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115 दिन के अनशन के बाद स्वामी की मौत

115 दिन के अनशन के बाद स्वामी की मौत

देहरादून. 14 जून 2011


काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ 9 दिन अनशन करने वाले बाबा रामदेव को जहां मंगलवार को जॉली ग्रांट हिमालयन इंस्टीट्यूट अस्पताल से छुट्टी मिल गई, वहीं अनशन के चलते तबीयत बिगड़ने के बाद इसी अस्पताल में इलाज करा रहे मातृसदन के संत स्वामी निगमानंद अस्पताल से जीवित नहीं लौट सके.

निगमानंद का अनशन गंगा की रक्षा के लिए था. उन्होंने 19 फरवरी को अपना अनशन शुरू किया था. उनकी मांग थी कि गंगा के किनारे चलनेवाले सभी स्टोन क्रेशर बंद किए जाएं. 12 में से 11 क्रेशर तो बंद हो गए, लेकिन एक हिमालयन क्रेशर अभी भी चालू था. 34 वर्षीय संत स्वामी निगमानंद गंगा रक्षा की मांग को लेकर गत 19 फरवरी से मातृसदन में अनशन पर बैठे थे.

अनशन के 68 वें दिन 27 अप्रैल को स्वामी निगमानंद की तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया. स्थिति गंभीर होने पर उन्हें दो मई को हिमालयन इंस्टीट्यूट रेफर कर दिया. यहां भी स्थिति में सुधार नहीं आया और वे कोमा में चले गए. सोमवार की रात निगमानंद की मृत्यु हो गई. इससे पहले भी निगमानंद ने सन 2001 में देहरादून के गांधी पार्क में भ्रष्टाचार को लेकर 73 दिन का अनशन किया था. इसके बाद उन्होंने 2008 में मातृसदन में 68 दिन का अनशन किया.

इसी अस्पताल में भर्ती बाबा रामदेव के लिये राज्य के मुख्यमंत्री निशंक और देश के आला नेता, धार्मिक गुरुओं ने दिन-रात एक कर दिये लेकिन गंगा की रक्षा को अपना महत्वपूर्ण एजेंडा बताने वाली भाजपा सरकार ने निगमानंद की सुध लेने की भी जरुरत नहीं समझी. टिहरी के कांग्रेसी विधायक किशोर उपाध्याय ने निगमानंद की मौत के लिए राज्य की भाजपा सरकार को जिम्मेदार बताते हुये कहा कि निगमानंद की मौत ने भाजपा की उत्तराखंड सरकार के दोहरे चरित्र को साबित कर दिया है.

उन्होंने कहा, 'जहां मुख्यमंत्री ने रामदेव का अनशन तोड़वाने की हर संभव कोशिश की, वहीं वे अनशन पर बैठे साधु निगमानंद से एक बार भी मुलाकात नहीं की, जब कि वो भी उसी अस्पताल में भर्ती थे, जहां रामदेव को भर्ती कराया गया था.'

उधर मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि अस्पताल में निगमानंद को जहर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों के इशारे पर यह किया गया. उन्होंने स्वामी का पोस्टमॉर्टम स्थानीय डॉक्टर से कराने के बजाय एम्स के डॉक्टरों से कराने की मांग की है. स्वामी निगमानंद के गुरु भाई स्वामी कौशलेंद्र ने भी स्वामी निगमानंद को जहर दिए जाने का आरोप लगाया.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

MILIND [rajnandinibhosale@gmail.com] MAHARASHTRA SANGLI - 2011-06-23 12:35:01

 
  खबर पढकर बहुत बुरा लगा.ऐसा लगता है कि हम अभी स्वतंत्र नही हुये हैं.स्वामी जी ने अपने खुद के लिए कोई मांग नही की थी.ये सियासी लोग खुद के फायदे के लिए अपनी संस्कृति,परंपरा सभी दाव पर लगाते हैं.क्या उन्हें अहिंसक मार्ग से रोकना गुनाह है और दुख इस बात का है कि स्वामीजी का नाम भी नही मालुम किसी को. 
   
 

umakant pandey [umakantpandey67@yahoo.com] ambikapur - 2011-06-16 06:57:03

 
  गंगा का लिए मर जाने वाले सन्यासी स्वामी निगमानंद की मौत से कोई गुल खिलेगा भी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. हा इतना जरूर है कि इससे सरकार और सन्यासी को लेकर बहस, मुबाहसे, घात - प्रति - घात, आरोप - प्रत्यारोप में उलझे लोगों को एक नया मुद्दा जरुर मिल गया है. अब निगमानंद की मौत का ठीकरा एक दुसरे के सर पर फोड़ने की कोशिशें जो जरी है उसका समापन कहाँ होगा, देखना है. पर इससे एक बात जो स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आयी है वह यह कि इस मौत के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें सामान रूप से जिम्मेदार और दोषी है. दोनों में से कोई बरी नहीं कहा जा सकता. आखिर क्या कारण है कि स्वामी रामदेव जब दिल्ली में अनशन के लिए बैठे तो सरकार ने उन्हें २४ घंटे भी बर्दास्त नहीं किया. मारकर भगा दिया. कइयो के हाथ - पैर तोड़ डाले उधर निगमानंद महीनो से अनशन पर बैठे रहे तो किसी ने उनकी सुधि नहीं ली. क्यों ? निशंक सरकार जो रामदेव के लियए आठ - आठ अंशु बहती नज़र आई और पानी पी - पी कर केंद्र को कोसती रही, उसी के राज्य में एक सन्यासी मर गया और उसके लिए \"निशंक\" के पास फुर्सत नहीं थी. इसे क्या कहेंगे? रामदेव के लिए प्यार और निगमानंद के लिए पुत्कार. सीधी सी बात है कि रामदेव के निशाने में भाजपा को अपना हित सधता दिखा और निगमानंद में कुछ नहीं. सम \"गुड - चींटी\" का खेल था. राजनीती में कैसे, क्या कुछ होता है यहाँ सब प्रत्यक्ष है. हाँ निगमानंद की मौत से रामदेव को केंद्र से अपने अपमान का बदला लेने का अवसर सहज ही उपलब्ध हो गया है. वे इस मौत को अपने लिए एक नया हथियार बनायेंगे तथा आगामी दिनों इसे आन्दोलन के लिए अंगार के रूप में इस्तेमाल करेंगे. 
   
 

Dnyaneshwar [hiraydp@jaihindagroengg.com] Nashik - 2011-06-15 06:03:25

 
  The Coorupion will Finish of Politician one day. 
   
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