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अन्ना हजारे का आंदोलन बनावटी- शर्मिला

अन्ना हजारे का आंदोलन बनावटी- शर्मिला

 

नई दिल्ली. 1 सितंबर 2011
 

आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट में सुधार के लिये पिछले 11 साल से अनशन कर रही मणिपुर की इरोम शर्मिला ने अन्ना हजारे के आंदोलन को बनावटी बताया है. इरोम शर्मिला ने ये बात एक टीवी चैनल से बातचीत में कही है.

ज्ञात रहे कि टीम अन्ना ने उन्हें रामलीला मैदान में भी आने का न्योता दिया था. शर्मिला ने कहा कि ‘हम भ्रष्टानचार कैसे मिटा सकते हैं? जहां तक मेरे मामले का सवाल है, मैं एक साधारण महिला हूं जो समाज में सुधार लाना चाहती है. मुझे सामाजिक कार्यकताओं के बारे में कोई आइडिया नहीं है. अन्ना का आंदोलन प्रेरणादायी जरूर है लेकिन यथार्थवादी नहीं है.’

शर्मिला ने कहा, 'अन्ना उम्रदराज सामाजिक कार्यकर्ता हैं जबकि मैं एक साधारण महिला हूं. हमारा मकसद बिल्कुल अलग है. हमें अन्ना के नेतृत्व की जरूरत नहीं है.'

इससे पहले शर्मिला ने अन्ना हजारे को एक चिट्ठी लिख कर उनके आमंत्रण का स्वागत किया था और कहा था कि आपकी जैसी परिस्थिति के विपरीत, मैं एक लोकतांत्रिक देश के एक लोकतांत्रिक नागरिक की हैसियत से, यहाँ के सम्बद्ध अधिकारियों की मर्जी के खिलाफ न्याय के लिए अपने अहिंसात्मक विरोध के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकती. यह एक ऎसी समस्या है जिसे मैं समझ नहीं पाती. मेरा विनम्र सुझाव है कि यदि आप सचमुच गंभीर हों तो कृपया सम्बद्ध विधायकों/अधिकारियों से अपनी तरह मुझे भी आज़ाद करवाने के लिए बात करें ताकि मैं सभी बुराइयों की जड़ भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के आपके शानदार युद्ध में शामिल हो सकूँ. या आप चाहें तो मणिपुर आ सकते हैं, जो दुनिया का सर्वाधिक भ्रष्टाचार-पीड़ित क्षेत्र है.

भारत के पूर्वोत्तर में सरकार ने सशस्त्रबल विशेषाधिकार कानून लागू किया है, जिसके तहत सेना की कार्रवाई किसी भी कानूनी जाँच परख के परे है. इस कानून के तहत सेना लगातार अत्याचार करती रही है. अत्याचार के आरोपों के बाद सरकार ने जीवन रेड्डी समिति गठित की थी जिसकी रिपोर्ट में इस कानून को हटा देने की सिफारिश की गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री समेत दूसरे लोगों के आश्वासन के बाद भी यह कानून अब तक नहीं हटाया गया है. इसे हटाने की मांग को लेकर ही इरोम शर्मिला नवंबर 2000 से आमरण अनशन कर रही हैं.

कुछ महीने पहले ही भारत के गृहसचिव जी के पिल्ले ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि इरोम शर्मिला ही नहीं बल्कि देश का कोई भी नागरिक अगर सरकार की किसी नीति के खिलाफ भूख हड़ताल पर जाता है तो ये सरकार के लिए शर्मनाक बात है. जिस घटना के कारण इरोम शर्मिला ने ये असाधारण कदम उठाया है वो अफसोसनाक है और हमे इससे ये सीखना है कि ऐसी घटनाएँ न हो. ये सरकार के लिए एक सबक है. लेकिन पिल्ले की बयानबाजी का धरातल पर कोई असर नहीं हुआ और इरोम शर्मिला का अनशन अब भी जारी है.