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मनमोहन सरकार ने बोला अन्ना पर हमला

मनमोहन सरकार ने बोला अन्ना पर हमला

नई दिल्ली. 14 अगस्त 2011


सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के अनशन के ऐलान से बौखलाई सरकार ने उन पर जमकर हमला बोल दिया है. पहले कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अन्ना पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगाए फिर सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों ने अन्ना और उनकी टीम पर निशाना साधा. केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और अंबिका सोनी ने रविवार को संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में टीम अन्ना को संविधान और कानून का जमकर पाठ पढ़ाया.

पीएम को लिखी चिट्ठी में अन्ना की भाषा पर सवाल खड़े करते हुए अंबिका सोनी ने कहा, ‘किसने खत लिखा, यह नहीं मालूम. लेकिन हस्ताक्षर अन्ना के ही थे. क्या चिट्ठी की भाषा गांधीवादी विचारधारा का प्रारूप है. चिट्ठी लिखते समय यह सोचा भी नहीं जाता कि किसको चिट्ठी लिखी जा रही है.’

सोनी ने अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वह आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं. लेकिन उनकी यह पहचान मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के चलते ही हुई है क्योंकि इसी सरकार ने इस आरटीआई एक्ट को लागू किया था.

केंद्रीय मंत्री ने टीम अन्ना के साथ दिखाई देने वाली पूर्व आईपीएस अधिकारी किरन बेदी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें तो पता है कि पुलिस कैसे काम करती है. एक सवाल के जवाब में अंबिका सोनी ने कहा कि यह सरकार की बौखलाहट नहीं, बल्कि सरकार टीम अन्ना की गलतफहमी दूर कर रही है.

कपिल सिब्बल ने कहा, ‘संविधान के उल्लंघन का सवाल उठाया जा रहा है. आरोप है कि पीएम और हमारी सरकार इन हकों को छीन रही है. इसमें कोई दो राय नहीं कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का सबको हक है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सामने पांच दस हजार लोग खड़े कर देना, संसद के सामने 100 मीटर की दूरी पर 10 हजार लोगों को जमा कर देना क्या उचित है. उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शन करने का हक है लेकिन अपनी पसंद की जगह पर प्रदर्शन करने का हक नहीं है.’

सिब्बल ने टीम अन्ना के सदस्यों वरिष्ठ वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘अन्ना जी को भले ही संविधान की उतनी जानकारी नहीं है लेकिन उनके साथ रहने वाले लोग तो कानून के जानकार हैं. अनशन का मतलब ‘सेल्फ प्यू रिफिकेशन’ है, बगावत नहीं. यदि संविधान के तहत मौलिक अधिकार मिले हैं तो उनके साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं.’

कपिल सिब्बल ने कहा कि जन लोकपाल के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अन्ना के पीछे कोई दूसरी ताकत है. हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि अन्ना के पीछे वो कौन ताकत है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘लोकपाल बिल संसद में है, ऐसे में अन्ना से बात करने का कोई तर्क नहीं. यह भोले भाले लोगों का आंदोलन नहीं है. इस आंदोलन के लिए कौन पैसे भेज रहा है, बल्क एसएमएस भेज रहा है, इसका पता नहीं.’