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वामपंथी उग्रवाद सबसे बड़ी चुनौती- चिदंबरम

वामपंथी उग्रवाद सबसे बड़ी चुनौती- चिदंबरम

 

नई दिल्ली. 14 सितंबर 2011
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि वामपंथी उग्रवाद भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने वामपंथी उग्रवाद को भारत में ‘सर्वाधिक हिंसक आंदोलन‘ करार देते हुए कहा कि नक्सल प्रभावित जिलों में शासन चलाने का दारोमदार राज्यों पर ही होना चाहिए.

उन्होंने माओवाद प्रभावित 60 जिलों के कलेक्टरों की यहां आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कहा, 'शासन चलाने का दारोमदार राज्यों से केंद्र को स्थानांतरित नहीं होना चाहिए...अंतिम विश्लेषण में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में शासन की जिम्मेदारी राज्यों की ही होनी चाहिए.

चिदंबरम ने कहा कि केंद्र सरकार के पास 'बहुत अधिक मानव संसाधन नहीं हैं' और यह सिर्फ मदद उपलब्ध करा सकती है. उन्होंने कहा कि प्रभावित जिलों में लड़ाई कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने की नहीं बल्कि वहां लोगों के 'दिलोदिमाग' को जीतने की है.

यह उल्लेख करते हुए कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई तब तक नहीं जीती जा सकती जब तक कि वे अधिकारियों के पक्ष में नहीं होते, गृहमंत्री ने कहा, 'ग्रामीण अभी हमारी तरफ नहीं हैं या कम से कम सभी ग्रामीण हमारे पक्ष में नहीं हैं जो विश्वास की कमी शासन की कमी और विकास की कमी की वजह से है.'

गृहमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों के 'दिलोदिमाग' को जीतने और उन्हें 'अपने पक्ष' में करने के लिए प्रयासों की जिम्मेदारी राज्यों की रहनी चाहिए और हमेशा राज्यों की रहेगी.

उन्होंने कहा, 'हम हर तरह से मदद करेंगे लेकिन अंतिम तौर पर राज्य सरकारों को नक्सल प्रभावित जिलों में उनके द्वारा उठाए जाने वाले सभी कदमों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.'

कार्यशाला एकीकृत कार्य योजना के तहत माओवाद प्रभावित जिलों में ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उचित विकास रणनीति विषय पर आधारित थी. गृहमंत्री ने कहा कि शासन और विकास में कमी का समाधान तब तक नहीं हो सकता जब तक कि विश्वास की कमी का समाधान नहीं निकलता.

उन्होंने कहा, 'यदि ग्रामीण सोचते हैं कि नक्सली उनके मित्र हैं और स्थापित सरकार उनके प्रतिकूल है तो आप लड़ाई नहीं जीत सकते.' चिदंबरम ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद में इस साल आतंकी हिंसा के मुकाबले दस गुना ज्यादा लोग मारे गए. गृहमंत्री ने कहा,'भारत में सर्वाधिक हिंसक आंदोलन आतंकवाद या विद्रोह नहीं बल्कि वामपंथी उग्रवाद है. 26 लोग आतंकी हिंसा में मारे गए और 46 विद्रोह में (27 जम्मू-कश्मीर) में मारे गए और 297 लोग नक्सल हिंसा में मारे गए. यह आतंकी घटनाओं में मारे गए लोगों की संख्या के मुकाबले दस गुना ज्यादा है.'

उन्होंने कहा,'शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती वामपंथी उग्रवाद है न कि आतंकवाद या विद्रोह.' गृहमंत्री ने कहा कि इससे लड़ाई में किसी फायदे से पहले इसकी प्रकृति को समझने और आंदोलन के उद्देश्य पर स्पष्टता की आवश्यकता है. गृहमंत्री ने कहा,' किसी अन्य आंदोलन के विपरीत यह आंदोलन अत्यंत भयानक और बर्बर विचार से संचालित होता है. वामपंथी उग्रवाद का उद्देश्य विकास कराना नहीं बल्कि संसदीय लोकतंत्र को उखाड़ फेंकना है- उनका लक्ष्य उनके तरीके निर्वाचित सरकारों के लक्ष्य से सीधे टकराते हैं.'

कार्यशाला को संबोधित करते हुए सड़क एवं राजमार्ग मंत्री सीपी जोशी ने जोर देकर कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विश्वास, शासन और विकास की कमी है. उन्होंने कहा कि किसी आदिवासी गांव में एक पुलिस अधिकारी भी काफी डरा हुआ व्यक्ति होता है.


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