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गांधी पर गलत हैं काटजू

विचार

 

गांधी पर गलत हैं काटजू

रघु ठाकुर


प्रेस कौसिंल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमेन, श्री मार्कण्डेय काट्जू की छपरस पीड़ा बहुत बढ़ गई है तथा प्रेस कौसिंल के अध्यक्ष पद पर उन्हें दूसरा अवसर न मिलने के बाद से वे, निंरतर, बोली -भाषा में विकृत जैसे होते जा रहे हैं.

काटजू


श्री मार्कण्डेय काट्जू ने महात्मा गांधी के विरुद्ध झूठ और हल्के स्तर की निंदा का अभियान शुरु किया है. उन्होंने गॉधी को विशेष साम्राज्यवाद का एजेन्ट घोषित किया. काट्जू इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायधीश और बाद में भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश रहे हैं. उनका ज्ञान, इतिहास और तथ्यों के बारे में इतना अल्प होगा, यह आश्चर्यजनक सत्य है.

उनका यह आरोप लगभग वैसा ही है जैसा 40 के दशक में गॉधी के विरुद्ध कम्युनिस्ट लोग लगाते रहे थे. कम्युनिस्ट मित्रों ने पहले तो महात्मा गॉधी को भारतीय पूंजीपतियों का दलाल एवं अंग्रेजों का एजेन्ट कहा, परन्तु जब 9 अगस्त 1942 को गॉधी ने कम्युनिस्टों की राय के विरुद्व कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में ’’अंग्रेज भारत छोड़ो’’ और ’’करो या मरो’’ का प्रस्ताव पारित कराया एवं हिटलर के तानाशाही के भय के नाम पर भारत की सम्पूर्ण आजादी के प्रस्ताव को वापिस लेने से इंकार किया. तब वही कम्युनिस्ट जो महात्मा गॉधी को अंग्रेजों का पिट्टू और दलाल कह रहे थे वे स्वतः अंग्रेजों के दलाल बन गये तथा आजादी के अन्दोलन का विरोध करने लगे.

श्री मार्कण्डेय काट्जू जिस काट्जू परिवार के हैं उसका संबन्ध कांग्रेस के साथ रहा है और यह भी आश्चर्यजनक है कि आज वे अपने ही पुरखों को अपमानित करने का प्रयास कर रहे हैं. श्री मार्कण्डेय के बयान की निंदा लोकसभा और राज्यसभा में सर्व सम्मति से हुई है. यानि, देश के सभी दलो ने एक स्वर, एक मत से उनके बयान को अमान्य किया है.

परन्तु श्री मार्कण्डेय काट्जू ने राष्ट्रीय भावना को समझे बगैर एक और अंहकारी बयान दिया कि वे चाहे तो मुझे फांसी दे सकते है और केवल अखबारी प्रचार के माध्यम से अपने आपको बहादुर सिद्ध करने का प्रयास कर रहे थे. वैसे तो श्री काट्जू की उपेक्षा ही उनका सबसे सटीक उत्तर हो सकता है, परन्तु उन्होंने 14 मार्च को पुनः यह बयान देकर कि ’’वफादार गांधी को पूज रहा है ब्रिटेन ‘‘ अपने ढ़ीठ और बेशर्म बयानों का सिलसिला जारी रखा.

यह बयान उन्होंने तब दिया जब लंदन में पार्लियामेन्ट स्कवायर में गांधी की मूर्ति का अनावरण हो रहा था और ब्रिटिश प्रधानमंत्री श्री केमरोन जो विश्व सत्ता से वंचित ब्रिटिश साम्राज्यवाद के अवशेष ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हैं. जिस ब्रिटेन के साम्राज्यवाद को महात्मा गांधी ने न केवल चुनौती दी थी बल्कि ब्रिटेन के द्वारा उपनिवेश बनाये गये देशों के लिये आजादी और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया था, वह ट्वीट कर रहे थे, कि महात्मा गांधी ने विश्व को मानवता के रास्ते पर ले जाने में महान योगदान दिया है.

निःसंदेह श्री काटजू की इस प्रतिभा का कायल होना पड़ेगा कि मीडिया में स्थान पाने का समय वे ठीक पहचानते हैं और मीडिया में छपने के लिये वे सूर्य की और देखकर थूकने का प्रयास करते है. भले ही वह गंदगी, जो सूर्य का तो कुछ नहीं बिगाड़ सकती, बल्कि उनका चेहरा क्यों न गंदा कर दे.
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वैसे तो महात्मा गांधी के पक्ष में सफाई देने की आज देश या दुनिया में कोई आवष्यकता नहीं है, क्योंकि पिछले 200 वर्षों के इतिहास में विश्व स्तर पर किसी और व्यक्ति की, यहॉ तक की बड़े से बड़े शासकों की स्वीकारता नहीं है, जो गांधी की है. और दुनिया में हर व्यक्ति अपने अधिकारों और आजादी को लेकर संघर्ष करने वाला कम या ज्यादा किसी न किसी रुप में गांधी से प्रेरणा लेता है.

फिर भी श्री काट्जू के आरोपों का तार्किक उत्तर देना जरुरी है क्यांेकि किसी भी व्यक्ति को बगैर बहस या तर्क के खारिज करना अलोकतंात्रिक भी होगा और गांधी की शैली का विरोध भी होगा. महात्मा गांधी तो उनके द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र में उनके विरुद्व लिखे गये पत्रो को भी छापते थे और फिर अपना पक्ष भी रखते थे. यह गांधी का जीवंत लोकतंत्र था.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

S.N.Gupta [sng353@gmail.com] Allahabad - 2015-04-08 04:56:43

 
  Katzu simply wants the attention of media. It is very difficult for such people, when they didn\'t see themselves in the news. Let him bark on such issues. Why media give him space for such issues. 
   
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