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राजशाही के पीछे की ताकत

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राजशाही के पीछे की ताकत

एम जे अकबर


एक उंगली के स्पर्श के माध्यम से ब्रिटेन के हाउस ऑफ विंडसर की तीसरी जीवित पीढ़ी में शक्ति के हाथ बदल गये हैं. यह विवाह समारोह के सबसे नाटकीय हिस्से के दौरान हुआ, जब प्रिंस विलियम ने एक कुलीन परिवार के बजाये आम परिवार से ताल्लुक रखने वाली खूबसूरत केट मिडिलटन की उंगली में अंगूठी पहनाना शुरू किया. अब या तो अंगूठी बनाने वाला ज्वेलर बेवकूफ होगा जिसने नाप लेते वक्त गड़बड़ी कर दी या फिर हर्षित केट ने ज्वेलर को नाप देने के बाद अपना वजन ही बढ़ा लिया होगा. चूंकि बाद की संभावना उतनी नहीं जमती, इसलिए पहली बात ही सही होनी चाहिए. दूल्हा, दुल्हन की उंगली में अंगूठी पहनाने के लिए संघर्ष कर रहा था और सांसें रोके दुनिया इसे टेलीविजन कैमरों के माध्यम से देख रही थी.

विस्मय और तमाशे के बीच कोई बहुत ज्यादा दूरी नहीं होती. कुछ सेकंड यह संघर्ष और चलता, तो जादू उतरना शुरू हो चुका होता. कश्मकश को बेहतरीन तरीके से भांपकर और धीरज को जरा भी गंवाए बगैर, केट ने विलियम का हाथ थाम लिया और पूरी निपुणता से अंगूठी को उसके घर तक ले आई- वह घर, जहां अगर सबकुछ अच्छा रहा, तो वह अंगूठी के स्थायी विश्राम का ठिकाना होगा.

अब हम जानते हैं कि जब केट और विलियम ब्रिटेन के राजा और रानी बनेंगे, तो लगाम किसके हाथ में होगी. इस वैवाहिक बंधन में कम से कम तीन बातें पहली पहली बार हुईं. यह पहली ब्रिटिश शाही शादी है, जिसमें 50 प्रतिशत हिस्सा शाही नहीं है. शाही परिवार में यह पहली बार हुआ है कि दुल्हन उम्र में दूल्हे से बड़ी है. विलियम की मां, डायना सिर्फ 19 साल की थीं, जब उन्होंने कहीं ज्यादा बड़े चार्ल्स से शादी की थी. और डायना के मामले के विपरीत, किसी ने भी यह जानने में दिलचस्पी नहीं दिखाई कि क्या केट कुंवारी हैं या फिर उन्होंने कौमार्य विलियम के लिए खोया है. ब्रिटिश शाही परिवार अपने 21वीं सदी के शख्सों की समतावादी भावना के साथ जुड़ चुका है.

ब्रिटिश शाही परिवार की असाधारण और यहां तक कि मर्मस्पर्शी सफलता का रहस्य आगे बढऩे के लिए पीछे कदम रखने की उसकी अद्वितीय क्षमता में निहित है. अगर दुनिया भर में उनके बचे-खुचे साथी इसे समझ गए होते, तो वे उस मुसीबत में नहीं फंसे होते, जिससे वे फिलहाल घिरे हुए हैं. बीती सदी ने जितने बदलाव, विकास, युद्ध, क्रांतियां और उलट-पुलट देखे, उतने इतिहास के किसी और कालखंड ने नहीं देखे.

मुझे लगता है कि केट एक फौलादी शख्सियत हैं, जो विंडसर में अपने योगदान से उस परिवार का अच्छी तरह से विकास और पालन-पोषण कर सकती हैं.

विंडसर के बुद्धिमान लोगों ने इस राजवंश को बदलाव के योग्य बनाया है, इससे पहले कि वे बाहर के बेकाबू ज्वार के चलते बदल दिए जाएं. उन्होंने नियमित चरणों में धीरे-धीरे परम ‘दैव-अनुमोदित’ प्राधिकार बिना किसी झमेले के छोड़ दिया और एक निर्विकार, अविचलित संस्था के रूप में फल-फूल गए, जो राष्ट्रीय सामाजिक एका के लिए चुंबकीय शक्ति की तरह है. कोई भी निर्वाचित ब्रिटिश प्रधानमंत्री इतना मूर्ख नहीं हो सकता कि उनके खिलाफ, अपनी इच्छा शक्ति का परीक्षण करे.

इस शाही और विभूतिमान प्रभामंडल में कुछ तो है, जो वास्तविकता की जगह लेता है. क्या कोई पैंट के साथ सार्जेंट-मेजर की, कमर से लेकर जूतों तक गिरती लाल खड़ी स्लैश पहने हुए नजर आ सकता है? लेकिन वहां वे थे, विलियम और डैडी चार्ल्स, वेडिंग ड्रेस में, जो निश्चित तौर पर पिनस्ट्राइप के बिल्कुल विपरीत था. और वे बराबर शिष्ट भी नजर आ रहे थे.

ब्रिटिश शाही रीतियों में बहुत कुछ है, अलंकरण से लेकर शिष्टाचार तक, अधीनस्थ कर्मचारियों का कृत्रिम अभिमान भी नहीं छूटा है, जिसने महल को आबाद किया है. ये रीतियां संभावित कार्टूनों की चीज हैं, जो एक दूरी से बेहद भुरभुरी नजर आती हैं. पर हैं रेशम की तरह मजबूत.

यदि आप या मैं धूमधाम का दिखावा करें, तो हम शायद ही शानदार और प्रतापी दिखेंगे. शुक्रवार को विंडसर के निवासियों ने दुनिया को हर धूम दिखाई और यह पूरी तरह से उपयुक्त प्रतीत हो रहा था. एक क्षेत्र, जिसमें संभवत: वे आधुनिकता की ओर सुधार करना चाहें, उनके नाम हो सकते हैं. मेहमानों की सूची में तमाम हेनरी आर्थर लुईस विदरस्पून-कटलरी बरकरार रही.

कोई भी शादी परंपराओं और भावनाओं के प्रदर्शन का मौका होती है और निश्चित तौर पर किसी की भी पहली इच्छा होगी कि शादी पर खुशियों की मेहर बरसे. वैवाहिक सुख के मामले में क्वीन एलिजाबेथ के बच्चों, या उनकी बहन का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं है. विलियम ऐसे परिवार की संतान हैं, जो निर्दय मीडिया की जलजलाहट में टूट गया था. उसकी मां डायना ने वास्तविक या फिर काल्पनिक तिरस्कार का बदला निष्ठुरता और प्रेमियों के विचित्र सिलसिले के जरिए लिया, जो निर्मम गॉसिप का विषय बन गया. लेकिन विलियम की परंपरा, उसका खानदानी खून गलतियों के लिए नहीं, बल्कि पुन:प्राप्ति के लिए है. मुझे लगता है कि केट एक फौलादी शख्सियत हैं, जो विंडसर में अपने योगदान से उस परिवार का अच्छी तरह से विकास और पालन-पोषण कर सकती हैं. ईश्वर को धन्यवाद इसलिए देना चाहिए कि केट एक सामान्य परिवार से आती हैं और एक सामान्य परिवार का होने के कारण उनकी बुद्धि भी सहज है.

 

*लेखक ‘द संडे गार्जियन’ दिल्ली व 'इंडिया ऑन संडे' लंदन के संपादक और इंडिया टुडे, हेडलाइंस टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर हैं.
01.05.2011, 00.43 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

 

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shyam bihari shyamal [shyambiharishyamal1865@hotmail.com] Varanasi ( up ) INDIA - 2011-05-08 01:32:13

 
  जीवंत टिप्पणी! बधाई... 
   
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