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नरम हिंदुत्व और गरम हिंदुत्व

विचार

 

नरम हिंदुत्व और गरम हिंदुत्व

इनफान इंजीनियर


वर्तमान एनडीए सरकार की नीति है- सांस्कृतिक आयोजनों पर पानी की तरह पैसा बहाओ, कुबेरपतियों की कंपनियों को टैक्स में छूट दो और समाज कल्याण के बजट को घटाते जाओ. इस प्रक्रिया के चलते, समाज के दमित व शोषित वर्ग यदि भूख, कर्ज और आत्महत्या के दुष्चक्र में फंसते जा रहे हैं तो सरकार की बला से. कार्पोरेट घरानों और कुछ अरबपति परिवारों की जेबें भरना ज्यादा जरूरी है.

गांधी


नरम हिंदुत्व और गरम हिंदुत्व दोनों का उद्देश्य हाशिए पर खिसकते जा रहे वंचित वर्गों को ‘‘अपनी संस्कृति पर गर्व’’ करना सिखाना और उनमें ‘‘फील गुड’’ के भाव को मजबूती देना है. ‘‘इंडिया शाईनिंग’’ व ‘‘फील गुड’’ अभियानों से भाजपा को 2004 के लोकसभा चुनाव में कोई फायदा नहीं हुआ था और भारत की जनता ने इस अभियान और उसे चलाने वालों को सिरे से खारिज कर दिया था. परंतु यह सरकार उसी पुरानी शराब को नई बोतल में पेश कर रही है. लोगों से कहा जा रहा है कि वे अपनी लड़की के साथ सेल्फी लें और गर्व महसूस करें, योग करें और खुश हों, सड़कों पर झाड़ू लगाएं और आल्हादित हो जाएं.

सामाजिक क्षेत्र के लिए बजट में कटौती

सन् 2014-15 के बजट में सामाजिक क्षेत्र को, कुल बजट का 16.3 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया था. सन् 2015-16 में यह आवंटन घटकर 13.7 प्रतिशत रह गया. ताजा बजट में महिला एवं बाल विकास के लिए आवंटन, पिछली बार की तरह, कुल बजट का मात्र 0.01 प्रतिशत है. लैंगिक बजट के लिए आवंटन 4.19 प्रतिशत से घटकर 3.71 प्रतिशत रह गया है. सन् 2014-15 के पुनर्रीक्षित बजट अनुमानों के लिहाज से, सन् 2015-16 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आवंटन में 49.3 प्रतिशत व लैंगिक बजट में 12.2 प्रतिशत की कमी आई है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में लैंगिक बजट, 17.9 प्रतिशत कम हो गया है. लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने की सरकारी घोषणाओं के बाद भी, स्कूल शिक्षा के लिए लैंगिक बजट में 8.3 प्रतिशत की कमी आई है.

‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ अभियान बड़े जोरशोर से चलाया गया परंतु इस अभियान के लिए बजट में केवल 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है. समन्वित बाल विकास कार्यक्रम (आईसीडीएस), जिससे लगभग 10 करोड़ महिलाएं और बच्चे लाभांवित होते हैं, का बजट आधा कर दिया गया है. सन् 2014-15 में इस मद में रूपए 18,108 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जो कि सन् 2015-16 में घटकर 8,245 करोड़ रह गया. पेयजल और साफ-सफाई संबंधी योजनाओं के लिए बजट प्रावधान, 12,100 करोड़ रूपए से घटाकर 6,236 करोड़ रूपए रह गया.

कुल मिलाकर, सामाजिक क्षेत्र के लिए आवंटन में 1,75,122 करोड़ रूपए की कमी आई. इसमें से 66,222 करोड़ रूपए सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए दिए जाने वाले अनुदान को घटाकर, 5,900 करोड़ रूपए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोश को आवंटन में कमी कर और 1,03,000 करोड़ रूपए खाद्य सुरक्षा योजना को लागू न कर बचाए गए. इससे महिला और बाल विकास, कृषि (जो देश की 49 प्रतिशत आबादी के जीवनयापन का जरिया है), सिंचाई, पंचायती राज, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास व अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण से संबंधित कार्यक्रम प्रभावित होंगे. स्वास्थ्य के बजट में 17 प्रतिशत की कमी की गई.

सन् 2015-16 के बजट में अनुसूचित जाति विशेष घटक योजना के लिए रूपए 30,852 करोड का प्रावधान किया गया और आदिवासी उपयोजना के लिए रूपए 19,980 करोड का. ये दोनों योजनाएं अनुसूचित जातियों व जनजातियों के विकास और कल्याण के लिए बनाई गई हैं और इनका उद्देश्य यह है कि इन वर्गों की भलाई की योजनाओं पर बजट का लगभग उतना ही हिस्सा खर्च किया जाए, जितना इन वर्गों का देश की कुल आबादी में हिस्सा है. अनुसूचित जातियां, देश की कुल आबादी का 16.6 प्रतिशत हैं जबकि अनुसूचित जनजातियों का कुल आबादी में हिस्सा 8.5 प्रतिशत है. सन् 2015-16 के बजट में विशेष घटक योजना के लिए कुल बजट का केवल 6.63 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध करवाया गया है.

स्कूली शिक्षा व साक्षरता के लिए आवंटन, 2014-15 में 51,828 करोड़ रूपए से घटाकर 2015-16 में 39,038 करोड़ रूपए कर दिया गया है. इसी अवधि में उच्च शिक्षा विभाग के लिए आवंटन, 16,900 करोड़ रूपए से घटाकर 15,855 करोड़ रूपए और सर्वशिक्षा अभियान के लिए 28,258 करोड़ से घटाकर 22,000 करोड़ रूपए कर दिया गया है. मध्याह्न भोजन योजना भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है. इसके लिए सन् 2014-15 में 13,215 करोड़ रूपए आवंटित किए गए थे, जो कि सन् 2015-16 में घटकर 9,236 करोड़ रूपए रह गए.
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