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निचली अदालत करे नरेंद्र मोदी का फैसला

निचली अदालत करे नरेंद्र मोदी का फैसला

नई दिल्ली. 12 सितंबर 2011


2002 गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी दंगों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई आदेश देने से इनकार करते हुए कहा है कि अब इस पर फ़ैसला गुजरात की निचली अदालत को सुनाना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश उस याचिका पर सुनाया, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 2002 में हुए गुलबर्ग सोसाइटी दंगों को रोकने के लिए जान बूझ पर कोई क़दम नहीं उठाया. गुलबर्ग सोसाइटी दंगों में 37 लोग मारे गए थे और ज़किया जाफ़री ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री मोदी और 61 अन्य लोगों ने गुजरात में हुई हिंसा को बढ़ावा दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच समिति यानी एसआईटी को आदेश दिया है कि वो अपनी अंतिम रिपोर्ट गुजरात की निचली अदालत को सौंप दे. इस दंगे में मारे गए कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़ाकिया जाफ़री ने कोर्ट के इस फ़ैसले पर निराशा जताई और कहा, “सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला बेहद निराशाजनक है. मेरे पास एक बार फिर इसके ख़िलाफ़ अपील करने के अलावा और कोई चारा नहीं है. 2002 में जो कुछ भी हुआ था, उसके हर पल का सच्चा ब्यौरा मैंने एसआईटी को दिया था. इतने बरसों के बाद एक ही बात को मैं कब तक दोहराऊं.

ज़ाकिया जाफ़री का कहना है कि राज्य की अदालत को इस मामले का सौंप दिए जाने का मतलब ये ही है कि नरेंद्र मोदी के हक़ में ही फ़ैसला आएगा.

हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड ने कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि इस फ़ैसले को क्लीन चिट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “ये संघर्ष बहुत लंबा है. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का ग़लत अर्थ निकाला जा रहा है. अब हमारी याचिका, एसआईटी की रिपोर्ट और राजू रामचंद्रन की रिपोर्ट गुजरात के मजिस्ट्रेट देखेंगें. ऐसा नहीं कहा जा सकता कि नरेंद्र मोदी और 61 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ कोई केस नहीं है. अगर मोदी या किसी और के ख़िलाफ़ मामला बंद होने की बात होगी, तो ज़ाकिया जी और हमारा पक्ष सुना जाएगा. हमें भरोसा है कि गुजरात की अदालत इस मामले में उपयुक्त फ़ैसला सुनाएगी.”


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