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माओवाद प्रभावित बस्तर है उद्योगपतियों की पसंद

माओवाद प्रभावित बस्तर है उद्योगपतियों की पसंद

रायपुर. 11 अक्टूबर 2011


छत्तीसगढ़ का बस्तर भले ही देश भर में नक्सली वारदातों के कारण संवेदनशील माना जाता हो लेकिन उद्योगपतियों के लिये पसंद का इलाका है. माओवादियों के केंद्र कहे जाने वाले बस्तर में टाटा, एस्सार, मित्तल जैसे बड़े घराने तो अपने काम में लगे हुए ही हैं, कई दूसरे उद्योग भी बस्तर में अपनी ज़मीन तलाश रहे हैं.

माओवादी


छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने के लिये पिछले तीन सालों में हजारों हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है. सरकारी और निजी जमीन मिलाकर 2721 हेक्टेयर भूमि उद्योगों को दी गई है. अकेले राज्य के जांजगीर-चांपा जिले में सर्वाधिक 845 हेक्टेयर जमीन उद्योगपतियों को दिए गए हैं.

सूचना के अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी के मुताबिक साल 2008-09 और वर्ष 2010-11 में प्रदेश के 8 जिलों में उद्योग स्थापित करने बेहिसाब जमीन का आबंटन किया गया है. जांजगीर-चांपा में पॉवर प्लांट और अन्य उद्योग स्थापित करने तीन सालों में 845.422 हेक्टेयर जमीन का हस्तांतरण किया गया है. बताया गया है कि यहां औद्योगिक इकाईयों को केवल सरकारी भूमि दी गई है और सभी भूमि का आधिपत्य भी प्राप्त कर लिया गया है. राज्य शासन ने इसमें से साल 2010 में ही लगभग 382 हेक्टेयर जमीन उद्योगपतियों को दिया है.

जांजगीर-चांपा के बाद बस्तर का इलाका उद्योगपतियों की विशेष पसंद रहा है. गौरतलब है कि नक्सलवाद के कारण बस्तर को सरकार देश में सबसे अधिक संवेदनशील मानती है. यहां साल 2008 में लगभग 520.74 हेक्टेयर जमीन औद्योगिक इकाईयों को दी गई. इसमें से लगभग 170.31 हेक्टेयर भूमि सरकारी जबकि 340.43 हेक्टेयर निजी जमीन उद्योग घरानों को दिए गए हैं.

कोरबा जिले में बीते तीन सालों के दौरान उद्योगों को करीब 478 हेक्टेयर भूमि आबंटित की गई है. इसमें से 260 हेक्टेयर सरकारी तथा 217 हेक्टेयर जमीन निजी है. रायगढ़ जिले में कुल 273.856 हेक्टेयर जमीन पर उद्योग लगाए गए हैं. जिसमें से 202.545 हेक्टेयर भूमि स्थानीय लोगों की हैं. राजधानी रायपुर में लगभग 183.187 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर उद्योगों की स्थापना की गई है.

बिलासपुर में सबसे कम 34.515 हेक्टेयर सरकारी जमीन उद्योगों को उपलब्ध कराए गए हैं. सरगुजा जिले में 214.438 हेक्टेयर जमीन उद्योगपतियों को दिए गए हैं. यहां केवल निजी भूमि उद्योगपतियों को आबंटित किए गए हैं. राजनांदगांव जिले में 113.206 सरकारी और 54.924 हेक्टेयर निजी जमीन उद्योगपतियों को दी गई है. इस तरह यहां कुल 168.13 हेक्टेयर जमीन उद्योग घरानों को दिए गए हैं.

राज्य शासन ने तीन सालों में लगभग एक हजार 39 हेक्टेयर से अधिक निजी जमीन पर उद्योग खोलने की अनुमति दी है. जबकि 1681 हेक्टेयर सरकारी जमीन उद्योगपतियों को आबंटित हुए हैं. इस तरह कुल 2721.441 हेक्टेयर भूमि उद्योगों के लिए अधिग्रहित हुए हैं.

उद्योग संचालनालय से प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि वर्तमान में भूमि अर्जन और हस्तांतरण किसी इकाई विशेष के नाम से नहीं बल्कि लैंड बैंक हेतु किया जा रहा है. जमीन अधिग्रहण के लिए राज्य शासन द्वारा तय मुआवजा का भुगतान जमीन का अधिग्रहण किया गया है. राज्य शासन ने मुआवजा निजी के तहत पड़त भूमि हेतु 6 लाख रुपए प्रति एकड़, एक फसली भूमि के लिए 8 लाख प्रति एकड़ और दो फसली भूमि के लिए 10 लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा तय किया है.