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अब अरविंद केजरीवाल पर सरकारी फंदा

अब अरविंद केजरीवाल पर सरकारी फंदा

 

नई दिल्ली. 2 सितंबर 2011
 

जनलोकपाल बिल के लिये आंदोलन करने वाले अरविंद केजरीवाल को भारत सरकार अब भी सरकारी अधिकारी ही मानती है. 2006 में इस्तीफा देने के बाद भी सरकार ने जनलोकपाल बिल के लिये अनशन शुरु किये जाने के ऐन पहले अरविंद को एक नोटिस भेज कर कहा था कि केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी की दो साल की सैलरी का साढ़े तीन लाख रुपये और उसका ब्याज 4 लाख सोलह हजार रुपये लौटाएं. यही नहीं, केजरीवाल से 50 हजार रुपये का कंप्यूटर लोन, जो ब्याज के साथ एक लाख रुपये हो चुका है, लौटने को कहा गया था. नोटिस में कहा गया था कि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया है और उन्होंने सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है.

ज्ञात रहे कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का बड़ा चेहरा बन चुके अरविंद केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रह चुके हैं. वे वर्ष 1995 में भारतीय राजस्व सेवा में शामिल हुए थे. वे दिल्ली में अतिरिक्त आयकर आयुक्त के पद पर काम कर चुके हैं. फरवरी 2006 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह समर्पित कर दिया था. खबर के अनुसार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं किया है और सरकार अभी भी केजरीवाल को सरकारी मुलाजिम मानती है.

आंदोलन समाप्त होने के बाद अब अरविंद केजरीवाल ने आयकर विभाग के एस नोटिस का जवाब दिया है. अपने जवाब में केजरीवाल ने आरोप को गलत बताते हुए कहा कि उन्होंने सेवा शर्तों का कोई उल्लंघन नहीं किया है. बकाये संबंधी दावे को भी उन्होंने गलत बताया है. उन्होंने नोटिस के लिए चुने गए वक्त पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो साल से चुप बैठे रहने के बाद विभाग ने आनन-फानन यह नोटिस भिजवा दिया.
गौरतलब है कि इनकम टैक्स विभाग वित्त मंत्रालय के अंतगर्त आता है जो इन दिनों प्रणव मुखर्जी के पास है. केजरीवाल के मुताबिक उनकी सेवा शर्तें सिर्फ यह कहती हैं कि वह स्टडी लीव के दौरान नौकरी नहीं छोड़ सकते. उन पर जुर्माना तभी लगाया जा सकता है जब वह स्टीड लीव से वापस न लौटें या लौटने से पहले ही इस्तीफा दे दें या रिटायरमेंट ले लें या फिर स्टडी कोर्स पूरा न कर सकें.

केजरीवाल के अनुसार वह नवंबर 2000 से 31 अक्टूबर 2002 तक स्टडी लीव पर थे और 1 नवंबर 2002 को दोबारा जॉइन किया. 31 अक्टूबर 2005 को उन्होंने तीन साल पूरा कर लिया और इसके तीन महीने बाद फरवरी 2006 में इस्तीफा दिया. 2004 से 06 के बीच वह वेतन रहित छुट्टी पर थे.

कंप्यूटर लोन के बारे में उनका कहना है कि वह अपने बैंक स्टेटमेंट की कॉपी के साथ विभाग को बता चुके थे कि उनके पास पैसा नहीं है और इसलिए विभाग उनकी जीपीएफ रकम में से बकाया काट ले. केजरीवाल का कहना है कि उन्होंने किसी सेवा शर्त का उल्लंघन नहीं किया है और अगर किया भी है तो विभाग को मेरा बकाया माफ करने का अधिकार है क्योंकि वह जनहित में कार्य कर रहे हैं.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

यतेन्द्र सिँह तोमर [yatendra.maruti@gmail.com] रायपुर - 2011-09-02 17:04:11

 
  ये सरकार अपने अपमान का बदला निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। अभी तो केजरीवाल जी, किरण बेदी जी और उनके सभी साथियों की मुश्किलें शुरू हुई हैं, उनको अभी और भी कठिन दौर से गुज़रना है। पर वो ये ना समझें कि वो अकेले हैं , मुश्किलों के इस दौर में हर सच्चा हिन्दुस्तानी उनके साथ है।  
   
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