पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

दिनाकरन के खिलाफ चलेगा महाभियोग

दिनाकरन के खिलाफ चलेगा महाभियोग

नई दिल्ली. 5 जुलाई 2011


उच्चतम न्यायालय ने सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनाकरण के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने पर लगी रोक हटा ली है. न्यायाधीश जीएस सिंघवी और न्यायाधीश सीके प्रसाद की पीठ ने दिनाकरण की उस याचिका को खारिज कर जिसमें उन्होंने महाभियोग की प्रक्रिया को चुनौती दी थी. पीठ ने कहा कि महाभियोग की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करना किसी उद्देश्य से प्रेरित है.

संसद द्वारा पी डी दिनाकरण पर महाभियोग चलाने के लिये सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आफ़ताब आलम, कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति के एस खेहर और प्रख्यात न्यायविद पी पी रॉय समेत विद्वानों की कमेटी ने दिनाकरन के खिलाफ भ्रष्टाचार के 16 आरोप लगाए हैं. अगस्त 2009 में न्यायमूर्ति दिनाकरन को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी. लेकिन उनके खिलाफ आरोपों के चलते यह कदम रोक दिया गया.

दिनाकरन पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने, सार्वजनिक संपत्ति, दलितों और अन्य कमजोर वर्गों की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा करने, पत्नी और दो बेटियों के नाम पर तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड के पांच भूखंड रखने, बेनामी लेनदेन, तमिलनाडु भूमि सुधार अधिनियम 1961 द्वारा तय सीलिंग के अलावा कृषि भूमि हासिल करने और रखने, सबूत नष्ट करने, बिक्री करारनामों में कम कीमत दिखाने, स्टांप ड्यूटी से बचने और अवैध निर्माण के आरोप हैं.

उन पर आरोप है कि उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहते हुए जजों का रोस्टर (नाम तालिका) इस तरह तय किया ताकि फैसलों को प्रभावित किया जा सके और इस तरह की अन्य अनियमितताएं कीं. उन पर जजों का अवैध तरीके से तबादला करने और कर्मचारियों की नियुक्तियां करने का भी आरोप है.

दिनाकरन ने महाभियोग को चुनौती देते हुये उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी जिस पर मंगलवार को फैसला सुनाते हुये दिनाकरन की याचिका को खारिज कर दिया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के सदस्य व वकील पीपी राव को हटाने को कहा है. दिनाकरण ने कहा था कि समिति में शामिल सदस्य उनके प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं इसलिए जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in