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अंधविश्वासी जनता का दोहन कर रहे बाबा

मुद्दा

 

अंधविश्वासी जनता का दोहन कर रहे बाबा

रघु ठाकुर


चड़ीगढ़ हाई कोर्ट के द्वारा भी यह स्पष्ट रुप से कह देने के बाद कि हरियाणा सरकार ने वोट बैंक के लिये हरियाणा को तबाह किया, क्योंकि जिस प्रकार से हत्या, आगजनी, बिस्फोट और भीड़ तंत्र की गुंड़ई हुई है वह न केवल पूर्व अपेक्षित थी बल्कि उसकी बकायदा गोपनीय सूचनायें भी राज्य सरकार के पास थी. 

ram rahim asaram rampal


पुलिस की इंटेलीजेंट विंग ने तीन दिन पहले ही इन सब संभावनाओं के संकेत राज्य सरकार को दे दिये थे. राज्य सरकार ने सेना को बुला भी लिया था परन्तु सेना को कार्यावाही की अनुमति 32 लोगों की मौत, आगजनी और क्षति के घटनाओं के बाद दी गई.

भाजपा अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने तो प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष तौर पर कोर्ट पर ही आरोप लगा दिये और कहा कि कोर्ट को राम रहीम की वीडियो कांफ्रेस से सुनवाई कर प्रकरण पर निर्णय लेना था या फिर फैसले की तिथि को बढ़ा देना था. यह दोनो ही आरोप बहुत ही घटिया और निंदनीय है और अन्य अर्थ में राज्य सरकार की असफलता के प्रमाण है. याने राज्य की सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था को कायम रखने में असफल हो चुकी है और राज्य सरकार को गुंडे और अपराधियो के अनुसार चलना चाहिये तथा न्याय पालिका को अराजिकता करने वाली शक्तियों के अनुसार फैसला देना चाहिये.

न्यायालय पर ऐसी निंदनीय और घटिया टिप्पणी करने का एक सुनियोजित अभियान सत्ता के बेशर्म समर्थको के द्वारा चलाया गया. सोशल मीडिया पर और कही-कही मीडिया में बयानो के माध्यम से सत्ता के गुलामो ने सरकार के बचाव के लिये न्यायालय को ही दुसाहसी, बेशर्मी के साथ कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया, जब कि न्यायपालिका की भूमिका और न्याय की निष्पक्षता को आम लोगो के द्वारा सराहा गया है. न्यायपालिका ने यह निर्णय देकर कि डेरा की सारी सम्पति को जप्त करे और उससे क्षतिपूर्ति करे ,एक नये और तार्किक सिंद्वात की शुरुआत की है.

आमतौर पर अपराध पीड़ितो को सरकारें क्षतिपूर्ति देती है जबकि गुनाहगार कोई और होता है गुनाहगार के गुनाह का दंड क्षतिपूर्ति के रुप में सरकारी खजाने से दिया जाये, इसका मतलब है कि गुनाहगार के गुनाह का दंड उस आम जनता को दिया जाये जो निर्दोष है, और पीड़ित है.

अच्छा तो यह होगा कि भारत सरकार न्यायपालिका के निर्देश के आधार पर संसद से स्पष्ट कानून पारित कराये तथा ऐसे बर्बर और अपराधी गिरोहो के न केवल मुखियाओं को, बल्कि उत्पात में शामिल सर्क्रिय सदस्यो की संपत्ति को भी जब्त करने और उससे क्षतिपूर्ति करने का प्रावधान करें.

राज्य सरकार और बाबा राम रहीम के समझौते की अंधरुनी कहानी सभी को याद रखना चाहिये. हरियाणा विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा की ओर से उनके प्रतिनिधियों ने राम-रहीम से चर्चा की थी और एक अलिखित समझौता उनके बीच हुआ था. जिस पर बाद में भाजपा के अध्यक्ष श्री अमित शाह ने मुहर लगायी थी और इस समझौते के तहत ही डेरा सच्चा सौदा के समर्थक मतदाताओं ने भाजपा को खुलकर स्पष्ट समर्थन दिया था.

इतना ही नही हरियाणा चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री खट्टर और बाद में उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री योगी ने, न केवल राम-रहीम की सार्वजनिक रुप से प्रशंसा में टियूटर किये थे और हरियाणा में उन्हें स्वच्छता अभियान का एम्बेस्डर घोषित किया था. राम-रहीम की कथित बेटी हनीप्रीत ने भी बाबा की गिरफ्तारी के बाद भाजपा को धोखेबाज, विश्वासघाती कहते हुये उस समझौते का खुलासा किया है.

स्वच्छता केवल तन या सड़क की नही होती बल्कि मन और विचारो की भी होती है. हरियाणा चुनाव के समय भाजपा और राम-रहीम के बीच हुये समझौते के अनुसार उनके विरुद्व दायर बलात्कार का मुकदमा वापिस कर लिया जायेगा, इसने भाजपा की वैचारिक और राजनैतिक गंदगी को उजागार कर दिया. जो पार्टी अपने तत्कालिक राजनैतिक हितो के लिये ऐसे नये समझौते करे उससे देश में कोई बेहतर या बदलाव की उम्मीद करना व्यर्थ है.

राम-रहीम की गिरफ्तारी और उसके बाद के अराजक हालात पर महामहिम राष्ट्रपति की चुप्पी न केवल आश्चर्यजनक है बल्कि पीड़ादायक भी है. एक समूचा राज्य अपराधियो के संगठित गिरोह के द्वारा चलाया जा रहा है. सरकार उसमें मूकदर्षक और निष्क्रय सहभागी है. राष्ट्रपति दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में चुपचाप बैठे है.

यह अकल्पनीय है अच्छा तो यह होता कि वे प्रधानमंत्री को बुलाकर राज्य की कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने का निर्देश देते. तो यह राजधर्म होता. परन्तु अगर दलीय बिरादरी के चलते इतना कहने का साहस उनमें नही था तो कम से कम शाब्दिक सहानुभूति या शोक संदेश जारी करते.

बाबा राम-रहीम के डेरे में अपराधी गिरोहो का पनपना कोई पहली घटना नही है बल्कि इसके पहले भी आसाराम बापू, रामपाल, रामवृक्ष यादव, भिडंरावाले आदि के नामो से राज्य सत्ता के समर्थको ने अपराधी गिरोह, साधु सन्यासी के आवरण में पोषित और पल्लवित होते रहे है जिन्हें बाद में नासूर बन जाने के बाद सरकारो को मीडिया और जनता के दबाव में आकर कार्यावाही करने को लाचार होना पड़ता है, और उसका परिणाम समाज के निर्दोष लोगो को सहना पड़ता है.

यह कोई छिपा हुआ तथ्य नही है कि आमतौर पर राजनैतिक दल अपवादो को छोड़कर इन गिरोहो के साथ वोटो के लिये सौदे करते है तथा मतदाताओं के अंधविश्वास का फायदा उठाकर इनके अपराधो को ढकते है, और बचाते है, तथा वोट की फसल काटते है. लोगों की धार्मिक भावनाओं और अंधविश्वास का फायदा उठाने और इन साधु सन्यासियो के नामधारी लोगो के द्वारा सत्ता से लाभान्वित होने का इस प्रकार के गठजोड़ का खेल काफी पुराना है.

धीरेन्द्र ब्रम्हचारी, चन्द्रास्वामी, महेश योगी, स्वरुपानंद शंकराचार्य, पुट्टपर्थी के सांईबाबा इत्यादि-इत्यादि अनेकों अनेक नाम इस क्षेत्र में लिये जा सकते है. अतः इन पर भी विचार करना होगा कि यह अंधविश्वास क्यों पैदा होता है और ये कथित अपराधी बाबा कैसे जनभावनाओं का शोषण कर पाते है.

1. आजादी के बाद सरकारो ने लोगो को निराश किया है तथा सत्ता और राजनीति के प्रति अविश्वास पैदा किया है. इस कारण से वे निराश होकर अंधविश्वास एंव बाबाओं आदि के कुचक्र में फॅस जाते है इनसे वे समस्याओं से निजात पाने की उम्मीद करते है.

2. बचपन से मिलने वाले पारिवारिक संस्कार भी लोगो को भाग्य और आलौकिक शक्तियों के प्रति आस्था पैदा करते है. मूर्ति पूजा करना उनका स्वाभाविक स्वभाव बन जाता है तथा वे इन बाबाओं में भी उस शक्तिशाली मूर्ति को खोजते है.

3. जातीय, क्षेत्रीय और धार्मिक समूह भी अपने-अपने गौरव को बताने के लिये अपने बीच के बाबाओं का नाम चलाते है. उनकी चमत्कारी शक्तियों का बढ़ चढ़ कर गुणगान करते है तथा इससे उन्हें जाति, श्रेष्ठता का संतोष मिलता है. उद्योग जगत, जातीय शक्तियॉ यह सभी बदलाव नही चाहती, समता नही चाहती.

अंधविश्वास, अपराधिक शक्ति, भाग्य, किस्मत परिवर्तन की इच्छाओं को रोकने का सबसे बड़ा माध्यम होता है, और इसलिये ये शक्तियॉ इन तथाकथित साधु महात्माओं, बाबाओं और अंधविश्वासो का जोर-शोर से प्रचार करते है तथा उनकी विष्वनीयता, प्रतिष्ठा और सम्मान स्थापित कराने के लिये सहयोग करते है. दरअसल पूंजीपति, सत्ता, राजनीति अफसर शाही, जातीय शक्तियॉ और बाजार इन सबका एक गठजोड़ बन गया है जो ईष्वर और धर्म के नाम का इस्तेमाल कर अपने आपको अपनी सत्ता और शक्ति को कायम रखने के लिये इस्तेमाल करता है.

4. ये सभी कथित बाबा लोग देश विदेश में सम्पतियॉ अर्जित करते है और फिर उस पैसे से बड़े-बड़े महल, आश्रम और आडंबर खड़े करतेे है. इनके और इनके अंधविश्वासी भक्तो के बीच गॉव-गॉव में कुछ दलाल खड़े हो जाते है जो गॉव की भोली और अनपढ़ जनता को इनके दरबारो का रास्ता बताते है. इनके सत्संग कथावादी कार्य करने में ये विचौलिये गॉव की औरतों को लेकर जाते है वहॉ गॉव वालो को ठहराना, खाना इत्यादि मुफ्त होता है और गरीब लोग इनके आडंबर, वेश-भूसा, जेवरात सम्पन्नता, गाड़ियॉ और सुरक्षा को देखकर इन्हें भगवान का अवतार मानने लगते है.

ये अपनी भीड़ के प्रचार से राजनेताओं को दरबार में आकर शरणागत् होने के लिये और समर्थन पाने के लिये वातावरण तैयार कराते है और ललचाते है, और जब मंत्री, मुख्यमंत्री आदि इनके दरबार में साष्टांग लेट जाते है तो गॉव के गरीब गुरवा सोचते है कि इनके पास बड़ी शक्ति है और ये ही अपने आलोकिक शक्ति और आर्षीवाद से मुख्यमंत्री, मंत्री, पद-प्रतिष्ठा, पैसा और सम्पन्नता दिलाते है.

5. यह कुल मिला कर अंधविश्वासी समाज का एक प्रकार से भयादोहन और भावनात्मक शोषण जैसा है. जिस समाज में जातियॉ अपनी जाति के डाकू के नाम से, अफसर और सत्ताधीश के नाम से, अपने आप को गौरवान्वित महसूस करती हो, उनके किस्से कहानी फैलाती हो, तो उसमें ऐसे बाबाओं का पैदा होना कोई आश्चर्य जनक नही है.

6. मेरी राय में ये इन बाबाओं के अन्तरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जॉच होना चाहिये, क्योंकि इन्हें विदेशो से काफी पैसा मिलता है और ये पैसा देने वाली शक्तियॉ कोैन है, उनके उद्देशाय क्या है? इसकी पड़ताल भी जरुरी है.

7. हमारे देश की गुप्तचर शाखायें कितनी अविकसित और असफल है कि इन डेरो में जमा होने वाले हथियारो के जखीरो अपराधियो के जमावड़े की ठोस जानकारी न वे संग्रहित कर पाती है और न ही कुछ बता पाती है. अभी ये जरुरी है कि, राम-रहीम के डेरे में पाये गये हथियारो के जखीरो की पूर्ति कहॉ से हुई, इसकी जांच हो ताकि इससे उन अपराधियो का भी खुलासा हो सके जिनके वे वास्तविक गाड फादर है.

8. इनके डेरे में जाने वाले लोग मनोवैज्ञानिक रुप से इतने प्रभावित और भयभीत हो जाते है कि वे इनकी सच्चाईयो को बताने से भी डरते है. आखिर उन दबावो की भी जॉच होना चाहिये जिनके कारण से लोग अपनी पत्नियो, बच्चियो को इन हवसियों के दरबार मे छोड़ देते है.

जिस प्रकार अतीत में कुछ बिगड़े रजवाड़ो या नबावो के अंतरवास या हरम में सामान्य या गरीब लोग अपनी भयभीत मनोदशा की वजह से स्वेच्छा से पत्नि, बच्चियो और महिलाओं को उनकी सेवा के लिये पेश कर देते थे, लगभग ऐसी ही स्थिति इन बाबाओं की नये नवाब, राजाओं जैसी ही है. कई किस्से मीडिया के माध्यम से सुनने को मिलते है कि किस प्रकार गरीब अपने परिजनो को बलात् इनके पास छोड़ आता है और कुछ समय पष्चात उनके समक्ष नरकीय जीवन जीने के आलावा कोई रास्ता नही बचता है, इन बाबाओं के जाल में फॅसी महिलाओं, की देवदासियो जैसी मनोदशा हो जाती है.

इन बाबाओं के तंत्रजाल से देश को बचाने के लिये जहॉ राजनीतिक बदलाव के साथ-साथ तार्किक तथा वैज्ञानिक समाज बनाना होगा, वही इन डेरो के खिलाफ अभियान भी चलाना होगा. रामचन्द्र छत्रपति जैसे पत्रकार को तो सरकार के द्वारा राष्ट्रपति पुरुष्कार मिलना चाहिये, और उन्हें अंधविश्वास और अपराध से लड़ कर शहीद होने वाले का दर्जा वाला शहीद घोषित करना चाहिये.

सीबीआई के उस अधिकारी को और अदालत के न्यायाधीश एंव उनके परिजनो को सुरक्षा देना चाहिये ताकि वे इन संगठित अपराधी गिरोहो का शिकार न बन सके. हरियाणा की खट्टर सरकार को तो तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिये और मुख्यमंत्री पर इन अपराधियो को राजनैतिक सहयोग, सत्ता सरंक्षण और गौरवान्वित करने के लिये मुकदमा चलाया जाना चाहियें.,

22.09.2017
, 21.39 (GMT+05:30) पर प्रकाशित


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