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कैबिनेट ने मंजूर किया सरकारी लोकपाल ड्राफ्ट

कैबिनेट ने मंजूर किया सरकारी लोकपाल ड्राफ्ट

नई दिल्ली. 28 जुलाई 2011


केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकपाल बिल का सरकार की ओर से पेश मसौदा मंजूर कर लिया है. अब यही मसौदा मानसून सत्र में संसद के सामने विचार के लिए रखा जाएगा. इसमें प्रधानमंत्री और न्याहयपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान है. टीम अन्ना सरकार के इस फैसले से बेहद नाराज है. किरण बेदी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि कैबिनेट ने जिस लोकपाल बिल को मंजूरी दी है, उसमें राजनेता के हितों का खयाल रखा गया है.

कैबिनेट के इस फैसले पर सरकार का पक्ष रखते हुए केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और अंबिका सोनी ने कहा कि लोकपाल बिल के दायरे में पूर्व प्रधानमंत्री आएंगे. इस पैनल में अध्यक्ष समेत इसमें आठ सदस्य होंगे. पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज करेंगे. इस पैनल में आधे सदस्य न्यायपालिका के होंगे. जबकि बाकी सदस्यों के लिए यह जरूरी होगी कि उनके पास सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष का तजुर्बा हो. इसमें नेता, प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं.

पद छोड़ने के बाद प्रधानमंत्री भी लोकपाल के दायरे में होंगे. कैबिनेट में इस मुद्दे पर लंबी बहस हुई और यह फैसला लिया गया कि प्रधानमंत्री का पद लोकपाल के दायरे से बाहर रहेगा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद कहा था कि प्रधानमंत्री का पद लोकपाल बिल में होना चाहिए. प्रधानमंत्री ने ऐसा नैतिक आधार पर कहा था लेकिन कैबिनेट ने लंबी बहस के बाद यह फैसला लिया कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे से बाहर रहने चाहिए जबकि पूर्व प्रधानमंत्री को इसमें शामिल किया जाना चाहिए.

संसद में पेश होने जा रहे लोकपाल बिल के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ जब शिकायत दर्ज की जाएगी, तब से लेकर सात सालों तक संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला चल सकता है. मौजूदा भ्रष्टाचार विरोधी कानून में किसी भी मामले को निपटाने की समय सीमा नहीं है. सरकार का दावा है कि नए बिल में शीर्ष पदों पर आसीन लोगों को भी जबाबदेह बनाया गया है. कैबिनेट ने इस बात का भी ध्यान रखा कि लोकपाल से प्रशासनिक व्यवस्था को भी नुकसान न पहुंचे इस लिए सात साल की समयसीमा तय की गई है. इस समयसीमा में प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे.

प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने बताया कि न्यायपालिका लोकपाल के दायरे से बाहर रहेगी. न्यायपालिका में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ज्यूडिशयल अकाउंटेबिलिटी बिल ला रही है. लोकपाल की व्यवस्था अलग रहेगी और न्यायपालिका की व्यवस्था अलग रहेगी.

गौरतलब है कि अन्ना हजारे की टीम शुरू से ही प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाना चाहती थी, जबकि सरकार पहले इसके खिलाफ थी. यही स्थिति न्याकयपालिका को लेकर भी है. अन्यी कई मुद्दों पर भी सरकार की राय जुदा है. ऐसे में यह देखना दिलचस्‍प होगा कि यह सरकारी लोकपाल ड्राफ्ट जनता की आकांक्षाओं पर कितना खरा उतर सकेगा.

लोकपाल ड्राफ्ट की खास-खास बातें
-लोकपाल कमेटी में अध्यक्ष के अलावा 8 अन्य सदस्य होंगे.
-लोकपाल कमेटी में 50 फीसदी सदस्य न्या्यपालिका से होंगे.
-बाकी 50 फीसदी सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों से होंगे.
-अध्यक्ष कौन हो सकता है, इसका जिक्र किया गया है.
-कमेटी का अध्यक्ष केवल न्यायपालिका का ही होगा.
-सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज अध्यक्ष हो सकेंगे.
-लोकपाल के दायरे में होगा प्रधानमंत्री का पद.
-मौजूदा प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे से बाहर.


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