पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >छत्तीसगढ़ Print | Share This  

माओवादी लेंगे एसपीओ की गारंटी

माओवादी लेंगे एसपीओ की गारंटी

रायपुर. 9 जुलाई 2011


उच्चतम न्यायालय द्वारा एसपीओ की नियुक्तियों को असंवैधानिक ठहराने और सलवा जुड़ूम को बंद करने का माओवादियों ने स्वागत किया है. माओवादियों की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता गुड्सा उसेण्डी की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगर एसपीओ माफी मांग कर गांव लौटने के लिये तैयार हो जाते हैं तो नक्सलियों की जनताना सरकार उन्हें खेती के लिये जमीन उपलब्ध करायेगी और उनकी रोजी-रोटी की गारंटी लेगी.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि पहले सलवा जुडूम और बाद में ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम से लगातार जारी दमन अभियानों में करीब 700 गांवों को तबाह किया गया. एक-एक गांव को अनेक बार किश्तों में जलाया गया. 1200 से ज्यादा लोगों की हत्या की गई. सैकड़ों महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया जिनमें से कइयों को बाद में मार डाला गया. अनाज जलाया गया. सम्पत्ति लूटी गई. मुरगा, सुअर, बकरे जैसे पालतू जानवरों को लूटकर खा डाला गया. इन सभी आतंकी कार्रवाइयों में आदिवासियों में से भर्ती किए गए एसपीओ को ही सामने रखा जाता रहा. पुलिस व अर्धसैनिक बलों को रास्ते दिखाने और गांवों में हमलों के दौरान लोगों और घरों की पहचान करने में भी इन्हीं लोगों को आगे किया जाता रहा. बाद में एसपीओ को बड़े पैमाने पर भर्ती करने का फैसला लिया गया जिससे उनकी संख्या अब करीब पांच हजार की हो गई.

विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि सभी सशस्त्र बलों की तमाम दमनकारी कार्रवाइयों के बावजूद भी माओवादी आंदोलन खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसका विकास और विस्तार की प्रक्रिया लगातार जारी है, इसलिए शोषक सरकारों ने अपने आखिरी दांव के रूप में सेना को उतार दिया है. भले ही फिलहाल ‘प्रशिक्षण’’ के बहाने सेना की तैनाती हो रही हो, लेकिन सच यह है कि ‘जनता पर युद्ध’ में सेना का सीधे तौर प्रयोग शुरू हो चुका है.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि एसपीओं में एक बड़ी संख्या उन लोगों की है जो जानबूझकर नहीं, बल्कि तरह-तरह के दबावों और मजबूरियों के चलते ही एसपीओ बन गए. कई लोगों को गिरफ्तार कर या बलपूर्वक ‘राहत’ शिविरों में ले जाकर मारपीटकर और जान से मार डालने की धमकियां देकर एसपीओ बनने पर मजबूर किया गया. पहले सरकारी आतंक से डरकर एसपीओ बनने वाले भी बाद में धीरे-धीरे उसका हिस्सा बनकर जनता के खिलाफ किए गए जघन्य अपराधों में भागीदार हो गए.

विज्ञप्ति में एसपीओ और कोया कमाण्डो से अपील की गई है वे अपनी नौकरियां छोड़कर अपने-अपने गांवों में लौट आएं. विज्ञप्ति के अनुसार जो अपने गांवों में आकर अपने द्वारा किए गए अपराधों को स्वीकारकर जनता से माफी मांगने को तैयार होंगे और सरकारी तंत्र से पुरी तरह नाता तोड़ लेंगे, उनके पुनर्वास का जिम्मा हम, यानी पार्टी और जनता ले लेंगी. जनता की अपनी सरकार जनताना सरकार उन्हें खेती के लिए जमीन और अन्य साधन उपलब्ध करवाएगी. उनकी रोजी-रोटी की गारंटी रहेगी.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in