पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना > Print | Share This  

रोहिंग्या मामले के मानवीय व राष्ट्रीय पहलू

विचार

 

रोहिंग्या मामले के मानवीय व राष्ट्रीय पहलू

रघु ठाकुर


रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में इस समय दुनिया के मीडिया में प्रमुखता से चर्चा है और यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि जितनी बड़ी संख्या में उन्हें म्यांमार से (बर्मा) बेदखल होना पड़ा है वह भारी है.
 

rohingya

पिछले कुछ दशकों में सीरिया के अनेक हिस्सों में गृह युद्ध और आर्थिक कारणों से तथा आबादी की वृद्वि और सिकुड़ते संसाधना, पलायन, विस्थापन और शरणार्थियों की संख्या बढ़ रही है. ईरान और ईराक के बीच, सीरिया के गृह युद्ध, व अफगानिस्तान में, अलकायदा जैसे आंतकी संगठनों की भूमिका इसमें अहम रही. अन्तरधर्मीय पंथिक संघर्ष भी अनेक स्थानों पर बड़ी संख्या में मानव पलायन के कारण है. शिया-सुन्नी, फिलिस्तीन यहूदी और म्यांमार में कुछ बुद्ध व मुस्लिम के बीच के टकराव ऐसी परिस्थियों को जन्म देते रहे.

बांग्लादेश के प्रथक देश बनने के पूर्व जब वह पूर्वी पाकिस्तान याने पाकिस्तान का पूर्र्वी हिस्सा था तथा पष्चिमी पाकिस्तान ने बेहरम फौजी कार्यावाही की, तब भी बड़ी संख्या में लाखो की संख्या में बांग्ला देषी शरणार्थी भारत की सीमा में आये और इसी आधार पर श्रीमती गांधी ने भारत की सेना को पूर्वी पाकिस्तान में लाचार होकर भेजा था क्योंकि शरणार्थी का बोझ भारत को असहज करने वाला था. भारतीय सेना के लिये कार्यावाही के रुप में भारत सरकार ने समूची दुनिया को अपने इस शरणार्थी बोझ की चिंता से अवगत और सहमत कराया था.

पिछले पांच-छः दशकों में भारत और उसके पड़ोसी देशों में आबादी में भारी वृद्वि हुई है. भारत आजादी के बाद से आबादी की दृष्टि से लगभग चार गुना होने के आसपास व पाकिस्तान चार गुना हो चुका है, और ऐसी ही स्थिति बांग्लादेश की भी है. अब कोई भी देश अपने प्राकृतिक संसाधनों और आबादी की जरुरतों की उस चरम सीमा पर पहॅुच चुका है जिससे वह और अधिक बोझ सहन करने की स्थिति में नही है.

ऐसे लाचार और अमानवीय तथा असंवैधानिक घुसपैठो से कांलातर में नक्सली संघर्ष, धार्मिक संघर्ष और धार्मातंरण जैसी समस्यायें जन्म लेती है. हिमालय के पहाड़ी राज्यों में भी बांग्लादेषी प्रवेश एक चिंता का विषय है और हिमालय अंचल की शांति, सद्भावना आर्थिक स्थिति और राजनीति को प्रभावित कर रहा है.

जिन्हें रोहिंग्या मुसलमान कहा जा रहा है वस्तुतः यह पूराने पूर्व बंगाल और आज के बांग्लादेश से जाकर बर्मा में बसे हुये लोग है. जिन्हें अंग्रेजों ने बड़ी संख्या में काम के लिये भेजा था और जो वहॉ जाकर वही बस गये तथा रोहिंग्या कहलाने लगे. याने आये हुये व रहते हुये इनमें से अंग्रेजो ने ऐसी समस्या दुनिया में कई जगह पैदा की है फिलिस्तीन समस्या, कष्मीर समस्या पाक समस्या आदि भी अनेकों अनेक समस्या उन्हीं की देन है इनमें से कुछ हिस्सा चीन की तरफ भी गया और वह चीन में भी कभी-कभी तनाव और हिंसा के प्रति उत्तर में सरकारी हिंसा का कारण बनता रहता है.

बर्मा में इनकी आबादी और संख्या बढ़ने से एक प्रकार का संाख्यिकी असंतुलन और परस्पर संघर्ष बढ़ा. बुद्ध धर्म एक शांतिप्रिय धर्म है तथा बुद्ध को समूची दुनिया में शांति का पर्याय माना जाता है और अगर अब ऐसी स्थिति बनी है कि बुद्ध के अनुयायी हमले कर रहे है तो इन हालातों और उनकी चिंताओं को भी पूर्णतः नजर अंदाज नही किया जा सकता.

शायद इन्ही जमीनी सच्चाईयों के आधार पर आंग सान सू की जो दुनिया में मानव अधिकारो को लेकर संघर्ष की मूर्ति मानी जाती है तथा बर्मा के शासकों के द्वारा लम्बे समय तक नजर बंद रही है को भी म्यांमार की सरकार और बौद्धों को समर्थन करना पड़ा. उन्होंने कहा है कि, रोहिंग्या मुसलमान हिंसक वारदातों और तनाव को पैदा करते है उनकी इन बातो को नजरअंदाज नही किया जा सकता और कभी न कभी दुनिया को इन प्रष्नो पर व्यापक और समग्रता से सोचना होगा.

विस्थापना और पलायन की पीड़ा को भी हल्के में नही लिया जा सकता. जो लोग लाचार होकर किसी भी प्रकार की हिसा के कारण अपना घर बार छोड़ने को लाचार होते है उनकी पीड़ा को समझना आसान नही है. जहॉ परिवार के परिवार अपनी सम्पति, अपना घर, सब कुछ छोड़कर जाने को लाचार हो जिन्हें पता नही है कि कहॉ रुकना है. जिनके समक्ष रोटी-पानी, रोजगार, घर-मकान आदि का अधिकार हो उनकी पीड़ा को ही शब्दों में व्यक्त करना कठिन है और आज किन्ही न किन्ही कारणो से सही एक ऐसी हिंसक दुनिया बन रही है जिसमे करोड़ो लोग इसे सहने को लाचार है.

उन छोटे-छोटे बच्चो का क्या गुनाह है जो सिसकती मॉ की गोद में भूखे प्यासे अज्ञात मंजिल की ओर चले जा रहे है, वे तो हिंसा का ’ह’ भी नही जानते. उन महिलाओं का क्या गुनाह है जिन्होंने घर की चार दीवारी के अलावा बाहर की दुनिया को नही देखा. जिनकी दुनिया तो उनका घर और कपड़े में लपेटा उनका शरीर भर है.

उनका भी क्या गुनाह है? पिछले दिनो सीरिया के गृहयुद्ध के कारण हो रहे पलायन में एक नन्हें से बच्चे का चित्र समूची दुनिया में देखा गया था जिसमें वह अबोध शिशु समुद्र तट पर मृत्य पड़ा था और ईसाई धर्म गुरु पोप को भी युद्ध पीड़ित शरणार्थियों को अपने देशों में आने देने की अपील करना पड़ी थी.

ऐसा नही है कि यूरोप के देशों ने इन शरणार्थियों के आने पर पूरी रोक लगाई है बल्कि उन्होंने अपने-अपने संसाधनो की क्षमता के अनुसार शरणार्थियो की अधिकतम संख्या तय की थी, जितनो का बोझ वे सह रुप से उठा सकते है. हॉलाकि पलायन की भारी संस्था के सुरसा के मुंह में यह संख्यात्मक स्वीकृति ऊॅट के मुंह में जीरे के समान अप्रभावी ही रही.

भारत में बांग्लादेषी मुस्लिमो के घुसपैठ को लेकर कई दशको से चर्चा चलती रही है और भारतीय राजनीति के लिये भी यह तुंरत और चुनौती पूर्ण मुद्दा बनता रहा है. अब म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानो के बड़ी संख्या में प्रवेश से फिर भारत में एक चिंता की लहर और एक बहस शुरु हुई है. भारत के गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने तो बयान देकर इन्हें घुसपैठिया ही नही आंतकवादी बताया है.

भारत सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानो को भारत में प्रवेश की अनुमति देने के संबध में व आने की अनुमति देने के संबध में तैयार की गई याचिका जो रोहिंग्या मुसलमान में से शरणार्थियों की ओर से पेश की गई है के उत्तर में भारत सरकार ने इन्हें देश की सुरक्षा को गम्भीर खतरा बताया है तथा शपथ पत्र देकर कहा कि लगभग 40 हजार से अधिक आये हुये इन रोहिंग्या शरणार्थियों में से कुछ लोग आंतकी संगठन से जुड़े हुये है.
आगे पढ़ें

Pages:

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in