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झामुमो ने 3 करोड़ लेकर बचाई थी राव की सरकार

झामुमो ने 3 करोड़ लेकर बचाई थी राव की सरकार

 

रांची. 13 सितंबर 2011
झामुमो के चार सांसदों ने 1993 में विश्वास मत के दौरान पैसे लेकर पीवी नरसिंह राव की सरकार के समर्थन में वोट डाले थे. मतदान करने के बदले कांग्रेस ने उन्हें करीब तीन करोड़ रुपये दिये थे. आयकर ट्रिब्यूनल के फैसले में कहा गया है कि झामुमो ने कांग्रेस से मिली राशि को रिश्वत नहीं मानने की दलील दी. कहा था कि यह राशि झामुमो को चंदे के रुप में दी गयी. ट्रिब्यूनल इससे सहमत है, इसलिए ये सांसद कर चुकाने के लिए बाध्य नहीं हैं.

‘प्रभात खबर’ के अनुसार पैसे लेनेवाले झामुमो के तत्कालीन सांसदों में शिबू सोरेन, सूरज मंडल, शैलेंद्र महतो व साइमन मरांडी शामिल थे. इनमें शैलेंद्र महतो सरकारी गवाह बन गये थे. वह अभी झाविमो में हैं. मामले की सुनवाई के दौरान आयकर ट्रिब्यूनल ने चारों सांसदों को उनके खाते में जमा रुपयों के स्रोत बताने को कहा था.

आयकर ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के दौरान झामुमो सांसदों ने कहा था कि 1993 में पीवी नरसिंह राव सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. इसके बाद कांग्रेस के नेताओं ने उनसे मुलाकात की. कहा कि देशहित में कांग्रेस की सरकार को बचाना जरूरी है. ऐसे में झामुमो के सभी सांसद सरकार के पक्ष में मतदान करें. इसके बाद झामुमो के चार सांसदों ने पहले सरकार के पक्ष में वोट डाला. झामुमो सांसदों ने दलील दी थी कि इसके बाद कांग्रेस की ओर से तीन करोड़ रुपये पार्टी के कार्यो और झारखंड के लोगों के कल्याण के लिए दिये गये थे. बड़ी पार्टियां छोटी पार्टियों को चंदा देती हैं. यह अवैध नहीं है. झामुमो को दी गयी राशि रिश्वत की श्रेणी में नहीं आती है.

झामुमो के सांसदों ने ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया था कि सीबीआइ के डर से उन लोगों ने अपने खाते में जमा पैसों की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी थी. झामुमो सांसदों ने ब्लैकमेल होने का डर और कानून की कम जानकारी होने की बात भी कबूल की थी.

रिश्वत कांड के पहले चरण में आयकर विभाग ने जब सांसदों से निजी खातों में जमा राशि की जानकारी मांगी थी, तो उन्होंने बताया था कि यह रकम पार्टी फंड से उधार ली गयी है. उस समय आयकर विभाग को दिये गये ब्योरे में झामुमो सांसदों की ओर से कहा गया था कि झारखंड के लोगों व पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यो के लिए यह राशि दी थी.

इसके बाद आयकर विभाग ने सांसदों से लोगों से मिलनेवाले चंदे का विस्तृत ब्योरा मांगा. इसके आलोक में झामुमो की ओर से चंदे की रसीद जमा करायी गयी थी. जांच एजेंसियों ने इन रसीदों को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा था. जांच में पाया गया था कि रसीद के पूरे बुक को एक बार में फाड़ा गया है. साथ ही उसमें चंदे का ब्योरा भी एक-दो दिनों के अंतराल में लिखे गये हैं. प्रयोगशाला की इस रिपोर्ट से जांच एजेंसियों से यह निष्कर्ष निकाला था कि झामुमो सांसदों ने अपने खाते में जमा राशि का सच छिपाने के लिए चंदे का बहाना बनाया है. सामान्य प्रक्रिया के तहत चंदा वसूलने में आठ-दस बुक को एक साथ नहीं फाड़ा जाता.

इनके खातों में जमा हुए थे पैसे
* शिबू सोरेन, पी सोरेन, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन के खाते में 30 लाख रुपये.
* साइमन मरांडी व सुशीला हांसदा के खाते में 12 लाख और 21 लाख रुपये.
* शैलेंद्र व आभा महतो के खाते में 39 लाख रुपये.
* सूरज मंडल के खाते में 30 लाख रुपये.
* सूरज मंडल, शिबू सोरेन, साइमन मरांडी व शैलेंद्र महतो के खाते में 30 व 10 लाख रुपये.


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