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अन्ना समर्थकों सहित रिहा

अन्ना समर्थकों सहित रिहा

 

नई दिल्ली. 16 अगस्त 2011
 

जन लोकपाल के लिए मुहिम चला रहे अन्ना हजारे और उनके आठ सहयोगियों को अनशन से रोकने के बाद सात दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया लेकिन शाम होते-होते देश भर में केंद्र सरकार के खिलाफ बन रहे माहौल के बाद सरकार को अन्ना और उनके समर्थकों को रिहा करने का निर्णय लेना पड़ा.

अन्ना हजारे गिरफ्तार

अन्ना हजारे को दिल्ली पुलिस ने पूर्वी दिल्ली से हिरासत में लिया था, जहां वे ठहरे हुए थे. सुप्रीम इन्क्लेव में अपने कैंप से अन्ना जैसे ही बाहर निकले, वहां मौजूद करीब हजार लोगों की भीड़ ने अन्ना को घेर लिया. इस बीच वहां पहुंची, पुलिस ने अन्ना को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने वहां मौजूद लोगों को बताया कि वो अन्ना को अनशन स्थल ले जा रहे हैं. अन्ना ने जब पुलिस से कहा कि वो राजघाट जाना चाहते हैं लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेते हुए कहा कि उन्हें ऐसा करने का आदेश है.

मंगलवार की सुबह अन्ना और उनके समर्थकों को जब पुलिस ने हिरासत में लिया तो केंद्र सरकार के नुमाइंदों को इस बात का अनुमान नहीं था कि लगभग सभी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद भी आंदोलन इतना तेज हो पाएगा. लेकिन दिन चढ़ने के साथ-साथ अन्ना के समर्थकों का आंदोलन देश के अलग-अलग शहरों में परवान चढ़ता गया.

अन्ना हजारे की गिरफ्तारी के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने उन्हें पेश किया गया. वहां पुलिस ने कहा कि हालांकि उनके लिए हिरासत की जरूरत नहीं है, अगर वह चाहें तो निजी बॉन्ड भर कर छूट सकते हैं. उन्हें यह लिख कर देना होगा कि वह धारा 144 का उल्लंघन नहीं करेंगे और न ही लोगों से ऐसा करने की अपील करेंगे. मगर, अन्ना ने ऐसा कोई बॉन्ड भरने से इनकार कर दिया. इसके बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें 7 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जहां से उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया. लेकिन देश भर में उनकी गिरफ्तारी के विरोध के बाद अंततः देर शाम दिल्ली पुलिस ने अन्ना व उनके समर्थकों को रिहा करने का निर्णय लिया और तिहाड़ जेल में उनकी रिहाई के लिये वारंट भेजा. दिल्ली पुलिस ने निजी मुचलका भरने की शर्त हटाकर रिलीज वारंट तिहाड़ जेल के डीजी को भेजा.

रात करीब नौ बजे अन्ना की रिहाई की सारी औपचारिकताएं पूरी कर दी गईं, लेकिन अन्ना ने रिहाई से इनकार कर दिया. अन्ना हजारे जेल परिसर में इस बात के लिये अड़े रहे कि उन्हें या तो सरकार जे पी पार्क में अनशन की लिखित अनुमति दे या फिर तिहाड़ में ही अनशन करने दे.


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