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मुजफ्फरपुर में महामारी

मुजफ्फरपुर में महामारी

 

पटना. 26 जून 2011

बिहार के मुजफ्फरपुर में फैली अज्ञात बीमारी से मरने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रशासन की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं. 12 दिनों में 53 बच्चों की जान लेने वाली इस बीमारी से निपटने के लिये अब जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को इस बीमारी को महामारी घोषित करने के लिये पत्र लिखा है.

प्रभात खबर के अनुसार जिले में फैली इंसेफ्लाइटिस के लक्षण वाली बीमारी को जिला प्रशासन ने महामारी घोषित करने की मांग की है. डीएम संतोष कुमार मल्ल ने शनिवार की देर रात राज्य सरकार के पास इस आशय का प्रस्ताव भेजा. उन्होंने कहा, महामारी एक्ट लागू होने से बीमारी की जांच में मदद मिलेगी. यह निर्णय पुणे से आये चिकित्सकों के दल के साथ बैठक के बाद लिया गया. इसके साथ ही बीमारी से मृत बच्चों के ब्रेन टिश्यू की जांच में भी सहूलियत होगी. वहीं, डॉक्टरों का काम भी आसान होगा.श्री मल्ल ने कहा कि अब तक टीम ने 24 बीमार बच्चों के सीरम व सीएसएफ के नमूने की जांच की है. इसमें जैपनिज इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल बीमारी के उपचार व रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं. चिकित्सकों की टीम के मुताबिक बीमारी का पता लगाने के लिए मृत बच्चों के ब्रेन टिश्यू की जांच जरूरी है.

क्या है महामारी एक्ट
पटना : महामारी एक्ट, 1897 के तहत सरकार को यह अधिकार होगा कि वह संक्रमित रोगी के शरीर के किसी अंग से जांच के लिए सैंपल ले सके. महामारी घोषित नहीं किये जाने से रोगियों के ब्रेन टिश्यू का सैंपल नहीं लिया जा सका है. एक्ट के तहत संक्रमित रोगी के अलगाव, किसी भवन या अस्पताल का उपयोग और अनिवार्य सफाई का प्रावधान है. देश में जब पहली बार प्लेग आया था, तब यह एक्ट बना था.

शिशु रोग विशेषज्ञों का दल बना
बीमार बच्चों के लक्षण की जांच व दवा चयन के लिए पांच शिशु रोग विशेषज्ञों के दल का गठन किया गया है.


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