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अन्ना की क्रान्ति

बात पते की

 

अन्ना की क्रान्ति

अरुंधति राय


जो कुछ भी हम टी. वी. पर देख रहे हैं, अगर वह सचमुच क्रान्ति है तो यह मौजूदा दौर की सर्वाधिक शर्मनाक और समझ में न आने वाली क्रान्ति होगी. आज की तारीख में जन लोकपाल बिल के बारे में आपके जो भी सवाल हों, उम्मीद है कि आपको ये जवाब मिलेंगे : बॉक्स पर निशान लगा लीजिए - (ए) वन्दे मातरम, (बी) भारत माता की जय, (सी) इंडिया इज अन्ना, अन्ना इज इंडिया, (डी) जय हिंद.

अरुंधति राय

आप कह सकते हैं कि बिलकुल अलग कारणों और बिलकुल अलग तरीके से, माओवादियों और जन लोकपाल बिल में एक बात समान है- वे दोनों ही भारतीय राज्य को उखाड़ फेंकना चाहते हैं. एक नीचे से ऊपर की ओर काम करते हुए, व्यापक तौर पर गरीबतम लोगों से गठित आदिवासी सेना द्वारा छेड़े गए सशस्त्र संघर्ष के जरिए, तो दूसरा ऊपर से नीचे की तरफ काम करते हुए ताजा-ताजा गढ़े गए एक संत के नेतृत्व में, अहिंसक गांधीवादी तरीके से, जिसकी सेना में मुख्य तौर पर शहरी और निश्चित रूप से बेहतर जीवन जी रहे लोग शामिल हैं. (इसमें सरकार भी खुद को उखाड़ फेंके जाने के लिए हर संभव सहयोग करती है.)

अप्रैल 2011 में, अन्ना हजारे के पहले "आमरण अनशन" के कुछ दिनों बाद सरकार की साख को चूर-चूर कर देने वाले भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े घोटालों से जनता का ध्यान हटाने के लिए सरकार ने टीम अन्ना; "सिविल सोसायटी" ग्रुप ने यही ब्रांड नाम चुना है, को नये भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून की ड्राफ्टिंग कमेटी में शामिल होने का न्यौता दिया. कुछ महीनों बाद ही इस कोशिश को धता बताते हुए, उसने अपना खुद का विधेयक संसद में पेश कर दिया, जो इतना दोषपूर्ण था कि उसे गंभीरता से लिया ही नहीं जा सकता था.

फिर अपने दूसरे "आमरण अनशन" के लिए तय तारीख 16 अगस्त की सुबह, अनशन शुरू करने या किसी भी तरह का कानूनन जुर्म करने के पहले ही अन्ना हजारे को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया. जन लोकपाल बिल के लिए किया जाने वाला संघर्ष, अब विरोध करने के अधिकार के लिए संघर्ष और खुद लोकतंत्र के लिए संघर्ष से जुड़ गया. इस 'आजादी की दूसरी लड़ाई' के कुछ ही घंटों के भीतर अन्ना को रिहा कर दिया गया. उन्होंने होशियारी से जेल छोड़ने से इन्कार कर दिया, बतौर एक सम्मानित अतिथि तिहाड़ जेल में बने रहे और किसी सार्वजनिक स्थान पर अनशन करने के अधिकार की मांग करते हुए वहीं पर अपना अनशन शुरू कर दिया. तीन दिनों तक जबकि तमाम लोग और टी.वी. चैनलों की वैन बाहर जमी हुई थीं, टीम अन्ना के सदस्य उच्च सुरक्षा वाली इस जेल में अन्दर-बाहर डोलते रहे और देश भर के टेलीविजन चैनलों पर दिखाए जाने के लिए उनके वीडियो सन्देश लेकर आते रहे. (क्या किसी और को यह सुविधा मिल सकती है?) इस बीच दिल्ली नगर निगम के 250 कर्मचारी, 15 ट्रक और 6 जे सी बी मशीनें कीचड़ युक्त रामलीला मैदान को सप्ताहांत के बड़े तमाशे के लिए तैयार करने में दिन रात लगे रहे. अब कीर्तन करती भीड़ और क्रेन पर लगे कैमरों के सामने, भारत के सबसे महंगे डाक्टरों की देख रेख में, बहुप्रतीक्षित अन्ना के आमरण अनशन का तीसरा दौर शुरू हो चुका है. टी.वी. उद्घोषकों ने हमें बताया कि "कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है."

उनके तौर-तरीके गांधीवादी हो सकते हैं मगर अन्ना हजारे की मांगें कतई गांधीवादी नहीं हैं. सत्ता के विकेंद्रीकरण के गांधी जी के विचारों के उलट जन लोकपाल बिल एक कठोर भ्रष्टाचार निरोधी क़ानून है, जिसमें सावधानीपूर्वक चुने गए लोगों का एक दल हजारों कर्मचारियों वाली एक बहुत बड़ी नौकरशाही के माध्यम से प्रधानमंत्री, न्यायपालिका, संसद सदस्य, और सबसे निचले सरकारी अधिकारी तक यानी पूरी नौकरशाही पर नियंत्रण रखेगा. लोकपाल को जांच करने, निगरानी करने और अभियोजन की शक्तियां प्राप्त होंगी. इस तथ्य के अतिरिक्त कि उसके पास खुद का क़ैदखाना नहीं होगा, यह एक स्वतंत्र प्रशासन की तरह कार्य करेगा, उस मुटाए, गैरजिम्मेदार और भ्रष्ट प्रशासन के विरुद्ध, जो हमारे पास पहले से ही है. यानी एक के बजाए, अल्पजनाधिपत्य वाली दो व्यवस्थाएं.
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