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फ़िल्मकार मणि कौल का निधन

फ़िल्मकार मणि कौल का निधन

 

नई दिल्ली. 6 जुलाई 2011

सुप्रसिद्ध फ़िल्मकार मणि कौल का कैंसर के कारण दिल्ली में निधन हो गया. वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे.

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मणि कौल ने नयी कहानी आन्दोलन के महत्वपूर्ण कथाकार मोहन राकेश की एक कहानी पर 'उसकी रोटी', 'आषाढ का एक दिन' 'मुक्तिबोध' की कहानी पर 'सतह से उठता आदमी' विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास 'नौकर की कमीज' और 'विजय दान' देथा की कहानी 'दुविधा' पर फ़िल्म बनाई थी. उन्हें राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले थे.

25 दिसंबर 1944 को जोधपुर राजस्थान में जन्में मणि कौल ने फ़िल्म व ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट पुणे में अपनी पढ़ाई की, जहां उन्हें ऋत्विक घटक जैसे फ़िल्मकारों का सानिध्य मिला. बाद में मणि कौल ने वहीं अध्यापन भी किया. उन्होंने फ़िल्म की अपनी नई परिभाषा गढ़ी.

उन्होंने 1969 में उसकी रोटी, 1971 में आषाढ़ का एक दिन, 1973 में दुविधा, 1979 में घासीराम कोतवाल, 1976 में सतह से उठता आदमी, 1982 में ध्रुपद, 1984 में माटी मानस, 1989 में सिद्धेश्वरी, 1989 में नज़र, 1991 में इडियट और 1999 में नौकर की कमीज़ नाम से फ़िल्म व वृत्तचित्र बनाया.

वे पिछले कुछ समय से विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' पर काम कर रहे थे, लेकिन कैंसर होने के बाद उन्होंने इस फ़िल्म को खुद बनाने का फैसला स्थगित कर दिया. हालांकि इसकी अंग्रेजी और हिंदी की स्क्रिप्ट पर पूरा काम हो चुका था.

उनके निधन पर कवि-उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल ने गहरा शोक जताते हुये कहा कि मणि कौल ने अपनी अभिव्यक्ति के लिये अत्यंत मुश्किल रास्ता चुना था, क्योंकि उन्हें लगता था कि वे इसके अलावा किसी और तरीके से अपने को वयक्त नहीं कर सकते, लेकिन उनकी अभिव्यक्ति की आवाज़ को ठीक-ठीक नहीं सुना गया.


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