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प्रीतीश नंदी | अच्छा, बुरा और ख़राब भारत

विचार

 

अच्छा, बुरा और ख़राब भारत

प्रीतीश नंदी

 

 

आपको वह किस्सा याद है, जिसमें पांच दृष्टिहीन व्यक्ति एक हाथी का अपने-अपने हिसाब से आकलन करते हैं? यहां हर एक के दिमाग में इसके बारे में अपनी ही छवि थी कि वह कैसा दिखता है. खैर, आधुनिक भारत के बारे में भी लोगों की धारणा कुछ इसी तरह है. अलग-अलग लोग इसे भिन्न-भिन्न नजरिए से देखते हैं और हास्यास्पद ढंग से वे सब सही भी हैं. भारत इन सभी रूपों का मिला-जुला रूप है. अच्छा, बुरा और खराब.

कुछ लोगों के लिए भारत अमीरों का देश है. पिछले हफ्ते आई मैरिल लिंच की रिपोर्ट में वर्ष 2007 में प्रतिशत के हिसाब से हमारे यहां से सबसे ज्यादा अरबपति (23 फीसदी) पाए गए, जिनकी कुल मिलाकर संपत्ति 440 अरब डॉलर आंकी गई. इसने दुनिया की नजरों में हमें ऐसा देश बना दिया, जहां अवसरों की भरमार है. यहां तक कि इस वर्ष हमने युवा अरबपतियों की सूची में खासी उपस्थिति दर्ज कराई और फोर्ब्स की सूची में आज इतने भारतीय हैं, जितने पहले कभी नहीं रहे.

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भारतीय बेहतरीन संपत्तियों को खरीद रहे हैं. टाटा समूह ने दो बेमिसाल कार ब्रांड्स, जगुआर व लैंड रोवर के साथ-साथ दुनिया की सबसे बडी चाय कंपनी टेटली के अलावा जानी-मानी स्टील कंपनी कोरस को भी खरीद लिया. अनिल अंबानी ने पैरामाउंट से स्टीवन स्पीलबर्ग को खींच लिया और अब वे ब्रैड पिट, जॉर्ज क्लूनी, टॉम हैंक्स तथा जूलिया रॉबट्र्स जैसे हॉलीवुड के सुपरस्टार्स के साथ फिल्म बना रहे हैं.

विकास और कारोबार के लिहाज से कई लोगों को अपना पैसा लगाने के लिए भारत माकूल लगता है. जिस तरह भारत-अमेरिका परमाणु करार अपने सफल अंजाम की ओर बढ़ रहा है, उसे देखकर लगता है कि हम सिर्फ अमीर ही नहीं हैं, बल्कि ताकतवर भी हैं.

वहीं कुछ अन्य लोगों के लिए भारत इस ग्रह के दुनिया के सबसे खतरनाक स्थलों में से एक है. पिछले दो दशक में यहां इतने आतंकी हमले हुए, जितने और कहीं नहीं हुए. इसकी शुरुआत कश्मीर से हुई लेकिन अब यह चारों ओर फैल चुका है.

भारत को अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीके से देखते हैं और हास्यास्पद तरीके से सभी लोग सही भी हैं. एक भारत मिथ, मैजिक और मिस्ट्री का संगम बना हुआ है, वहीं दूसरा भारत त्रासद मिसाल की तरह देखा जाता है.


उडीसा, केरल, कर्नाटक और अब तमिलनाडु जैसे प्रदेशों में जिस तरह शांत ईसाई समुदाय पर जबरन धर्मांतरण के आरोप में हमले किए गए, उसे देखकर दुनिया सन्न है, लेकिन वह इसे लेकर ज्यादा हैरान है कि यहां कोई भी राजनीतिक दल ईसाइयों को बचाने के लिए आगे नहीं आया क्योंकि उनकी संख्या इतनी कम है, जिसका हमारी चुनावी राजनीति में खास महत्व नहीं है.

यहां तक कि सोनिया जैसी राजनेता भी नहीं चाहतीं कि उन पर ऐसे लोगों के प्रति नरम होने के आरोप लगें, जिनके धार्मिक मूल्य उनसे जुदा नहीं हैं. इसी बीच, हमें एक ओर इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर से निपटना है, तो दूसरी ओर बजरंग दल व विहिप जैसे संगठन भी हैं. यहां तक कि हमारे यहां अपनी ही एक बम प्लांटिंग सनातन संस्था है जो मानती है कि वह अलकायदा को सबक सिखा सकती है.

तीसरे समूह के लोगों के लिए भारत दुनिया में सबसे ज्यादा खूबसूरत और जादुई मुल्क है. यहां बेजोड़ महल और किले हैं, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ होटल हैं, बेहतरीन रिसॉर्ट्स हैं, कमाल के समुद्र तट हैं, सबसे ज्यादा कलरफुल फिल्म इंडस्ट्री है.

यदि ग्लोबल बॉक्स ऑफिस के हिसाब से देखा जाए, तो हॉलीवुड फिल्मों के बनिस्बत एक अरब से ज्यादा लोग भारतीय फिल्में देखते हैं. भारत में सबसे ज्यादा फिल्में बनती हैं, यहां ज्यादातर टीवी चैनल प्रसारित होते हैं, दुनिया के बडे-बडे अखबार, नेट पर सबसे तेजी से बढ़ता समुदाय. इसके फैशन डिजायनर्स नई-नई चीजें लेकर आ रहे हैं. इसके मॉडल्स वास्तव में मोहक हैं. इसके फिल्मी सितारे बेजोड़ हैं. भारत में मिथ, मैजिक और मिस्ट्री, तीनों का संगम है. एक बार इसकी खूबसूरती और आध्यात्मिकता के वशीभूत होने के बाद आप यहां से कहीं और नहीं जाना चाहेंगे.

इसके अलावा ऐसे और भी कई लोग हैं, जो भारत को ऐसी त्रासद मिसाल के रूप में देखते हैं कि किस तरह एक सार्थक लोकतंत्र पूरी तरह से गलत हो सकता है. मानवाधिकार सूचकांक पर यह लगातार फिसल रहा है. सर्वव्यापी भ्रष्टाचार के चलते आज भी लाखों लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं. बाढ़, सूखा, पर्यावरणीय असंतुलन ने दुनिया के सबसे संपन्न देशों में एक इस देश को वापस कमर तोड़ गरीबी के दौर में पहुंचा दिया है. यहां के लाखों लोगों को निरक्षरता, जातिवाद, बीमारियों और अंधविश्वासों ने गुलाम बना रखा है.

गंदी राजनीति और मिलीभगत के पूंजीवाद ने इस महान गणतंत्र के लिए यह व्यावहारिक रूप से असंभव बना दिया है कि वह उठे और अतीत की उन बेड़ियों से मुक्त हो जाए, जिसने अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही गंदी राजनीति और अक्षम नौकरशाही का गुलाम बना रखा है. एक तरह के उपनिवेशवाद को उसी तरह की दूसरी व्यवस्था के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया और त्रासदी यह है कि एक महान राष्ट्र अपनी असली क्षमता को पहचान नहीं सका. लाखों लोग आज भी उसी जगह पर हैं, जहां वे वर्षों पहले थे. बेघर, असहाय और हताश.

आखिर में, यहां ऐसे लोग भी हैं जो भारत को दुनिया के सबसे शक्तिशाली बाजार के तौर पर देखते हैं. यहां दूसरे मुल्कों के मुकाबले सबसे ज्यादा टीवी दर्शक हैं, सेलफोन धारकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ज्यादा से ज्यादा लोग नेट पर सर्फिंग करते हैं, ज्यादातर लोग कार खरीद रहे हैं, अखबार पढ़ रहे हैं, सोना खरीद रहे हैं और जमीन व अन्य संपत्तियों को अर्जित कर रहे हैं.

भारत सभी प्लेटफारर्म्स पर मीडिया का सबसे बडा उपभोक्ता है, इसके अलावा यह एंटरटेनमेंट का भी सबसे बडा ग्राहक है. यह किसी भी चीज के लिए अपनी अजगरी भूख की प्रवृत्ति के चलते मौजूदा दुनिया के लिए खुदरा कारोबार के सबसे ज्यादा अवसर पेश करता है. यहां हर व्यवसाय का भविष्य है. घर बनाना, सड़कें, ऊर्जा, ईंधन, तकनीक, होटल्स, खाद्य पदार्थ, दवाइयां, शिक्षा, ज्ञान, स्वास्थ्य सेवाएं, बीमा आदि. आप किसी का भी नाम लीजिए और भारत को यह चाहिए. हम ऐसा विशाल बाजार हैं, जो बेहतरीन और ताजातरीन उत्पादों की तलाश में है. दुनिया में आपको ऐसा अवसर और कहां मिलेगा?

हां, हर कोई अपने खुद के विचारों की रोशनी में हमें अलग-अलग नजरिए से देखता है. आज जबकि बाकी दुनिया कर्ज और आपदा के जाल में उलझकर फड़फड़ा रही है, ऐसे में भारत की सही तस्वीर पेश करने का यही संभवत: सबसे अच्छा समय है. यह हमारे लिए फायदेमंद हो सकता है.

30.09.2008, 12.30 (GMT+05:30) पर प्रकाशि

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makrand(bhagwatmakrand@gmail.com)

 
 भारत सभी प्लेटफारर्म्स पर मीडिया का सबसे बडा उपभोक्ता है,  
   
 

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 अत्यन्त सम्यक विचार! भारत में महान क्षमताएँ छिपी उई हैं!! 
   

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