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एमनेस्टी ने की सोनी सोरी की रिहाई की मांग

एमनेस्टी ने की सोनी सोरी की रिहाई की मांग

नई दिल्ली. 12 अक्टूबर 2011

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बयान जारी कर औद्योगिक समूह एस्सार से चंदा लेकर नक्सलियों को पहुंचाने के आरोप में बस्तर के जेल में बंद सोनी सोरी की रिहाई की मांग की है. एमनेस्टी ने सोरी के भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को भी निःशर्त रिहा करने की मांग की है.

सोनी सोरी


ज्ञात रहे कि दंतेवाड़ा के समेली छात्रावास की निलंबित आश्रम अधीक्षिका 35 साल की सोनी सोढ़ी को दिल्ली के बसंत बिहार इलाके से दिल्ली की अपराध शाखा ने 4 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था. वहां उसे साकेत कोर्ट में पेश किया गया, जहां दो दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. इसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर उसे छत्तीसगढ़ लेकर आ गई थी. यहां उसके सर पर चोट लगने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वह पैरों में जंजीर बांधे जाने के खिलाफ अनशन पर है.

दंतेवाड़ा पुलिस का आरोप है कि एस्सार से पैसा लेकर बीके लाला, लिंगाराम कोड़ोपी और सोनी सोरी नक्सलियों को देने वाले थे, जहां पालनार गांव के साप्ताहिक बाजार से उन्हें गिरफ्तार किया गया और सोनी सोरी फरार हो गई थी, जिसे दिल्ली से पकड़ा गया. हालांकि बाद में यह रहस्योद्घाटन हुआ कि दंतेवाड़ा पुलिस ने बीके लाला और लिंगाराम कोड़ोपी को उनके घर से उठाया था और उन्हें नाटकीय तरीके से पालनार बाजार में पकड़े जाने की बात कही थी.

लिंगाराम को इससे पहले भी अक्टूबर 2009 में 40 दिनों तक एसपीओ बनने का दबाव देकर थाने में रखा गया था, जिसे उच्च न्यायालय के दखल के बाद छोड़ा गया. बाद में दिल्ली में पत्रकारिता की पढ़ाई करते समय भी अप्रैल 2010 में उस पर नक्सल हमले में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. दूसरी ओर सोनी सोरी के पिता को भी नक्सलियों ने जून 2011 में पैर में गोली मार दी थी, जिसके बाद यह सवाल भी खड़ा हुआ कि जिस परिवार पर नक्सली हमले कर रहे हैं, उसी परिवार की बेटी को पुलिस ने नक्सली समर्थक बता कर गिरफ्तार किया है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन्हीं सब मुद्दों को ध्यान में रखते हुये कहा है कि सोनी सोरी और लिंगाराम कोड़ोपी को राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है और वे पुलिस और सरकार द्वारा किये जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन की आलोचना के कारण सरकार के निशाने पर आये हैं. उनके खिलाफ लगाये गये आरोप बेबुनियाद हैं.

एमनेस्टी ने कहा है कि लिंगाराम ने सीआरपीएफ द्वारा तीन आदिवासियों की हत्या के मामले को भी उजागर किया था. लिंगाराम की गिरफ्तारी का उसकी बुआ सोनी सोरी विरोध कर रही थी, इसलिये पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया.

एमनेस्टी ने मांग की है कि सोनी सोरी और लिंगाराम कोड़ोपी के खिलाफ राजनीति प्रेरित तमाम मामले वापस लिये जाएं और उन्हें बिना शर्त तत्काल रिहा किया जाये. इसके अलावा सोनी सोरी की प्रताड़ना और लापरवाही पूर्वक इलाज के मुद्दे पर एक त्वरित, निष्पक्ष, स्वतंत्र और प्रभावशाली जांच सुनिश्चित की जाये. इसके अलावा जिम्मेवार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की भी मांग की गई है.


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