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रियो में सूखे से सबक ले देश

विचार

 

रियो में सूखे से सबक ले देश

रघु ठाकुर


रियो ओलंपिक 21 अगस्त देर रात भारत के समयानुसार समाप्त हो गया और साथ ही भारतियों की स्वर्ण पदक की लालसा भी निराशां में बदल गई. भारत को न केवल एक भी स्वर्ण पदक नही मिल सका बल्कि कई प्रकार से रियो ओलंपिक का परिणाम निराशांजनक और अपमानजनक रहा.

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दुनिया के 66 देशों ने एक या ज्यादा स्वर्ण पदक प्राप्त किये हैं और अगर हम अमेरिका या रूस जिन्होने क्रमषः 120 - 56 कुल पदक जिसमें 45 और 19 स्वर्ण पदक प्राप्त किये हैं, को छोड़ भी दे तो भी ऐंसे छोटे छोटे देशों ने जिनकी आबादी भारत की आबादी के 1/5 से भी कम है याने 5 प्रतिशत के आसपास है, जो आबादी और क्षेत्रफल में भारत के प्रदेश तो छोड़ो एक जिले के बराबर भी नही है, ने अच्छी खासी संख्या में स्वर्ण पदक प्राप्त किये हैं.

मैं नही जानता हू कि जो लोग कल तक भारत को विश्व गुरू की श्रेणी में खड़ा कर रहे थे या विश्व गुरू होने के स्वंयभू प्रवक्ता बन गये थे, उनकी रियो ओलंपिक के परिणामों पर क्या प्रतिक्रिया है परन्तु यह अवष्य है कि अगर एकाध भी स्वर्ण पदक भारत को मिल जाता तो देश के सत्ताधीष उसे विश्व फतह करार देते और अपनी सरकार की पीठ ठोक रहे होते. बेलारूस, डेनमार्क, जार्जिया, बेल्जियम, सर्बिया, यूक्रेन, स्वीडन जैंसे छोटे देश और यहॉं तक कि दक्षिण अफ्रीका जो दुनिया में गरीबी का पर्याय माना जाता है, ने भी कुल 10 पदक प्राप्त किये जिनमे से दो स्वर्ण पदक हैं.

खेलों की प्रतियोगिता में सफलता और स्वर्ण पदक के मुख्यतः निम्न आधार होते हैं:
01. देश का पोषण स्तर या खुराक स्तर क्या है ? देश में स्वास्थ्य सुविधायें और स्वास्थ्य स्तर क्या है.
02. देश की औसत आय कितनी है.
03. खिलाड़ियों को सरकार की ओर से कितनी सुविधायें और प्रोत्साहन दिया जाता है.
04. खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षक और विशेषतः सरकारी प्रशिक्षक कितने काबिल है.
05. खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष है.

इन कसौटियों पर जब कसेंगे तो भारत की औसत आय दुनिया की तुलना में बहुत ही कम है. जिस देश में 30 - 40 करोड़ लोग गरीबी की सीमा रेखा के नीचे हो और सरकारी राशन पर जिंदा हो, जिस देश में लगभग इतने ही लोग बेरोजगारी या अर्धबेरोजगारी की सूची में हो, जिस देश में अर्जुन सेनगुप्ता कमेटी की रिर्पोट के अनुसार 80 करोड़ लोगों की क्रय क्षमता 10-20 रूपये से कम हो उस देश में आमदनी के स्तर की कल्पना की जा सकती है. पोषक तत्वों की उपलब्धता का संबंध आय के साथ है.

उपरोक्त वर्णित लगभग 80 - 90 करोड़ लोग जो देश की कुल आबादी का तीन चौथाई होते हैं वो किसी प्रकार अपना पेट भर पाते है. खेल खेलना तो दूर उनको तो खेल देखना भी नसीब नही होता. फिर इन आम भारतियों के जीवन में, उनके खाने की थाली में पौष्टिकता का अभाव होता है. बढ़ती मंहगाई के कारण अब इन 90 करोड़ लोगों की थाली में दाल की मात्रा घटकर बमुष्किल 45 - 50 ग्राम के बीच बची है. चाय के कप में 1-2 चम्मच दूध ही उनके लिये दूध का पर्याय है, सब्जियॉं या फल खाना तो अब देश में धीरे धीरे स्टेट्स सिम्बल बन रहा है और संपन्न होने का प्रतीक हैं.

देश के सात लाख गॉंव में जहॉं जन्मना प्रतिभायें होती है उनमें समूचे देश में आधा प्रतिशत से भी कम गॉंव में खेल के मैदान नही होगे और छोटे कस्बे, नगरों में अगर कहीं एक - दो मैदान भी होंगे तो वे भी आबादी के मानक से अपर्याप्त होंगे. और इसीलिये भारतीय खेलों में राष्ट्रीय अंर्तराष्ट्रीय पुरूस्कार की संभावनायें अपवाद छोड़े तो केवल अतिसंपन्न लोगो, समाज के श्रेष्ठि वर्ग तक सिकुड़ रही है.

राजस्थान का आदिवासी लिम्बाराम जिसे तीर कमान में जन्मना विशेषज्ञता थी, राजधानी जयपुर में टी वी का बीमार होकर पड़ा रहा. उड़ीसा के आदिवासी बच्चे तो जिनमें बचपन से ही लम्बी दूरी या कई किलोमीटर की दौड़ लगाने की क्षमता थी को इसलिये प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया क्योंकि वह व्यवस्था की नजरों में क्रूरता थी और यहॉं तक कि उसके कोच को भी अनेक प्रताड़नाओं का शिकार होना पड़ा.

हमारे देश में जिस प्रकार का जाति और मजहबी विभाजन है उसका भी असर चयन प्रक्रिया पर और प्रशिक्षण पर पड़ता है. फिर अकसर पुरूष कोच महिला प्रशिक्षित छात्रा के साथ र्दुव्यवहार का निमित्त बनाते हैं. अभी हाल में पंजाब की एक खिलाड़ी पूजा ने अपने कोच के अपराध के दबाब में आत्महत्या कर ली और अपने आत्महत्या के नोट में, जो प्रधानमंत्री के नाम संबोधित है अपनी व्यथा का वर्णन किया.

ऐसे कितने ही मामले है जिन्हे बच्चियॉं शर्म के मारे या सामाजिक भय के मारे व्यक्त नही कर पाती और प्रशिक्षण छोड़ देती है जबकि रियो ओलंपिक ने सिद्ध कर दिया है कि भले ही महिला पुरूष बनावट में असामान्य हों परन्तु अब महिलायें पुरूष से आगे हैं. चयन के नाम पर क्या घटनायें घटती है, उन्हे हम कुष्ती के प्रतिभागियों के नाम से जान सकते है.
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