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किसानों का दर्द समझे सरकार

विचार

 

किसानों का दर्द समझे सरकार

रघु ठाकुर


अपने बचपन में, मैं गली मोहल्लों में घूमकर दांत के दर्द का इलाज करने वाले बहुरुपियों जिन्हें लोग और विशेषतः बच्चे जादूगर जैसा मानते थे, घूम-घूम आवाज देकर दांत का दर्द ठीक करते थे. वे जुमला उछालते थे, उंगली लगाओ दर्द गायब. म.प्र. के मुख्यमंत्री की हाल की ओला और बारिस से पीड़ितों के सम्बन्ध में की गई घोषणाओं एंव बयानों को पढ़कर मुझे यह पुरानी घटना स्मरण हो आयी.

सुषमा स्वराज


वैसे तो पिछले 3 वर्षो से लगातार किसान वे-मौसम बारिस से बरवाद हो रहा है कभी सोयाबीन नष्ट हुआ कभी गेहूं या चना, मसूर, अलसी, या सरसों आदि नष्ट हुये और यह वे- मौसम बारिस समूचे प्रदेश के किसानों को बगैर किसी भेद-भाव के तबाह करती रही है. इस बार फिर जब सर्दी का मौसम समाप्त होकर गर्मी आरंम्भ होने वाली थी तब बारिस और ओलों ने अचानक प्रदेश को अपने आगोश में समेट लिया.

आमतौर पर होली का पर्व ठंड की समाप्ति और गर्मी का आरम्भ होता है परन्तु इस बार होली के बाद मौसम ने किसानों के साथ जो होली खेली उसने प्रदेश के 33-34 जिलों के लाखों किसानों को बरबाद कर दिया. सरकार के अनुमान के अनुसार 3 लाख किसान इससे प्रभावित हुये है. सरसों की फसल जो तैयार खड़ी थी, चना, मसूर, जो किसानो की आशा थे रातों-रात या तो खेतों में दब गये या बिछ गये. जिनकी फसल कटकर खेतों या खलयानों में पहॅुची गई थी वह भीगकर दाने काले पड़ गये चारो ओर किसानों में हाहाकार आरम्भ हो गया.

अपनी जादूगरी शैली के मुताबिक मुख्यमंत्री जी ने स्वतः कुछ क्षेत्रो में जाकर बरबाद फसलों को देखा एकाध जगह गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ जाकर देखा. हालांकि गृहमंत्री की यात्रा के बाद भी किसानों की आत्महत्या की संख्या बढ़ती गई, अकेले भिन्ड जिले में 6 किसान आत्महत्या कर चुके हैं और प्रदेश में यह संख्या 40-50 के करीब पहॅुच चुकी है. मुझे उम्मीद थी, कि श्री राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री जी से इन घटनाओं को लेकर कुछ पूॅछताछ करेगे और उन्हें अपने अनुभव से कुछ सुझाव भी देगे, साथ ही दिल्ली में केन्द्र सरकार की तरफ से कुछ राहत विशेष दिलवायगे परन्तु कुछ भी नहीं हुआ.

गेहूं खरीद की स्थिति यह है कि बोनस जो 250 रु. प्रति कुन्टल था पहले ही समाप्त कर दिया गया. श्री शिवराज सिंह मोदी सरकार को और श्री मोदी राज्य सरकार को दोष दे रहे है और दूसरी तरफ स्थिति यह है कि किसानों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नही मिल रहा है. व्यापारी 800-900 रुपये से लेकर 1000-1100 रुपये के भाव से किसानो का गेहॅू खरीद रहा है और सरकारी खरीद के विकल्प के अभाव में किसान कम दामो पर गेहूं बेचने को लाचार है.

मुख्यमंत्री ने घोषणाओं और विज्ञापन के माध्यम से किसानो से वादा किये कि वे चिंता न करे सरकार किसानों के साथ है. उन्हें पूरा मुआवजा दिया जायेगा, खेत-खेत का आंकलन कराया जायेगा, दाना-दाना खरीदा जायेगा. इतना ही नही वे उसी दांत दर्द वाले दवा बेचू शैली में बोले, ओले किसान के खेत में नही मेरे सीने पर गिरे है.

परन्तु प्रदेश का किसान उनकी 3 वर्ष से घोषणाओं को सुनते सुनते निराश हो चुका है और उसके मन में सरकार के प्रति अविश्वास है, क्योंकि पिछले वर्षो का आंकलित नुकसान का मुआवजा अभी तक किसान के पास नहीं पहुंचा .
17 मार्च 2015 को हम लोगो ने भोपाल में किसानों का प्रर्दशन करते हुऐ सरकार को आगाह किया था कि इस बार किसानों की आत्महत्या के प्रकरण ज्यादा होगे और उसकी बजह भी बतायी थी कि:-
1. पिछले वर्षो का मुआवजा नहीं मिलने से किसानों को सरकारी वायदों पर विश्वास नहीं होता.
2. 3 वर्षो से लगातार प्राकृतिक विपत्ति झेल रहा किसान अभी और मानसिक रुप से टूट चुका है.
3. इन वर्षो में किसान के ऊपर सरकारी कर्ज के अलावा निजी कर्ज भी हो गया है और इसीलिये हम लोगो ने मुख्यमंत्री जी से मांग की थी कि पीड़ित किसान को आकलंन पूर्व ही मुआवजा के रुप में कुछ राशि दी जाये ताकि वह आश्वस्तत् रहे एंव उस राशि का समायोजन आकलंन के बाद हो सकता.

आज कल शहरी ग्रामीण अंचलो में साहूकार माफिया सक्रिय है जो न तो साहूकारी कानून के तहत पंजीकृत है न अधिकृत है वह किसानों और गरीबो का लाचारी का फायदा उठाकर उन्हें मनमर्जी ब्याज दर पर कर्ज देता और उनकी जमीन लिखा लेता है. बाद में गुंडाशक्ति के आधार पर किसानों की जमीन पर कब्जा कर लेता है. इसीलिये इस अवैधानिक साहूकारी के कर्ज को षून्य घोषित किया जाना चाहिये तथा ऐसे डाकू साहूकारों के विरुद्व कार्यवाही होना चाहिये.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

chhagan lal bisen [bisenchhagan@gmail.com ] - 2015-05-02 15:00:12

 
  किसानों की फसल का मूल्य मंहगाई के अनुपात में बढ़ौतरी होनी चाहिए 6%मंहगाई भत्ता बढता है तो उसी अनुपात में किसानों फसल का मूल्य बढना चाहिए पिछले 2 वषों में शासकीय अधिकारीयों की वेतन 44 % बढोतरी हुई है 1 साल में अनाज की कीमत कम हुई है
 
   
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