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मिस कॉल राजनीति कितनी सार्थक

विचार

 

मिस कॉल राजनीति कितनी सार्थक

रघु ठाकुर


भाजपा ने यह दावा किया है कि उनकी सदस्यता 8 करोड़ 67 लाख से ऊपर पहुंच गई है और वह दुनिया की, सदस्यता के हिसाब से, सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. यहॉ तक कि उनके दावे के अनुसार चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 8 करोड़ 47 लाख सदस्य संख्या से भाजपा की सदस्य संख्या ज्यादा हो गई है. इस उपलब्धि के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन गई है.

आईसिस


चीन में एक दलीय प्रणाली हैं अतः वहॉ 8 करोड़ या 80 करोड़ का कोई अर्थ नहीं है, परन्तु भारत जैसे देश में जहॉ कुल मतदाता याने 18 वर्ष और ऊपर के लोग 70 करोड़ के आस-पास है. उनमें यह सदस्यता अवश्य ही प्रभावी नजर आती है. कुछ मित्रों ने मुझसे इस भाजपा अभियान के बारे में मेरी राय भी मांगी है. यद्यपि मेरे एक पत्रकार मित्र ने बड़ी सटीक टिप्पणी की कि महिला से उम्र, एन.जी.ओ. से फंड का स्त्रोत और व्यापारी से आय की राशि नहीं पूछना चाहिये.

भाजपा की सदस्यता के दावे की कई पोलें भी हैं जिससे न केवल उनका दावा गलत नजर आता है बल्कि संदिग्ध भी नजर आता है.-
 

1. भाजपा ने ’आप’ पार्टी की तर्ज पर दूरभाष, मोबाईल सदस्यता अभियान आंरभ किया है. क्योंकि निंरतर समाचार पत्रों में ऐसे समाचार आये थे कि उनका वंछित लक्ष्य पूरा नहीं हुआ. 2014 के दिल्ली विधानसभा के चुनाव में 28 सीट पाकर बड़ी पार्टी उभरने के बाद आप पार्टी ने प्रचार तंत्र के माध्यम से दो अभियान शुरु किये. (1) केजरीवाल को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार (2)दूरभाष के नाम पर याने मिस्डकाल देकर सदस्य बनो की पद्धति से सदस्यता अभियान और उसके परिणाम-स्वरुप चंद दिनों में ही ’आप’ पार्टी को सदस्यों की संख्या 2 करोड़ के आस-पास पहॅुच गई थी. हालांकि मई 2014 के लोक सभा चुनाव में उनके दोनों दावे धूल धूसित हो गये.

2. मेरे पास अनेकों प्रमाणित सूचनायें हैं जहॉ पर भाजपा की सदस्यता झूठी सिद्ध होती है. लो.स.पा. के प्रदेश सचिव के पास एक टेप फोन आता है, जिस पर कहा जाता है, मैं शिवराज सिंह चौहान बोल रहा हॅू. मेरी सरकार ने बहुत काम किये है, आप भाजपा के सदस्य बने और उसके थोड़ी देर बाद बगैर किसी आवेदन के उनके पास एक एस.एम.एस आता है कि आप भाजपा के सदस्य बन गये तथा उन्हे सदस्यता क्रंमाक भी दे दिया जाता है. ऐसे फोन और संदेश अनेको वरिष्ठ पत्रकारों के पास भी पॅहुचे है. छ.ग. में तो कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष भी इस से भाजपा के सदस्य बन चुके है, ऐसी हास्यास्पद सदस्यता का क्या अर्थ है?

3. भाजपा की सदस्यता अभियान से यह निष्कर्ष अवश्य निकलता है कि भाजपा अब पूर्णतः एक उद्योग बन चुकी है, जिसमें नैतिक मूल्य, संकल्प या शपथ का कोई अर्थ नहीं हैं. केवल मशीन का खेल चल रहा है. जिस प्रकार सामाजिक मीडिया में लाइक कराने वाली या ट्यूटर पर फालो करने वाली कम्पनियॉ सक्रिय है जो इस लाइक और फालो के सदस्यता को तैयार करती है और ठेका लेकर करोड़ों पसंदकर्ता अनुगमनकर्ता बना देते है. फिर उसका प्रचार कर आमजन के मस्तिष्क को दूषित किया जाता है कि अमुक व्यक्ति बहुत लोक प्रिय है जबकि यह सब मशीन और पैसे का खेल होता है. वैश्विक स्तर पर ऐसे प्रयोग अपनी जरुरत के अनुसार पुरुस्कार प्रदाता, श्रेणी प्रदाता और फोब्स या टाइम जैसी पत्रिकायें करती रहती है और इसीलिये आजकल बड़े से बड़े नामधारी और राशि वाले पुरुस्कारों का जमीनी वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है. बल्कि अमूमन वे पूंजीवादी विचार और व्यवस्था के लिये उपयुक्त पात्रों को पुरुस्कृत कर प्रचार के लिये सेलिब्रिटी बनाते है और खर्च के लिये राशि उपलब्ध करा देते है.

4. मान लो, थोड़ी देर के लिये भाजपा बड़ी पार्टी बन गई हो तो इस बड़े हुए से देश को क्या लाभ हो रहा है. केन्द्र में सरकार बनाने के बाद भाजपा ने भूमि अधिग्रहण कानून लाकर किसानों की जमीन छीनने का रास्ता खोला, रेल का भाड़ा बढ़ाया, प्लेट फार्म टिकिट पांच रुपये से दस रुपये किया, प्रीमियम तत्काल सेवाओं के नाम पर टिकिट की नीलामी शुरु की, जिससे गरीब आदमी अपने आप रेल सुविधा से वंचित हो जायेगा. सामान्य डिब्बें वाली गाड़ियों के बजाय बुलेट ट्रेन का सपना बेचना शुरु किया.

दुनिया के कच्चे तेल के दाम कम होने के बावजूद भी एक्साईज और वेट टैक्स बढ़ाकर संसद से पारित नीति का उलंघन किया और जनता के पैसे को निकाल लिया. आम बजट में कारपोरेट को टैक्स रियायत देकर लगभग छः लाख करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया. बीमा के क्षेत्र में विदेशी पूंजीनिवेश बढ़ाकर 49 प्रतिशत किया, आदि अनेकों जन विरोधी और राष्ट्रहित विरोधी काम किये है. ऐसा बड़ा होने से क्या लाभ है, ’’बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर, पंक्षी को छाया नहीं फल लागे अति दूर’’ भाजपा का सदस्यता अभियान अपने आप में एक राजनैतिक घोटाला है, और इसकी जांच की मांग को स्वतः भाजपा वालों को करना चाहिये.

दिल्ली विधानसभा के चुनाव में मोदी लहर की मुगालता को रोक दिया है. लोकसभा के चुनाव ने आप की केजरिया लहर के मुगालते को रोक दिया था, और शायद वह समय भी शीघ्र आयेगा जब भाजपा की सदस्यता और बड़ी पार्टी का मुगालता का पर्दाफास हो जायेगा.

वैसे भी लोकतंत्र के लिये ऐसी विषालता चिंताजनक और खतरनाक भी है, क्योंकि हमारे देश में लोकतांत्रिक प्रणाली तो है परन्तु लोकतंत्रिक मानस नहीं है और अमूमन सत्ताधारियों के वैचारिक संस्कार भी लोकतांत्रिक नहीं है. बहरहाल भाजपा के इस दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के दावे पर यही कहा जा सकता है कि ’’दिल बहलाने को गालिब ख्याल अच्छा है’’.

17.
04.2015, 19.39 (GMT+05:30) पर प्रकाशित


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