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नक्सल चंदा मामले में एस्सार का जीएम गिरफ्तार

नक्सल चंदा मामले में एस्सार का जीएम गिरफ्तार

रायपुर. 27 सितंबर 2011


नक्सलियों को चंदा देने के मामले में एस्सार कंपनी के जीएम डीएस वर्मा को दंतेवाड़ा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किए गए ठेकेदार बीके लाला ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि पैसा नक्सलियों तक पहुंचाने के लिए जीएम ने ही दिया था. ठेकेदार के बयान के आधार पर मंगलवार को पुलिस ने श्री वर्मा को किरंदुल से गिरफ्तार किया है.

पखवाड़े भर पहले नक्सलियों के लिए 15 लाख रुपए लेकर दंतेवाड़ा पालनार के बाजार में पहुंचे एस्सार के ठेकेदार बीके लाला को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. पुलिस ने ठेकेदार के साथ कथित नक्सल समर्थित लिंगाराम कोडोपी को भी गिरफ्तार किया था. इस मामले में ठेकेदार बीके लाला को पुलिस हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई. पूछताछ में ठेकेदार ने पुलिस को दिए गए बयान में कहा है कि जीएम डी एस वर्मा ने ही रुपए नक्सलियों तक पैसा पहुंचाने के लिए दिए थे.

ठेकेदार के बयान के बाद पुलिस ने जीएम की गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी शुरू कर दी थी. मंगलवार को किरंदुल से एस्सार के जीएम डीएस वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है. दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग ने बताया कि पुलिस ने नक्सलियों को चंदा पहुंचाने के मामले में पर्याप्त सबूत जुटाएं हैं.

पुसिल को आशंका है कि एस्सार जीएम श्री वर्मा से पूछताछ में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं. विदित हो पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग ने किरंदुल एसडीओपी अंशुमन सिसोदिया को मामले की जांच सौंपी थी. उन्होंने सप्ताह भर में जांच रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को सौंप दी है. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद एस्सार जीएम की गिरफ्तारी की गई है.

माओवादियों के लिए पैसा लेकर जाते समय पकड़े गए एस्सार के ठेकेदार बीके लाला से पूछताछ और जब्त दस्तावेज के आधार पर दंतेवाड़ा पुलिस ने कम्पनी प्रबंधन को नोटिस जारी किया था. प्रबंधन से 17 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी. इस बीच एनजीओ जय जोहार सेवा संस्थान के पवन दुबे व नरेंद्र दुबे पर भी पुलिस ने नक्सलियों से सांठगाठ का आरोप लगाया था. पुलिस अफसरों के अनुसार जय जोहार के जगदलपुर और पालनार स्थित ठिकानों छापे के दौरान कुछ अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं.

इससे पहले दुनिया भर में तरह-तरह के गोपनीय दस्तावेजों को जारी करने वाले विकिलिक्स के ताज़ा दस्तावेजों में इस बात का रहस्योद्घाटन किया गया था कि छत्तीसगढ़ में माओवादी आंदोलन चलाने के लिये औद्योगिक घराने एस्सार से मदद मिलती रही है. विकिलीक्स ने मुंबई स्थित अमरीकन कॉन्सुलेट के दस्तावेजों को हाल ही में जारी किया था. इन दस्तावेजों के अनुसार छत्तीसगढ़ के बस्तर में काम करने के एवज में एस्सार कंपनी माओवादियों को आर्थिक मदद करती है. अमरीकन कॉन्सुलेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एस्सार के एक अधिकारी ने बताया है कि उनकी कंपनी नक्सली इलाकों में कंपनी की गतिविधियों में दखलअंदाजी न करने के लिए नक्सलियों को पैसे देती है. हालांकि एस्सार की ओर से इस तरह के दावे का खंडन किया गया है.


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