ले जाएगा, न सिर्फ पुरुष और स्त्री के बीच, जो एकदूसरे से हारते रहेंगे बल्कि ब्रांड और उपभोक्ताओं के बीच भी. और ये एक ऐसी दुनिया में होगा, जहां सच्चाई इतनी दुष्प्राप्य हो चुकी हैं कि जब हम इससे दिन के उजाले में रूबरू होते हैं, हम उसे पहचान ही नहीं पाते हैं.

20.10.2010, 13.00 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Oshiya http://snowaborno.blogspot.com

 
 अब दुनिया उन्हीं लोगों के रहने लायक रह जायेगी जो इन ढकोसलों को पहली नज़र में पहचान लेते हैं. दुसरे शब्दों में कह सकते हैं की यह ढोंगी दुनिया अब असली लोगों के रहने लायक नहीं रही. 
   

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