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कोड़े की सजा में मिली महिला को माफी

कोड़े की सजा में मिली महिला को माफी

दुबई. 29 सितंबर 2011


सउदी अरब में एक अदालत ने महिला को दस कोड़े मारने की सुनाई गई सजा पर रोक लगाते हुए महिला को माफी देने की घोषणा की है. महिला को यह सजा ड्राइविंग करने के आरोप में सुनाई गई थी.

गाड़ी चलाने से जुड़े नियम में बदलाव लाने और राजशाही पर दबाव बनाने की नीयत से हाल के कुछ महीनों में बीसियों महिलाओं ने सउदी अरब की सड़कों पर गाड़ी चलाई है. सज़ा माफ़ करने के आदेश की आधिकारिक पुष्टि हो गई है. एक सऊदी राजकुमारी ने भी इस बारे में ट्वीट किया है. साथ ही एपी ने भी एक अधिकारी के हवाले से ये ख़बर दी है.

सऊदी राजकुमार अलवलीद बिन तलाल की पत्नी अमीरा अल तावील ने ट्वीट किया है, “अल्लाह का शुक्र है. शेमा को कोड़े दिए जाने की सज़ा रद्द कर दी गई है. हमारे शाह का शुक्रिया.”

महिलाओं को मतदान के अधिकार देने की घोषणा के दो दिन बाद शेमा को सज़ा सुनाई गई थी.रिपोर्टों के मुताबिक महिला ड्राइवरों पर लगे प्रतिबंध को तोड़ने के लिए दो और महिलाएँ इस साल कोर्ट में पेश होंगी.

इतिहास

कोड़ा या किसी भी शारीरिक दंड के विषय में इतिहास की किताबों में स्पष्ट जानकारी नहीं है पर इतिहासकार मानते हैं कि कोड़ा लगाने की सजा बहुत पहले से दी जाती रही है.

कोड़ा लगाने की सजा रोमन साम्राज्य में भी लागू थी. यह वहां कानून द्वारा स्वीकृत भी था. अपराधी को दंड स्वरूप 40 कोड़े तक उसकी पीठ या कंधे पर लगाए जाते थे. नितंबों पर प्रयोग के लिए संटी या रॉड का उपयोग होता था.अकसर यह दंड सार्वजनिक तौर पर दिया जाता था और यह अपराधिक प्रवृत्ति वालों के लिए चेतावनी का भी काम करता था हालांकि इस तरह के दंड से रक्त भी निकल जाता था.

सऊदी अरब,इरान, सुडान, और उतरी नाइजिरिया जैसे इस्लाम की व्यवस्था वाले बहुत सारे देशों ने कुछ अपराधों के लिए न्यायिक कोड़ों की मार को चालू किया. 2009 से, पाकिस्तान के कुछ क्षेत्र सरकार और कानून की अस्त-व्यस्तता का सामना कर रहे हैं और वहां तदर्थ इस्लामिक अदालतों द्वारा शारीरिक दंड को दुबारा लागू किया गया है.

कई देशों में लगते हैं कोड़े
19 सदीं से पहले तक सउदी अरब में मारने-पिटने के साथ ही सजा के रूप में अंगविच्छेद या शल्यक्रियाओं का उपयोग किया जाता था लेकिन इन दंडों के विरोध और इनके अत्यधिक विवादास्पद होने की वजह से इन पर रोक लगी. वर्तमान में वहां "शारीरिक दंड" का मतलब आमतौर अंगविच्छेद जैसे भौतिक दंड की बजाय, बेंत से मारना, पिटना या कोड़े से मारने के रूप में लिया जाता है.

बोस्ट्सवाना, मलेशिया, सिंगापुर और तंजानिया जैसे बहुत सारे पूर्व ब्रिट्रिश शासितों के साथ ही कुछ देश न्यायिक शारीरिक दंड को बरकरार रखे हुए हैं. मलेशिया और सिंगापुर में कुछ निश्चित विनिर्दिष्ट अपराधों के लिए, पुरूषों को जेल की मियाद के अलावा नियमित तौर बेंत या कोड़े से पिटने की सजा दी जाती है. बेंत से पिटने का सिंगापुरियन चलन 1994 में तब पूरे विश्व में विचार का मुद्दा बना, जब अमरीका के एक किशोर माइकल पी. फॉय को गुंडागर्दी के लिए बेंत से पिटा गया था. शायद तब से ही इसे विश्व ने गंभीरता से लेना शुरू किया.


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