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सरकार छीन रही विरोध का अधिकार- जेटली

सरकार छीन रही विरोध का अधिकार- जेटली

 

नई दिल्ली. 17 अगस्त 2011
 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने अन्ना हजारे प्रकरण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि भ्रष्टाचार को मिटाने में उनकी राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण ही देश में आज यह नौबत पैदा हुई है. पर यह सरकार भ्रष्टाचार को दूर करने के बजाय नागरिकों के विरोध और प्रदर्शन के अधिकार को ही छीन रही है.

जेटली ने राज्यसभा में अन्ना की गिरफ्तारी पर प्रधानमंत्री के बयान के जबाब में मनमोहन सिंह को लाचार और निरीह प्रधानमंत्री की संज्ञा देते हुये कहा कि देश की जनता भ्रष्टाचार से परेशान और हताश हो गई है. सरकार उसे दूर करने में विफल हो गई है तथा वह अदालत और जनता के दबाब में आकर ही कोई कार्रवाई कर पा रही है. उन्होंने कहा कि अन्ना का आंदोलन इसी हताशा और निराशा से उत्पन्न हुआ है क्योंकि जनता में असंतोष और बैचेनी छाई है. उन्होंने कहा कि अन्ना के आंदोलन ने हमें नींद से जगाया है और चेताया है कि हमें अपने घर को दुरुस्त करना चाहिए. यह केवल जन लोकपाल विधेयक का मामला नहीं है बल्कि यह सरकार पर से उठते विश्वास के संकट का नतीजा है.

जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राजनीतिक संकट को अपराध दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं और पुलिस के जरिए सुलझाने की कोशिश की है, जिसका नतीजा हम सब देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक संकट को राजनीतिक तरीके से सुलझाया जाना चाहिए न कि पुलिस के जरिए. उन्होंने अन्ना हजारे के आमरण अनशन पर लगी 22 शर्तों को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि क्या कांग्रेस भविष्य में अपनी कोई रैली निकालते हुए उन शर्तों का पालन करेगी ? क्या वह पहले से बता पाएगी कि उसकी रैली में कितने लोग आएंगे? कितनी गाड़ियां पार्क होगी?

उन्होंने कहा कि इस तरह की शर्तें तो आजादी की लड़ाई में सत्याग्रह और अनशन पर भी नहीं लगायी जाती थी. उन्होंने कहा कि सरकार पहले तो नागरिक समाज के लोगों को लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए आमंत्रित करती है, फिर जब वह अपना विरोध प्रकट करना चाहते हैं तो उन्हें गिरफ्तार भी करती है.

उन्होंने कहा कि सरकार को स्थितियों से निपटने नहीं आता. बाबा रामदेव के मामले में भी उसने ऐसा ही किया. अन्ना की गिरफ्तारी को लेकर जब देश भर में ग्रामीण इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए तो शाम को पुलिस ने अन्ना को रिहा करने का भी आदेश दिया लेकिन अन्ना ने जेल से बाहर न आकर सरकार को ही चुनौती दे दी.

अरुण जेटली ने कहा कि अन्ना के लोकपाल विधेयक से हम सहमत नहीं हैं पर सरकार के लोकपाल विधेयक से भी सहमत नहीं है. वह सरकारी लोकपाल है पर अन्ना को अपनी बात कहने का हक है. प्रधानमंत्री इसे संसद बनाम नागरिक समाज के टकराव बताकर मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना चाहते हैं. हम प्रधानमंत्री के इस रवैये को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा कि कानून बनाने का अधिकार सांसदों को है और अन्ना को भी संसद पर विश्वास है. लेकिन उन्हें विधेयक पर असहमति है. उन्हें अपनी बात कहने का लोकतंत्र में मौका मिलना ही चाहिए.