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बशीर के बयान

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बशीर के बयान

एम जे अकबर


पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर दिल्ली में अपनी भारतीय समकक्ष निरुपमा राव के साथ अंतिम दौर की वार्ता के बाद पल भर के लिए प्रसिद्धि पा गए,जब उन्होंने मुंबई पर आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ भारत द्वारा सतर्कता के साथ तैयार प्रकरण को ‘महज कागजी पुलिंदा’ कहकर खारिज कर दिया. प्रेस रिपोर्ट्स संकेत दे रही हैं कि वे भारत में पाकिस्तान के अगले उच्चायुक्त हो सकते हैं. यह अच्छी खबर है या बुरी?

सामान्यत: आक्रामक व्यक्ति उन दूतावासों के लिए सर्वश्रेष्ठ अधिकारी नहीं होते, जिन्हें दुष्प्राप्य और कभी-कभी दिग्भ्रम की शांति नामक फसल को बोने या विकसित करने के लिए डिजाइन किया गया है. लेकिन चूंकि असामान्यता भारत-पाक संबंधों में एक सामान्य अवस्था है, इसलिए उचित है कि इस नियुक्ति पर कम जाहिर नजर फेरी जाए.

इस बात के संकेत हैं कि भारत-पाक संबंधों में जमी बर्फ जल्दी ही कुछ पिघल सकती है, क्योंकि दोनों देश अपने कंचे खो चुके स्कूली बच्चों की तरह बर्ताव की निर्थकता समझ रहे हैं. इन पंक्तियों के लिखे जाने के दौरान पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी संबंधों में गर्माहट लाने के मिशन पर दिल्ली में हैं,जिसमें उनके दोस्त और शांतिवादी मणि शंकर भी साथ हैं.

कसूरी यह दावा करते रहे हैं कि यदि वकीलों के आंदोलन के कारण मार्च 2007 में परवेज मुशर्रफ की गाड़ी पटरी से नहीं उतरी होती, तो वे डॉ. मनमोहन सिंह को एक लंबी बातचीत के लिए इस्लामाबाद आमंत्रित करते और इसका आखिरी दौर कश्मीर पर एक समझौते के साथ होता, जिसमें 15 वर्ष के बाद संधि की समीक्षा का विकल्प भी शामिल रहता.

पद जाने के बाद पूर्व विदेश मंत्रियों में कुछ ज्यादा ही आशावादी हो जाने की प्रवृत्ति होती है, लेकिन हमें इस तरह के आत्मविश्वास भरे दावे को यूं ही नहीं छोड़ देना चाहिए. एक छोटी सी गूंज यह भी उभर रही है कि थिंपू में होने वाली अगले दौर की वार्ताएं बड़ी पहलों के लिए द्वार खोल सकती हैं.

अगर शांतिवार्ता की बारी आएगी, तो बशीर को अपने सामने की ढाल से ज्यादा मजबूत ढाल की जरूरत पृष्ठ भाग बचाने के लिए पड़ेगी.


भारत के गृह सचिव जीके पिल्लई ने पिछले हफ्ते दिल्ली में कहा था कि कश्मीर घाटी में पैरामिलेट्री फोर्सेस में 25 फीसदी तक कटौती होनी चाहिए. यह भी सच है कि 24 घंटे के भीतर ही वे दूसरी टांग पर उछल रहे थे और दावा कर रहे थे कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के दोषियों को कानून के कटघरे में लाने के लिए कुछ नहीं किया और वास्तव में हाफिज सईद व उस जैसे लोगों की खातिर में लगा रहा. लेकिन उपमहाद्वीप के शब्दाडंबर में इस तरह का नृत्य जाना-पहचाना है.

खुर्शीद कसूरी के आत्मविश्वास के पीछे एक कारण यह तथ्य है कि वे सैन्य शासन में विदेश मंत्री थे. लेकिन कसूरी के राजनीतिक शिखर काल से पाकिस्तान अब बदल चुका है. इसके चरमपंथी महज बोलने से आगे बढ़ चुके हैं. सलमान तासीर की हत्या इसकी बानगी है.

पाकिस्तान के उदारवादी दुबके हैं, क्योंकि देश का सुरक्षा ढांचा उनकी सलामती की गारंटी देने में सक्षम नहीं रहा. वहां इस्लाम के जमात ए इस्लामी द्वारा प्रचारित प्रकार को लेकर व्यापक लोकप्रियता और सहयोग है. कुछ टिप्पणीकार खुलकर कह रहे हैं कि यह बहुमत में बदल चुका है. इस अनुमान में कुछ अतिशयोक्ति हो सकती है,लेकिन इसकी व्यापकता साफ नजर आती है. न सिर्फ हत्यारों को नायकों की तरह पूजा जाना प्रमाण है, बल्कि टेलीविजन के वे टॉक-शो भी हैं, जिनमें दर्शक के तौर पर मध्यम वर्ग बैठा होता है.

भारत-पाक रिश्तों का खाका आंखों पर पट्टी बांधकर नहीं खींचा जा सकता. अगर राजनीतिक वर्ग तैयार न हो, तो सरकारें शांति के लिए मोल-तोल नहीं कर सकतीं. दिल्ली या इस्लामाबाद में नियुक्त होने वाले किसी भी भारतीय या पाकिस्तानी दूत में दो चेहरों से विपरीत दिशाओं में देखने वाले यूनानी देवता जानॅस की तरह गुण होने चाहिए. उसमें अपने मेजबान के साथ तनाव को शांत करने की क्षमता के साथ अपने देश को यह समझा सकने की विश्वसनीयता होनी चाहिए कि वह अपने लोगों के हितों पर कुठाराघात नहीं कर रहा है.

इस राह पर कुछ भी हो जाने की आशंका हमेशा होती है, लेकिन अगर सलमान बशीर दिल्ली पहुंचते हैं, तो वे अपनी दो जिम्मेदारियों में से इस अहम काम के लिए एकदम उपयुक्त होंगे : अपने लोगों को भरोसा दिलाना कि पाकिस्तान के हित सक्षम हाथों में हैं. अगर शांतिवार्ता की बारी आएगी, तो बशीर को अपने सामने की ढाल से ज्यादा मजबूत ढाल की जरूरत पृष्ठ भाग बचाने के लिए पड़ेगी. यह भारत-पाक संवाद का ऐसा युग है, जिसमें हमें गा सकने वाले बाज जैसे असाधारण पक्षी की जरूरत है.

हम जानते हैं कि उड़ने की इच्छा होने पर बशीर बाज हो सकते हैं. दिल्ली में हम देखेंगे कि क्या वे गा भी सकते हैं?

*लेखक ‘द संडे गार्जियन’ के संपादक और इंडिया टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर हैं.

23.01.2011, 05.11 (GMT+05:30) पर प्रकाशित


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