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संसद से बढ़ कर कोई नहीं है- मनमोहन सिंह

संसद से बढ़ कर कोई नहीं है- मनमोहन सिंह

 

नई दिल्ली. 17 अगस्त 2011
 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने समाजसेवी अन्ना हजारे की गिरफ्तारी पर कड़े तेवर अपनाते हुए कहा है कि देश में संसद से बढ़कर कोई नहीं है. हर शख्स को कानून का सम्मान करना चाहिए. अन्ना का जनलोकपाल बिल थोपना गलत है. हालांकि उन्होंने माना कि अन्ना की गिरफ्तारी अफसोसजनक है. प्रधानमंत्री लोकसभा में हजारे की गिरफ्तारी और उसके बाद पैदा हुए हालात पर बयान दे रहे थे.

मनमोहन सिंह ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने अन्ना टीम के सामने अनशन के लिए छह शर्तें रखीं थीं. इन शर्तों को उन्होंने नहीं माना, इसलिए पुलिस ने अनशन की इजाजत नहीं दी. अन्ना टीम धारा 144 तोड़ने पर अड़ी थी. अन्ना और उनकी टीम को देशवासियों द्वारा चुने गए सांसदों के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा, कि भारत विश्व के मंच पर आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन कुछ शक्तियाँ ऐसा नहीं चाहती. हमें ऐसी शक्तियों के हाथ में नहीं खेलना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि अन्ना हज़ारे ने दिल्ली पुलिस की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था, इसलिए उन्हें गिरफ़्तार करना पड़ा. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मज़बूत लोकपाल के पक्ष में है, लेकिन इसकी एक प्रक्रिया है और क़ानून बनाने का हक़ संसद को है.

प्रधानमंत्री ने बताया कि लोकपाल विधेयक के लिए संयुक्त मसौदा समिति का गठन किया गया था और अन्ना हज़ारे के टीम को सदस्यों को अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया. इस समय लोकपाल विधेयक स्थायी समिति के पास है और अन्ना हज़ारे की टीम अपनी बात वहाँ रख सकती है. स्थायी समिति चाहे तो विधेयक में संशोधन कर सकती है. रधानमंत्री ने कहा कि अन्ना हज़ारे और समर्थक चाहते हैं कि जनलोकपाल विधेयक को संसद में पेश करना चाहिए और ऐसा नहीं हुआ तो वे आमरण अनशन करेंगे.

मनमोहन सिंह ने अपने बयान में ये बताया कि कैसे दिल्ली पुलिस के पास अन्ना की टीम ने अनशन का आवेदन किया था और किन परिस्थितियों में दिल्ली पुलिस ने अनशन की अनुमति नहीं दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सभी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन अन्ना ने जो रास्ता चुना है, वो उचित नहीं है और ये संसदीय लोकतंत्र के लिए नुक़सानदेह साबित हो सकता है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ganesh agrawal [agrawalganesh73@gmail.com] raigarh chhatishgarh - 2011-08-22 12:36:03

 
  मनमोहन जी, अन्ना जी ने गिरफ्तार होने के बाद भी शर्ते नहीं मानी फिर उन्हें रिहा कैसे किया गया ? रामदेव और अन्ना के मामले में लगातार गल्तियां हो रहीं और एक गलती को छुपाने के हर रोज नई गलती की जा रही है. रामदेव के साथ जो कुछ रामलीला मैदान में हुआ, जनता को यह समझ में आ गया. इसलिए पूरा देश अन्ना के साथ बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी निभाना चाहता है. अन्ना और रामदेव की वाजिब मांगों पर आपकी सरकार इतनी दुखी है कि अनशन की शर्तो में मीन मेख निकालकर उसे भटकाना चाहती है. काला धन वापस लाने और जनलोकपाल विधेयक के बारे में कोई चर्चा ही नहीं चाहती. इनकी मांगों में देशवासियो का हित निहीत है, यह आप लोगों को भी समझना चाहिए. 
   
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