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सिंगूर की ज़मीन किसानों को वापस मिलेगी

सिंगूर की ज़मीन किसानों को वापस मिलेगी

कोलकाता. 14 जून 2011


सिंगूर में टाटा मोटर्स को दी गई क़रीब 997 एकड़ ज़मीन के क़रार को रद्द करने का विधेयक पश्चिम बंगाल विधानसभा में पारित हो गया. सरकार ने सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक 2011 मंगलवार को ही सदन में पेश किया था जो बिना किसी विरोध के पारित हो गया. हालांकि विपक्षी वामपंथी पार्टियां विधेयक पर मतदान से पहले ही सदन से बहिर्गमन कर दिया था.

इस विधेयक के सदन में पारित होने के बाद सिंगूर के उन किसानों को ज़मीन वापस देने की प्रक्रिया शुरू होगी जिन्होंने अपनी ज़मीन के बदले कोई मुआवज़ा नहीं लिया था. किसानों को ज़मीन लौटाने के लिए राज्य सरकार ने पहले अध्यादेश के ज़रिए टाटा से ज़मीन वापस लेने की घोषणा की थी लेकिन अध्यादेश के संवैधानिक आधार पर निरस्त होने के बाद सरकार ने 24 जून से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र को पहले बुलाने का फ़ैसला लिया और ये विधेयक पेश किया.

विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय मामलों के राज्य मंत्री मनोज चक्रवर्ती ने सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक 2011 के प्रारूप की जानकारी दी. विधेयक के मुताबिक़ टाटा मोटर्स और उससे जुड़े दूसरे विक्रेताओं को हुगली ज़िला कलेक्टर को ज़मीन सौंप देनी होगी. ऐसा नहीं करने पर ज़िलाधिकारी को ये अधिकार होगा कि वो बलपूर्वक टाटा से ज़मीन खाली करवाकर उसे अपने अधिकार में ले ले.

विधेयक में ये भी कहा गया है कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम को मुआवज़ा देगी जिसने राज्य सरकार के कहने पर ज़मीन के मालिकों को 137 करोड़ रुपए का भुगतान किया था. नए मुआवज़े के मुताबिक़ विवादित 997 एकड़ ज़मीन पर पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम का मालिकाना हक़ ख़त्म हो जाएगा.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुताबिक़ उनकी सरकार सिंगूर के उन किसानों की 400 एकड़ ज़मीन लौटाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने अधिग्रहण के एवज़ में कोई मुआवज़ा नहीं लिया है. बाक़ी बची 597 एकड़ ज़मीन का उपयोग सामाजिक आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन और दूसरे सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाएगा.


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