पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >प्रीतीश नंदी Print | Share This  

आमिर खान खलनायक नहीं नायक

विचार

 

आमिर खान खलनायक नहीं नायक

प्रीतीश नंदी


मैं आपका चिरपरिचित आमिर खान फैन नहीं हूं. आमिर खान अभिनीत मेरी प्रिय फिल्म न तो ‘थ्री इडियट्स’ है और न ‘गज़नी.’ मेरी पसंद तो पुरानी, हल्के-फुल्के मनोरंजन वाली राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ है, जिसमें वे सलमान खान के साथ अजीब-सी हरकतें करते हैं. .

aamir khan


आमिर अपनी भूमिकाओं पर बहुत मेहनत करते हैं और बारीकी से की गई रिसर्च के लिए जाने जाते हैं. उसी स्तर का शोध जब उन्होंने अपने उस टीवी शो में लगाया तो मुझे बहुत खुशी हुई, जिसमें उन्होंने महत्वपूर्ण समस्याओं को उठाया और उन पर ऐसा फोकस डालने की कोशिश जैसे कोई पत्रकार डालता है. संभव है वे पत्रकार की तरह प्रभाव उत्पन्न कर पाए हों या न कर पाए हों, लेकिन अपनी गंभीरता और निष्ठा से उन्होंने काफी हद तक श्रेष्ठता हासिल की.

उनकी इसी ईमानदार गंभीरता ने मुझे तब चौंकाया था जब मैं उनसे तब मिला था जब वे युवा अभिनेता थे. मजेदार संयोग यह रहा कि वीर संघवी ने सलमान खान को ‘संडे’ के आवरण पृष्ठ पर उसी हफ्ते लिया, जिस हफ्ते मैंने आमिर को ‘द इलस्ट्रेटेड वीकली’ के आवरण पृष्ठ पर लिया था. मेरा ख्याल है मुख्यधारा के ये पहले मैग्ज़ीन कवर थे, जो उन दोनों अभिनेताओं को मिले थे.

वीर ने सलमान को हिंदी फिल्म जगत के सुपर ब्रैट यानी बिगड़ैल बच्चे की तरह पेश किया. मैंने चश्मा पहने आमिर को शांत, मेहनती अभिनेता के रूप में प्रस्तुत किया. इतिहास ने हम दोनों को सही सिद्ध किया. सलमान और आमिर बड़े सितारे बन गए. जहां सलमान बॉलीवुड के बैड बॉय बने हुए हैं, आप आमिर को ‘उबाऊ होने की हद तक अच्छा’ कह सकते हैं.

ठीक इसी वजह से आमिर को अचानक बर्बर, गुस्सैल मुहिम के निशाने पर पाकर हैरत, बहुत हैरत हुई, जिसमें कुछ लोग भारतीय के रूप में उनकी निष्ठा पर सवाल उठाने में लगे हैं. साफतौर पर यह मूर्खतापूर्ण प्रयास है. किसी को अपने राष्ट्रवाद का दिखावा करने की जरूरत नहीं है.

हम भारतीय स्वभाव से ही आलोचक हैं. यही बात हमें इतना दिलचस्प बनाती है. हम शिकायत करते हैं, दलीलें देते हैं और विरोध करते हैं. हममें इतना साहस भी हैं कि जरा लगे कि अन्याय हुआ है तो ऐसी हर घटना के खिलाफ उठ खड़े होते हैं. इसी वजह से तो हम दुनिया के सबसे मजबूत लोकतंत्र हैं. ऐसी बात नहीं है कि हममें से कोई अपने राष्ट्र को कम चाहता है, लेकिन हमें लगता है कि इससे बेहतर भी किया जा सकता है.

साफ कहें तो मैं आमिर का दोस्त होने का दावा नहीं कर सकता. तीस साल पहले मैंने उन्हें कवर पर लिया था और उसके बाद से मैं उनसे तीन बार कहीं न कहीं टकराया हूं. लेकिन हां, मैं कुछ दूरी से अभिनेता के रूप में उनकी तरक्की देखता रहा हूं और गर्व भी महसूस किया है कि मैंने ऐसे युवा को प्रोत्साहन देकर ठीक किया, जिसमें प्रतिभा नज़र आई थी.

सारे संपादकों को अपने चुनाव की चिंता होती है और कभी-कभी जब वे सही सिद्ध होते हैं तो उन्हें बहुत खुशी होती है. आइए, आमिर के खिलाफ चल रही मुहिम पर लौटें. यह शुरू कैसे हुई?

पिछले साल नवंबर में रामनाथ गोयनका जर्नलिज्म अवॉर्ड के दौरान उनसे पूछा गया कि असहिष्णुता को लेकर चल रही बहस पर उनकी क्या राय है? बताते है कि आमिर ने कहा कि उनकी पत्नी ने एक मौके पर निजी रूप से देश में बढ़ती बेचैनी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि क्या अपने बच्चों के भविष्य के लिए उन्हें देश से बाहर जाने पर विचार नहीं करना चाहिए.

आमिर ने जो कहा वह उनकी पत्नी की निजी राय थी. यह उनकी राय नहीं थी. सच तो यह है कि उन्होंने यह भी कहा कि लोग इस तरह सोच रहे हैं यह जानकर वे बहुत विचलित हैं. बाद में जब विवाद बहुत बढ़ गया तो उन्होंने यह कहकर सारे संदेह खत्म कर दिए कि भारत छोड़कर जाने का उनका कोई इरादा नहीं है. यही उनका देश है और वे यहीं के हैं.

अब इसके साथ बहस खत्म हो जानी थी. इसकी बजाय सोशल मीडिया के ट्रोल में इसे जिंदा रखा गया. इसे और भड़काने के लिए कुछ लोग और आ गए. जो एक सीधा-सादा कमेंट था उसे संदर्भ से निकालकर नफरत और गलत गुस्से के ऐसे अभद्र अतिरेक में बदल दिया गया कि सरकार को आमिर खान को ‘अतुल्य भारत’ अभियान से हटाना पड़ा. वे इसके ब्रैंड एंबेसडर थे. यह अनावश्यक था, लेकिन कोई विकल्प ही नहीं था.

वातावरण इतना विषैला हो गया था. यहां तक कि स्नैपडील के पास भी ब्रैंड एम्बेसडर के रूप में आमिर को हटाने के अलावा चारा नहीं था. मजे की बात है कि जैसा ऐसे मामलों में होता है किसी ने आमिर का शेष इंटरव्यू नहीं पढ़ा. उन्होंने कई ऐसी बातें कही थीं, जो उनके कमेंट को उचित संदर्भ देती थीं. वे आतंकवाद के खिलाफ बोलें, अहिंसा के लिए आह्वान किया. बाद में उनकी सफाई माफी मांगने जैसी थी, हालांकि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था, जिसके लिए माफी मांगी जाए.

लोकतंत्र में तो लोग अपनी अच्छी-बुरी राय पूरी स्वतंत्रता से व्यक्त करते हैं. किसी अन्य की बजाय भाजपा को इसका अहसास ज्यादा होना चाहिए. उसके कई दिग्गज नेता (लालकृष्ण आडवाणी और अरुण जेटली सहित) आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति के अधिकार का बचाव करने के कारण ही जेल भेजे गए थे. आज उसी अधिकार से आमिर को वंचित करना अजीब लगता है.

इससे भी बुरी बात तो यह है कि मामला खत्म होने के महीनों बाद किसी छोटे-मोटे व्यक्ति ने नहीं, रक्षा मंत्री ने यह मुद्‌दा फिर उठाकर आमिर को सबक सिखाने की धमकी दी है. सबक? किसलिए? मुझे अचरज हुआ, क्योंकि पर्रिकर भाजपा के खास वाचाल नेताओं में से नहीं हैं. वे गोवा के अब तक के सर्वेश्रेष्ठ मुख्यमंत्री रहे हैं. राष्ट्र के रक्षामंत्री के रूप में वे अपनी सीमा से बाहर जाकर आमिर को ऐसी किसी बात के लिए क्यों धमका रहे हैं, जिस पर वे पहले ही सफाई दे चुके हैं.

सत्ता में बैठे लोग मूर्खतापूर्ण हरकतें करते हैं. यूपीए ने ऐसा किया और भारी कीमत चुकाई. भाजपा को वही गलतियां करने की आवश्यकता नहीं है. एक सरकार तब बहुत अधिक वैधता हासिल कर लेती है जब वह यह दिखाती है कि उसमें उचित या अनुचित आलोचना को झेलने का नैतिक साहस है. क्या मैं आमिर की राय से इत्तफाक रखता हूं? मुझे इसकी जरूरत नहीं है. जब तक मुझे यह भरोसा है कि हमारा यह महान देश इतना मजबूत है कि यह हर तरह की राय को जगह देने को तैयार है, मैं आमिर खान का समर्थन करता रहूंगा.

09.08.2015
, 18.30 (GMT+05:30) पर प्रकाशित


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in