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चांडाल चौकड़ी को नेस्तनाबूद करो

बात निकलेगी तो...

 

चांडाल चौकड़ी को नेस्तनाबूद करो

अन्ना हजारे


किरण बेदी पर हवाई यात्रा में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. किरण कई बार यह सपष्ट कर चुकी हैं कि यदि उन्होंने ऐसा किया है और उससे प्राप्त धन से अपना या अपने परिवार का भला किया हो तो सरकार अपनी किसी भी जांच एजेंसी से उनकी जांच करा सकती है तथा दोषी सिद्ध होने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है.

अन्ना हजारे


लेकिन ऐसा नहीं लग रहा है कि सरकार यह कदम उठाएगी. आरोप मढ़ना और बेईज्जती करना कुछ लोगों का मूल मंत्र बन चुका है. यह पहली बार नहीं है जब किरण बेदी के खिलाफ इस तरह के आरोप लगे हो. चांडाल चौकड़ी टीम अन्ना के प्रत्येक सदस्य पर आरोप लगा रही है और उनका चरित्र हनन कर रहा है. लेकिन ये लोग है कौन? ये वहीं लोग हैं जो जनलोकपाल के पक्ष में नहीं हैं.

चलिए, उस वक्त को याद करते हैं जब आंदोलन शुरु हो रहा था और जनलोकपाल बिल ड्रॉफ्ट करने के लिए संयुक्त समिति का गठन हो रहा था. वो कौन लोग थे जो कमेटी का विरोध कर रहे थे? आपको अहसास होगा कि यह चांडाल चौकड़ी थी जो विरोध में खड़ी थी. बातचीत के कई दौर के बाद अंततः मैंने पांच अप्रैल को जंतर-मंतर पर अनशन शुरु किया जहां लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए. ऐसा होने के बाद इन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और ये सुंयक्त समिति बनाने के लिए राजी हुए.

जब चार जून को रामलीला मैदान में बाबा रामदेव का धरना प्रदर्शन चल रहा था, तो मेरी उनसे मुलाकात अगले दिन पांच जून को तय थी, लेकिन चार जून की रात को 1.30 बजे ही बाबा रामदेव और उनके समर्थकों जिनमें पुरुष और महिलाएं, वृद्ध और बच्चे सभी शामिल थे, पर अचानक दिल्ली पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज कर दिया गया.

सरकार का इरादा साफ था- बाबा रामदेव और अन्ना हजारे की मुलाकात न हो. लेकिन क्या निर्दोष महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से पीटकर दिल्ली पुलिस अपनी मर्दानगी का प्रदर्शन कर रही थी? कौन थे वो लोग जिन्होंने महिलाओं पर लाठीचार्ज किया? ये वही लोग थे जो अब आरोप लगाने का गंदा खेल खेल रहे हैं. क्या ये वो लोग नहीं हैं? इस राज का भी पर्दाफाश जरूर होगा.

संयुक्त समीति तो बन गई लेकिन ये लोग नहीं चाहते थे कि जनलोकपाल बिल पास हो. अब इस चांडाल चौकड़ी ने सीडी मामले को लेकर श्री प्रशांत भूषण और श्री शांति भूषण पर आरोप लगाने शुरु कर दिए. किरण बेदी की ही तरह प्रशांत भूषण, शांतिभूषण ने इस मामले में बेकसूर होने के अपने दावे को बरकरार रखा एवं सरकार से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने के लिए कहा. लेकिन ये लोग जानते हैं कि यदि ये कानूनी रास्ते पर चलेंगे तो इनका उद्देश्य पूरा नहीं होगा. इनके पास सिर्फ एक ही रास्ता था, टीम अन्ना में असहमति का प्रसार करके लोगों को भ्रमित करना और उन्हें आंदोलन में शामिल होने से रोकना.

टीम अन्ना के एक ईमानदार सदस्य रिटार्यड जस्टिस हेगड़े, जिनकी वजह से कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री रहे येदियुरप्पा जेल में हैं, पर भी आरोप लगाए गए. उन पर आरोप लगाने वाले लोग कौन थे? आपके सामने यह बात जल्दी ही आएगी कि उसके पीछे भी यह चांडाल चौकड़ी ही थी.

अरविंद केजरीवाल पर भी आरोप लगाए गए और एक सभा में उन पर चप्पल से हमला हुआ. इसके पीछे कौन था? 16 अगस्त 2011 को मुझे दिल्ली में जनलोकपाल बिल पास करने की मांग को लेकर धरना करना था. एक महीने से मैं इस धरना प्रदर्शन क स्थल आबंटित किए जाने हेतु सरकार से पत्र व्यावहार और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए अनुमति लेने की कोशिश कर रहा था. लेकिन साजिश के तहत मेरे अनशन के लिए अनुमति नहीं दी जा रही थी और 15 अगस्त तक भी मैं सरकार की अनुमति का इंतजार ही कर रहा था. उन्होंने दिल्ली के तमाम सार्वजनिक स्थानों पर धारा 144 लगा दी. अंत में हमने तय किया कि हम अपनी गिरफ्तारी देंगे और जेल में ही अनशन पर जाएंगे. यह तथ्य कि इस साजिश के पीछे भी यह चांडाल चौकड़ी ही थी, अब स्पष्ट है.

16 अगस्त की सुबह 6 बजे मुझे मेरे घर से गिरफ्तार कर लिया गया. मैंने कोई अपराध नहीं किया था इसलिए उन्हें मुझे मेरे घर से गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं था. वो जानबूझकर मेरी बेइज्जती करना चाहते थे. मुझे तिहाड़ जेल भेज दिया गया. दोपहर चार बजे तक जरूरी कानूनी कार्रवाई की गई और हमें तिहाड़ जेल ले जाया गया. हमे एक कमरा दिया गया, कपड़े दिए गए और 6 बजे एक अधिकारी ने आकर हमे बताया कि हमारी सजा माफ कर दी गई है और हम आजाद है. अधिकारी ने बताया कि उसे आदेश दिया गया है कि हमे वहीं छोड़ दिया जाए जहां से हमे लाया गया है.
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