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क्या यही प्यार है

बात पते की

 

क्या यही प्यार है

प्रीतीश नंदी


क्या उपहारों के माध्यम से ही अपने प्यार को प्रकट किया जा सकता है? पिछले सप्ताह मैंने जहां भी देखा, वहां एक ही शोर सुनाई दिया- ये खरीदो, वो खरीदो.

पहले जो बात मुझे मजेदार लग रही थी, वह अंतत: मुझ पर इस कदर छा गई कि उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के तौर-तरीकों से घृणा होने के बावजूद मुझे भी इस अपराधबोध ने जकड़ लिया कि मैं क्यों उपहार नहीं खरीद रहा? मेरे आसपास हर व्यक्ति मानो क्रेडिट कार्ड चमका रहा था.

हमारे उपभोक्ता समाज ने मदर टेरेसा की बातों को अक्षरश: स्वीकार कर लिया है : तब तक देते रहो, जब तक कि आपको तकलीफ न होने लगे. इसलिए यदि उसके लिए आप एक प्लैटिनम अंगूठी नहीं खरीद सकते या किसी महंगे रेस्तरां में कैंडललाइट डिनर नहीं दे सकते तो इसका मतलब है कि आप उसे ‘अफोर्ड’ नहीं कर सकते. इससे भी बदतर, आप उसके लायक नहीं हैं. वैलेंटाइन डे प्रेम दिवस से अब आपके प्यार की परीक्षा का दिवस बन गया है.

दरअसल यह एक नई अवधारणा है कि प्यार में खर्च करने की क्षमता होनी चाहिए. यह वैसा ही है, जैसा कि पानी जो कुछ साल पहले तक मुफ्त में उपलब्ध था. ऐसा लगता है कि वह जमाना कुछ और था, जब बीटल्स ने गाया था, ‘कांट बाय मी लव.’ लेकिन अब प्यार ‘एवियन’ (फ्रांस का एक मिनरल वॉटर ब्रांड) की तरह ही बेहद महंगा और ब्रांडेड है. ब्रांड जितना बड़ा होगा और उपहार जितना प्रभावी होगा, आपके प्यार का दावा भी उतना ही दमदार होगा.

अब यह नया उपभोक्ता मूल्य बन गया है : ‘मनी, मनी, मनी, इट इज रिच मैंस वर्ल्ड’ और इसे इस बार बीटल्स ने नहीं, बल्कि अब्बा (स्वीडन का प्रसिद्ध म्यूजिक ग्रुप) ने और भी जोर-शोर से प्रतिष्ठापित किया है. यह मामला केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है. इसका विस्तार ईश्वर तक हो चुका है. तिरुपति और सिद्धिविनायक साल दर साल और भी धनवान होते जा रहे हैं. चढ़ावा और भी तड़क-भड़क वाला होता जा रहा है. हम उस स्तर पर पहुंचते जा रहे हैं, जहां हमसे कह दिया जाएगा कि यदि आप भगवान में आस्था जताने के लिए पर्याप्त चंदा नहीं दे सकते तो आने की जरूरत नहीं है.

विज्ञापन मुझे आगाह करते हैं कि यदि मैं समुचित बीमा योजनाएं नहीं खरीदता हूं तो इसका मतलब है कि मैं अपने परिवार से पर्याप्त प्यार नहीं करता हूं. यदि मैं अपने लिए सही मेडिकल प्लान नहीं खरीदता हूं तो इसका मतलब है कि मुझे परिवार की बहुत ज्यादा फिक्र नहीं है. यदि मैं विदेश के किसी बिजनेस स्कूल में अपने बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था नहीं करता हूं तो इसका मतलब है कि मैं जिंदगी के लिए उन्हें सही ढंग से तैयार नहीं कर रहा हूं.

यदि मैं सही म्यूचुअल फंड में निवेश नहीं करता हूं तो उनके भविष्य के लिए निवेश नहीं कर रहा हूं. यदि मैं परिवार के लिए सही सेलफोन प्लान नहीं लेता हूं तो इसका मतलब है कि मैं उन्हें रात-दिन एक-दूसरे के साथ बातचीत करने में सहायता नहीं कर रहा हूं और इस तरह एक परिवार के सदस्यों के बीच जितना अटूट संबंध होना चाहिए, उसमें मददगार नहीं हो रहा हूं. इन सभी में जमकर पैसा खर्च होना है. आज प्यार की यही सबसे बड़ी परीक्षा है.

लेकिन क्या यही बात है जो आपका दिल कहता है? क्या यही बात आपसे वे लोग कहते हैं जिनसे आप प्यार करते हैं? शायद अब तक नहीं, लेकिन आपको जोर-शोर से यह मनवाया जा रहा है कि आप जो चीजें एक-दूसरे को खरीदकर देते हैं, वही प्यार है. वापस प्लैटिनम की अंगूठी पर आएं तो निश्चित रूप से यह एक बहुत ही सुंदर तोहफा है और मुझे पूरा यकीन है कि हममें से कई यह उपहार उसे देना चाहेंगे, जिसे वे दिलो जान से चाहते हैं. लेकिन हममें से सभी उसे खरीद नहीं सकते.

हर दिन वैलेंटाइन डे हो सकता है, बस यह आप पर निर्भर करेगा कि आप उसे कैसे वैलेंटाइन डे में तब्दील करते हैं.

जो प्लैटिनम की अंगूठी नहीं खरीद सकते, ऐसा भी नहीं है कि वे संभवत: उन लोगों की तुलना में अपने अजीज से कम प्यार करते हैं, जो महंगा उपहार खरीद सकते हैं. लेकिन क्या वास्तव में हम इसमें यकीन करते हैं, खासकर उस दुनिया में जहां हमने प्यार को इन घिसी-पिटी वस्तुओं की खरीदी तक सीमित कर दिया है? सर्वव्यापी गुलाब के गुलदस्ते से हॉलमार्क कार्डस और ब्ल्यू टिफनी बॉक्स तक हर चीज अब बेहद उबाऊ है और पूर्वानुमानित भी. हम अच्छी तरह से रचे हुए, हाथ से लिखे संदेशों और छिपकर दिए चुंबन की ताकत को भूल चुके हैं.

उपहार का लेन-देन नीरस सा अनुष्ठान बन चुका है. उपहार जितना महंगा होगा, वह उतना ही आपके बारे में बताएगा, न कि इस बारे में कि आप अपनी प्रेयसी को लेकर क्या महसूस करते हैं. यह कहना तो गलत होगा कि लोग उपहार पसंद नहीं करते, लेकिन यह मानना कि उपहार प्यार का विकल्प हो सकता है, अहंकार से ज्यादा कुछ नहीं है. इसीलिए साहिर ने लिखा है कि ताजमहल प्रेम का नहीं, बल्कि एक शहंशाह के अहंकार का प्रतीक है.

आज शादी से लेकर वैलेंटाइन डे तक प्रत्येक अवसर प्यार की परीक्षा लेता है. लेकिन अपने पड़ोसी की पत्नी को शानदार लाल रंग की चमकती पोर्श कार देकर क्या उसका दिल जीता जा सकता है? उपहार प्यार का विकल्प कदापि नहीं है, चाहे वह कितना भी महंगा हो या सस्ता. उपहार तो इसी बात की पोल खोलते हैं कि आपके पास मौलिक विचारों का कितना अभाव है.

अपनी पत्नी या प्रेयसी के लिए क्यों न सालसा सीखा जाए. उसके लिए कोई कविता लिखें. उसे कोई गीत ई-मेल करें. उसके लिए कार का दरवाजा खोलें. अपने शहर के किसी मनोरम स्थान पर उसे कहीं घूमने के लिए ले जाएं. अपनी कल्पनाओं को चुनौती दें. कुछ ऐसा करें कि वह आश्चर्यचकित रह जाए. उसे मोहित करें, उसे आकर्षित करें, उसे बहलाएं. हर दिन वैलेंटाइन डे हो सकता है, बस यह आप पर निर्भर करेगा कि आप उसे कैसे वैलेंटाइन डे में तब्दील करते हैं. उसके साथ लड़ाई-झगड़ा करें, उसके साथ तर्क-वितर्क करें, उसके साथ हंसें-हंसाएं. यही प्यार है, न कि वह जो आप उसके लिए खरीदते हैं.

वैलेंटाइन डे के नाम पर पॉपकॉर्न चबाते और एक असहनीय फिल्म पर नजरें गड़ाए बोरियत से भरे युवा जोड़ों के बीच जब मैंने एक अंधेरे हॉल में अपने को पाया तो मुझे याद आया कि प्यार कितना सुंदर, लेकिन क्षणभंगुर है. इसे बनाए रखने के लिए, इसे दिल से लगाए रखने के लिए आपको कल्पनाओं और साहस की जरूरत है. आपको ऐसे दिल की जरूरत है जो हर बार उसके पास जाते ही तेजी से धड़क सके, ऐसी धड़कन की जरूरत है जो हर बार तेजी से दौड़ सके. जहां तक मेरा सवाल है, मैं जब भी उससे बात करता हूं, यहां तक कि फोन पर भी, तो मेरा दिल धड़कने लगता है. मेरी जिंदगी में उसकी मौजूदगी ही मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार है.

18.02.2010, 00.40 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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अरुण देव (www.samvadi.blogspot.com) नजीबाबाद

 
 बाज़ार में लालसा होगी/ कमाना और इच्छा/ पैसा प्रभुत्व और दिखावा/ हाट से अलग प्रेम तक जाने का रास्ता कौन बताएगा हमें.
(एक दिन कविता से)क्या तो समय,भारतीय ज्ञानपीठ,नई दिल्ली.
 
   

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