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आलोचनाओं के बीच आडवाणी की रथ यात्रा शुरु

आलोचनाओं के बीच आडवाणी की रथ यात्रा शुरु

पटना. 11 अक्टूबर 2011


सिताब दियारा से शुरु हुई भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा में भले भाजपा एकजुटता का दावा करे लेकिन मोदी के साथ आडवाणी की दूरी साफ नजर आ रही है. इस यात्रा को कांग्रेस और राजद की आलोचनायें भी झेलनी पड़ रही हैं. कांग्रेस ने कहा है कि आडवाणी को रथयात्रा बिहार से नहीं, बल्कि देहरादून या बेंगलूरु से शुरू करनी चाहिए थी, जहां के मुख्यमंत्रियों को भाजपा को भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण हटाना पड़ा था.

लालकृष्ण आडवाणी


भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने आज बिहार के सारण जिले के सिताब दियारा गांव से अपनी 38 दिवसीय 'जनचेतना यात्रा' शुरू कर दी. भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू होने वाली इस यात्रा से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आडवाणी के रथ को हरी झंडी दिखाई. आडवाणी के साथ उनके रथ पर सुषमा स्वराज और अरुण जेटली हैं.

यात्रा शुरू करने से पहले आडवाणी ने यूपीए सरकार की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा- '' देश में सत्ता नहीं, व्यवस्था बदलना हमारा लक्ष्य है. लोगों में भ्रष्टाचार के कारण अनास्था आ गई है. देश ऐसे नहीं चल सकता जहां लोगों को खुद पर विश्वास न हो. ये व्यस्था बदलनी चाहिए.''

अपने पूरे भाषण में आडवाणी ने मूलत अपने पूर्व के कार्यों खासकर पूर्व की यात्राओं के बारे में बताया और कहा कि बिहार में अब काफी प्रगति हुई है.

आडवाणी 38 दिन में 23 राज्यों से होते हुए करीब 7600 किलोमीटर की यात्रा पूरी करेंगे. 'जन चेतना यात्रा' के दौरान प्रतिदिन करीब 300 किलोमीटर की यात्रा करेंगे और हर दिन कम से कम तीन बड़ी जनसभाओं को संबोधित करेंगे.

इस अवसर पर नीतीश कुमार का कहना था, '' कोई काले धन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहा है. उसका साथ देना ज़रुरी है. हम इस यात्रा में आडवाणीजी के साथ हैं और ये यात्रा सफल होगी जिससे लोग जुड़ेंगे.''

इधर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग पर सफाई देने की मुद्रा में लिखा है कि इस यात्रा का जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि सिताबदियारा से शुरु होना एकदम सही है. वो लिखते हैं कि ‘इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता कि बिहार में जहां एक बार आडवाणीजी की यात्रा को रोका गया था वहीं से वो फिर यात्रा शुरु कर रहे हैं. मैंने आडवाणी जी के साथ काम किया है. यह शर्मनाक और दुखद है कि कुछ लोग स्वार्थी हितों के तहत काम कर रहे हैं और इस तरह की ख़बरें फैला रहे हैं.’’

हालांकि इस यात्रा में एक तरफ जहां पटना से लेकर छपरा तक लगी तस्वीरों में वाजपेयी दिखायी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी इन तस्वीरों से गायब हैं.

वैसे आडवाणी की इस यात्रा का विरोध करने वालों की भी कमी नहीं है. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दिल्ली में संवाददाताओं को कहा- “श्री आडवाणी इस कथित ‘जनचेतना यात्रा’ से देश में 2014 के बजाय 2012 में लोकसभा चुनाव कराने की सोच रहे हैं लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं होने जा रहा है. वैसे श्री आडवाणी को अपनी रथयात्रा बिहार से नहीं, बल्कि देहरादून या बेंगलूरु से शुरू करनी चाहिए थी, जहां के मुख्यमंत्रियों को भाजपा को भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण हटाना पड़ा था.”

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस यात्रा पर कड़ी टिप्पणी करते हुये कहा कि , "यह यात्रा एक बहाना है, आडवाणी या नरेंद्र मोदी सभी अपने-अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं. नीतीश और शरद यादव भी उनके साथ हैं, इन्होंने ही आडवाणी को इस यात्रा के लिए आमंत्रित किया है. आडवाणी जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि को कलंकित कर रहे हैं, जबकि नीतीश अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए आडवाणी की यात्रा का समर्थन कर रहे हैं."

जयप्रकाश नारायण की छत्र-छाया में अपनी राजनीतिक जिंदगी की शुरुवात करने वाले लालू यादव ने कहा, "सिताब दियारा से रथ यात्रा की शुरुआत करना दरअसल जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि को कलंकित करना है, क्योंकि जेपी आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा के विरोधी थे. मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि जब भाजपा केंद्र में थी तब तक तो उसने भ्रष्टाचार आदि किसी भी मुद्दे पर कुछ नहीं किया, लेकिन अब वह इन मुद्दों को क्यों उठा रही है.”

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Arvind Kumar [kumararvind403@gmail.com] kolkata - 2011-10-11 14:18:14

 
  लालू प्रसाद यादव साइकिल चोर हैं. 
   
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