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एक लिस्ट ऐसी भी

विचार
 

एक लिस्ट ऐसी भी

प्रीतीश नंदी

पिछले हफ्ते जब मैंने ट्विटर पर कहा कि इंसेप्शन एक मूर्खतापूर्ण, आडंबरपूर्ण और ओवर रेटेड फिल्म है, तो मेरे कई फॉलोअर्स नाराज हो गए. कुछ ने मुझसे व्यंग्यपूर्ण लहजे में यह भी पूछ लिया कि आखिर मैं किस तरह की फिल्में देखना पसंद करता हूं?

शायद यह कॉलम उनके इस सवाल का एक संभावित जवाब हो. मैं सीधी-सरल, डाउन टु अर्थ फिल्में पसंद करता हूं. मैं सत्यजित राय की फिल्में देखकर बड़ा हुआ. उनकी फिल्मों की जो बातें मुझे सबसे अच्छी लगती थीं, वे थीं कहानी सुनाने का सीधा-सरल तरीका, संयत भावनाएं, सौम्य संगीत (जिसे वे सामान्यत: खुद ही कम्पोज करते थे) और कभी न भुलाए जा सकने वाले संवाद.

अब वे नहीं हैं, लेकिन आज भी कई फिल्मकार ऐसे हैं, जो सत्यजित राय सरीखी विस्मयकारी मेधा का परिचय देते हैं. इनमें से मेरे पसंदीदा फिल्मकार हैं वूडी एलेन.

मुझे वूडी एलेन की जो फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है, वह है मैनहट्टन. यदि आप वास्तविक संबंधों के जादू को नुमायां करने वाली कोई फिल्म देखना चाहते हैं, तो आइके और ट्रैसी की यह कहानी देखिए. फिल्म की शुरुआत गेर्शविन के रैप्सडी इन ब्लू के एक अंश और गगनचुंबी इमारतों से छिदे हुए न्यूयॉर्क के आकाश के एक शॉट के साथ होती है.

जैसे ही कैमरा मुस्तैदी के साथ अंतहीन ऊर्जा से भरे इस शहर में प्रवेश करता है, हम वूडी एलेन की आवाज सुनते हैं, जो न्यूयॉर्क के बारे में कुछ इस तरह बताते हैं, जैसे जुबिन मेहता की छड़ी के इशारे पर फिलाहार्मोनिक में संगीत की लहरें पैदा होती हैं.

हम मैनहट्टन में हैं, एलाइन के कैफे के भीतर. आइके और ट्रैसी अपने दोस्तों के साथ हैं और फिल्म धीरे-धीरे हमें उनकी दुनिया और उनके रिश्तों से परिचित कराने लगती है. मैं मैनहट्टन को कई कारणों से पसंद करता हूं, लेकिन एक अहम कारण यह भी है कि वूडी एलेन की ही तरह मैं भी न्यूयॉर्क शहर की अंतहीन ऊर्जा को बहुत पसंद करता हूं.

मैं न्यूयॉर्क कम ही जाता हूं, लेकिन इसके बावजूद मेरे लिए वह दुनिया के महानतम शहरों में से है. बहरहाल मैनहट्टन का सबसे यादगार पल वह है, जब फिल्म के अंत में आइके काउच पर पसरकर सोचने लगता है कि उसका जीवन जीने योग्य है भी या नहीं.

इसके बाद वह उन दस चीजों की फेहरिस्त बनाने की कोशिश करता है, जो उसे खुशी दे सकती हैं. वह एक के बाद एक लिखता चला जाता है: ग्रोउचो मार्क्सउ, विली मेस, जुपिटर सिंफनी का दूसरा मूवमेंट, लुई आर्मस्ट्रांग का पोटेटोहेड ब्ल्यूज, स्वीडिश फिल्में (मेरा अनुमान है उनका आशय बर्गमैन की फिल्मों से होगा), फ्लॉबेर का उपन्यास सेंटीमेंटल एजुकेशन, मार्लन ब्रांडो, फ्रैंक सिनात्रा, सेजां के सेब और नाशपातियां, सैम वू के केकड़े.

फिर वह एक लंबी सांस भरता है और कुछ सोचकर एक और नाम लिखता है : ट्रैसी का चेहरा. और ठीक इसी समय सबकुछ बदल जाता है. महज पलभर में.

आइके ट्रैसी को कॉल करने की कोशिश करता है. उसका फोन बिजी है. वह अपार्टमेंट से बाहर निकलता है और सड़क पर दौड़ने लगता है. वह एक टैक्सी लेने की कोशिश करता है, लेकिन कोई टैक्सी खाली नहीं मिलती. वह और तेज दौड़ने लगता है. संगीत की गति भी बढ़ जाती है. अब वह एक फोन बूथ से कॉल करने की कोशिश करता है.

अच्छी फिल्में हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं. वे हमारा जीवन बदल सकती हैं. वे हमें नई दृष्टि और नई संवेदना दे सकती हैं.

ट्रैसी का फोन अब भी बिजी है. वह फिर दौड़ने लगता है. जैसे ही वह ट्रैसी के घर पहुंचता है, ठीक तभी वह लंदन जाने के लिए घर से निकलती है. इस मौके पर वे एक-दूसरे से जो कहते हैं, उनसे बेहतर संवाद मैंने सिनेमा में शायद ही कभी सुने हों. उन्हें यहां दोहरा पाना मुमकिन नहीं. इसके लिए आपको मैनहट्टन देखनी होगी, ताकि आप जान सकें कि क्यों मैं उसे सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक बताता हूं. इस फिल्म की सरलता जीवन के प्रति हमारा नजरिया बदल सकती है.

लेकिन यह कॉलम मैनहट्टन के बारे में नहीं है. यह वूडी एलेन के बारे में भी नहीं है. यह खुद से पूछे गए एक सवाल के बारे में है. यह उस सवाल के बारे में है, जो आइके खुद से पूछता है कि दुनिया में उसके लिए दस सबसे जरूरी चीजें क्या हैं, लेकिन वह अंतत: ग्यारहवीं को चुनता है: ट्रैसी का चेहरा.

एकांत के क्षणों में हम खुद से यह सवाल कितनी बार पूछते हैं? कितनी बार हम उन चीजों के बारे में सोचते हैं, जिनके कारण हमें यह महसूस होता है कि जीवन वास्तव में जीने योग्य है? मैंने अपने लिए अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग सूचियां बनाई हैं. हर बार मैं बीच में ही रुक जाता हूं और फिर सूची में कुछ बदलाव करने लगता हूं. हर बार मैं सबसे महत्वपूर्ण दस चीजों का चयन करते समय खुद से बहस करता हूं, लेकिन ग्यारहवीं का चयन करते समय मैं कभी एक क्षण को भी नहीं झिझका.

हममें से सभी के पास अपने दिल के किसी कोने में ट्रैसी का चेहरा होता है. लेकिन यह स्वीकारने के लिए साहस चाहिए, ठीक वैसा ही साहस, जैसा आइके ने दिखाया. किसी के पास दौड़कर जाने और अपनी गलती स्वीकारने के लिए साहस चाहिए.

अक्सर तो यही होता है कि हम इस क्षण से दूर भागते रहते हैं. लेकिन हम ट्रैसी के चेहरे को केवल तभी देख सकते हैं, जब हम चुपचाप बैठकर सोचें और खुद से पूछें कि वे चीजें कौन-सी हैं, जो जीवन को जीने योग्य बनाती हैं. आप यह देखकर हैरान रह जाएंगे कि ऐसी चीजें बहुत हैं.

मुझे हर बार अनेक विकल्पों में से चयन करना पड़ता है. हम इस सूची को जितनी बार चाहें, बदल सकते हैं. हम गलतियां कर सकते हैं, लेकिन हर बार हम एक ही निष्कर्ष पर पहुंचेंगे: लगभग किसी जादू की तरह ट्रैसी का चेहरा हमारी आंखों के आगे तैर जाएगा.

इसीलिए अच्छी फिल्में हमारे लिए इतनी महत्वपूर्ण होती हैं. वे हमारा जीवन बदल सकती हैं. वे हमें नई दृष्टि और नई संवेदना दे सकती हैं. और यदि हमने साहस दिखाया और उनके समक्ष अपना दिल खोलकर रख दिया तो वे हमें यह भी सिखा सकती हैं कि किस तरह हम अपने भयों से मुक्त हो जाएं.

रही बात इंसेप्शन की, तो यदि आप इस वर्ष ऑस्कर के लिए शॉर्टलिस्ट होने वाली फिल्में ही देखना चाहते हैं तो मैं आपको द फाइटर या द किंग्स स्पीच या द ब्लैक स्वान देखने का सुझाव दूंगा. ये फिल्में इंसेप्शन की तुलना में कहीं बेहतर हैं.

27.05.2011, 08.45 (GMT+05:30) पर प्रकाशित


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