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सवा रुपये में खाना मिलता है- मनमोहन का हलफनामा

सवा रुपये में खाना मिलता है- मनमोहन का हलफनामा

 

नई दिल्ली. 21 सितंबर 2011
आप चाहें तो इसे योजना आयोग का क्रूर आपराधिक मजाक कह सकते हैं लेकिन मनमोहन सिंह और मोंटेक सिंह अहलुवालिया के नेतृत्व में काम करने वाले योजना आयोग ने उच्चतम न्यायालय में जो हलफनाम दायर किया है, वह मनमोहन सिंह सरकार की बेशर्मी को और खुले रुप में जाहिर करता है. मनमोहन सिंह की सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि शहरी इलाकों में हर महीने 965 रुपए और ग्रामीण इलाकों में 781 रुपए से ज्यादा खर्च करने वालों को गरीब नहीं माना जाएगा.

योजना आयोग ने यह भी कहा है कि शहरी इलाकों में हर दिन 32 रुपए और ग्रामीण इलाकों में रोजाना 26 रुपए से ज्यादा खर्च करने वालों को केंद्र और राज्य सरकार की उन योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों के लिए बनाई गई हैं.

योजना आयोग ने सुझाया है कि मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर या चेन्नई में रहने वाला कोई व्यक्ति हर महीने 3860 रुपए से ज्यादा खर्च करता है तो उसे गरीब नहीं माना जाएगा.

योजना आयोग का कहना है कि एक आदमी एक दिन में एक रुपए 20 पैसे खर्च करके खाने की थाली में दाल का इंतजाम कर सकता है.

योजना आयोग के मुताबिक चावल और आटे के लिए हर रोज पांच रुपए 50 पैसे और दूध के लिए दो रुपए 33 पैसे हर रोज खर्च करना काफी है.

इसी तरह हरी-सब्जियों के लिए एक रुपए 95 पैसे, खाद्य तेल के लिए एक रुपए 55 पैसे, फलों के लिए 44 पैसे, चीनी के लिए 70 पैसे, नमक-मसालों के लिए 78 पैसे और गैस सिलेंडर या केरोसिन के लिए हर दिन 3.75 पैसे काफी हैं.

इसके अलावा हर महीने पढाई-लिखाई के लिए 99 पैसे, महीने में कपड़े-लत्ते के लिए 61 रुपए 30 पैसे, जूते-चप्पल के लिए नौ रुपए 60 पैसे, साज-सिंगार के लिए 28 रुपए 80 पैसे काफी हैं.

योजना आयोग का कहना है कि अगर आप इतना खर्च कर लेते हैं तो कोई आपको गरीब नहीं कहेगा. सरकार की नजर में आप गरीबी रेखा से ऊपर उठ जाएंगे. आपको किसी भी चीज पर सरकार की सब्सिडी की जरूरत नहीं पड़ेगी. समाज में आपकी गिनती खाते-पीते लोगों में होगी.

योजना आयोग ने परिवार के हिसाब से घर चलाने का खर्च बताया है. अगर दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और चेन्नई में रहते हुए आप अपने पर, पत्नी पर और दो बच्चों पर तीन हजार 860 रुपए खर्च करते हैं तो आप गरीब नहीं हैं. चार लोगों के लिए परिवार के लिए महीने में तीन हजार 860 रुपए बहुत हैं.

योजना आयोग के अर्थशास्त्रियों ने जब घर चलाने का ये हिसाब तैयार किया है तो उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश करने से पहले प्रधानमंत्री के पास भेजा गया था. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस हिसाब को मंजूरी दी है. घर चलाने का ये हिसाब सुरेश तेंडुलकर की कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है.


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