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छत्तीसगढ़ में रिश्वत दिया, ठेका लिया- मीर अली

मुद्दा

 

छत्तीसगढ़ में रिश्वत दिया, ठेका लिया- मीर अली

सुनील शर्मा रायपुर. 8 अगस्त 2011


छत्तीसगढ़ में पीडब्लूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर सड़क निर्माण करने वाली कंपनी से कथित तौर पर 10 लाख डॉलर मांगने का आरोप लगा कर सनसनी फैलाने वाले कनाडा के सुपर बिल्ड कंपनी के मालिक मीर अली ने दावा किया है कि राज्य सरकार ने जानबूझ कर मूल ठेकेदार नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल के फर्जीवाड़े की अनदेखी की और इसके लिये राज्य के अधिकारियों ने कंपनी से रिश्वत भी ली. सुपर बिल्ड राज्य सरकार और पहले से ही ब्लैक लिस्टेड कंपनी नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल के बीच में फंस गई और सरकार ने इस मामले में लापरवाही बरती. मीर अली ने रविवार को लिखे एक पत्र में दावा किया है कि छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग के साथ उनकी कंपनी अधिकृत तौर पर काम कर रही थी और इसके पर्याप्त दस्तावेज उनके पास हैं.

मीर अली

Courtesy: Rick Westhead/Toronto Star


ज्ञात रहे कि अपनी तरह के इस अनूठे मामले में छत्तीसगढ़ के कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर आरोप लगाया गया था कि उनके लोगों ने नेशनल हाईवे 221 के जगदलपुर-कोंटा के बीच सड़क निर्माण कार्य के 136 करोड़ रुपये के ठेके के लिये कनाडा में रहने वाले मीर अली की कंपनी सुपर बिल्ड से 10 लाख डालर की रिश्वत की मांग की थी.

एक विदेशी पत्रकार द्वारा इस मामले को सामने लाये जाने के बाद राज्य सरकार ने साफ किया था कि आरोप लगाने वाली कंपनी को ठेका नहीं मिला था, बल्कि नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल नामक कंपनी को ठेका दिया गया था. नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल ने कनाडाई कंपनी सुपर बिल्ड को पेटी कांट्रेक्टर के बतौर काम दिया था. बाद में समय पर काम नहीं होने पर केंद्र सरकार के आदेश पर नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल को तीन साल के लिये ब्लैक लिस्टेड करने और सुरक्षा निधि जब्त करने की कार्रवाई की जाने लगी तो सुपर बिल्ड नामक कंपनी ने राज्य सरकार के अधिकारियों और मंत्री से मुलाकात की. कंपनी के मालिक मीर अली का आरोप है कि मंत्री और उनके समर्थकों ने उनसे 2 प्रतिशत रकम बतौर रिश्वत मांगी.

राज्य सरकार का तर्क है कि उनका सुपर बिल्ड से कोई सीधा संबंध ही नहीं है तो फिर रिश्वत की बात कहां से आती है. यह बात सुपर बिल्ड को पत्र लिख कर भी स्पष्ट किया गया था. लेकिन आरोप लगाने वालों का तर्क है कि मूल ठेका कंपनी नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल पहले से ही ब्लैक लिस्टेड थी तो फिर सरकार ने उसे ठेका कैसे दिया. इसके अलावा सरकार भी स्वीकारती है कि सुरक्षा निधि के 14 करोड़ रुपए भी मूल ठेका कंपनी नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल ने नहीं, उप ठेकेदार सुपर बिल्ड ने ही जमा कराए थे. सुपर बिल्ड के मालिक मीर अली का कहना है कि ऐसे में सरकार सुपर बिल्ड से कोई सरोकार नहीं होने की बात कह कर आसानी से पल्ला कैसे झाड़ सकती है. फिलहाल पूरे मामले को कनाडा हाईकमीशन ने गंभीरता से लिया है और मामले की जांच कर रहा है.

क्या कहना है मीर अली का
रविवार को लिखे पत्र में मीर अली ने लिखा है- " हम माननीय मंत्री जी से उनके निवास पर तीन बार मिल चुके हैं. कृपया उनके सुरक्षा आगंतुक रजिस्टार जाँचें. हम कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों के साथ थे, जब हम उनसे मिले थे. मैं जब भी उनसे मिलने गया, तब कभी मैं अकेला नहीं था. हम उनसे मिलने तब तक नहीं गए थे, जब तक हमें विभागीय कर्मचारियों द्वारा उनसे मिलने को बाध्य नहीं किया गया हो. अन्यथा हमारे पास ऐसा कोई काम नहीं है, जिसके बारे में हम अपने छोटे स्तर पर माननीय मंत्रीजी से मिलकर चर्चा करें.

निवास पर मौजूद अधिकांश कर्मचारी जो हमारे वहां पहुँचने के समय मौजूद थे, हमें जानते हैं. हालांकि हम माननीय मंत्रीजी से उनसे निवासीय कार्यालय में तीन बार मिले हैं लेकिन हम श्री उपाध्याय से मंत्री जी के निवास पर कई बार मिले. हमारे कर्मचारी इसे साबित करने के लिए सुबूत दे देंगे. विभाग के कर्मचारी भी इस बारे में पुष्टि कर सकते हैं.

विभाग के साथ हमारा रिश्ता आधिकारिक है. उनकी स्वीकृति के आधार पर, जैसा कि नीरज सीमेंट लिमिटेड (प्रधान ठेकेदार) ने लिखित में पुष्टि की है, फिर हमने ही सुपरबिल्ड के रूप में हमारे बैंकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को अनुरोध किया और जरूरी जाँच पड़ताल के बाद निष्पादन गारंटी जारी की गई.

इन गारंटियों को सुपरबिल्ड के लैटरहैड पर विभाग में जमा किया गया था. विभाग ने बैंक की गारंटी स्वीकार कर ली है और सुपरबिल्ड के लैटरहैड पर अभिस्वीकृति दी है.

तदपश्चात विभागीय अधिकारी सुपरबिल्ड की गाड़ियों में, सुपरबिल्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हैदराबाद आए और सुपरबिल्ड के एमडी (यानी मीर अली), फिर एसबीआई सुपरबिल्ड के बैंकर से मिलने के लिए और बैंक गारंटियों को सत्यापित कराने के लिए गए. एसबीआई विभागीय कर्मचारियों से सुपरबिल्ड द्वारा परिचय कराए जाने के बाद मिली. एसबीआई ने विभाग को बताया कि बैंक गारंटियां सुपरबिल्ड के द्वारा छत्तीसगढ़ विश्व बैंक प्रोजेक्ट को जारी की गई हैं.(मूल ठेका कंपनी नीरज सीमेंट स्ट्रक्चरल द्वारा हमें विश्व बैंक प्रोजेक्ट दिए जाने में एक बड़ा धोखा है)

विभाग बहुत अच्छे तरीके से सब तथ्यों को जानता है लेकिन मंत्रालय में हर किसी को दिग्भ्रमित कर रहा है. नीरज सीमेंट द्वारा दी गई सारी बैंक गारंटियां नीरज सीमेंट की नहीं हैं. नीरज ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को रिश्वत देकर धोखे से विभाग में बैंक गारंटियां जमा करवाईं. विभाग ये सब जानता है क्योंकि हम उन्हें जनवरी 2011 से लिखित में सूचित करते रहते हैं. लेकिन विभाग नीरज के किसी अन्य प्रोजेक्ट पर कुछ भी कार्रवाई नहीं करेगा क्योंकि नीरज ने वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत दी है.

नीरज सीमेंट ने हमारी कंपनी सुपर बिल्ड का विभाग में आधिकारिक रूप से लिखित में परिचय कराया और सुपर बिल्ड के वरिष्ठ कर्मचारियों को एक अखंडनीय पावर ऑफ एटोर्नी दी, जिससे कि वे प्रोजेक्ट पर काम कर सकें. विभाग ने नीरज का पत्र स्वीकृत किया और एक पावती दी. अनुबंध के आधार पर यदि विभाग ने नीरज के पत्र को 30 दिनों के अंदर अस्वीकृत नहीं किया तो यह मान लिया जाएगा कि उसे स्वीकृत कर लिया गया है. विभाग 2011 के मध्य अप्रैल तक सिर्फ पावर ऑफ एटोर्नी (यानी सुपर बिल्ड) से ही संवाद करता रहा.

साइट पर सारे उपकरण, अधिकारीगण, खदानें सुपरबिल्ड के स्वामित्व की हैं. विभाग के पास ये सारा तथ्य लिखित रूप में हैं.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

sanjeev pandey [reporter.sanjeev@gmail.com] bilaspur - 2011-08-09 17:51:00

 
  अब तो इंतजार कद्दावर मंत्रीजी के बयान का है. वैसे मीर अली के दस्तावेजी जवाब के बाद मंत्री जी घिरते नज़र आ रहे हैं. 
   
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