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शिवानी भटनागर हत्याकांड में आरके शर्मा रिहा

शिवानी भटनागर हत्याकांड में आरके शर्मा रिहा

दिल्ली. 12 अक्टूबर 2011


शिवानी भटनागर हत्याकांड में दिल्ली उच्च न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुये आईपीएस आरके शर्मा, श्री भगवान और सत्यप्रकाश को रिहा कर दिया है. अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पेश किये गये सबूत में संदेह की गुंजाइश है. निचली अदालत ने इन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई थी. एक अन्य आरोपी प्रदीप शर्मा को अदालत ने दोषी पा है.

शिवानी भटनागर


ज्ञात रहे कि इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी भटनागर की 23 जनवरी, 1999 में हत्या कर दी गई थी. दिल्ली के पटपड़गंज इलाके में हत्यारों ने शिवानी की उन्हीं के फ्लैट में हत्या कर दी थी. ये मामला तब और सनसनीखेज़ बन गया जब इस हाईप्रोफाइल केस में हत्या का आरोप हैसियतमंद आईपीएस आरके शर्मा पर लगा.

इस हत्याकांड में सबसे पहले जुलाई 2002 में श्री भगवान नाम के शख्स की गिरफ्तारी हुई. एक महीने बाद ही हत्या के आरोपी प्रदीप शर्मा को भी हरियाणा के पंचकूला से गिरफ्तार कर लिया गया.

इन दोनों से पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस को तत्कालीन आईजी आरके शर्मा के होने का पता चला. शिवानी हत्याकांड में नाम आते ही आरके शर्मा फरार हो गया. अदालत ने अगस्त 2002 में ही भगोड़े आईपीएस आरके शर्मा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया और उसे आईजी जेल पद से हटा दिया गया.

कुछ दिनों बाद शर्मा की पत्नी मधु शर्मा ने इस केस में भाजपा के दिंगत नेता प्रमोद महाजन का नाम घसीटने की कोशिश की लेकिन दिल्ली पुलिस ने महाजन को क्लीन चिट दे दी.

पुलिस शर्मा की तलाश करती रही. आखिरकार सितंबर 2002 में उसने अंबाला कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया. मार्च 2003 में अदालत ने छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए. जनवरी 2004 में शिवानी भटनागर के पति राकेश भटनागर ने पुलिस के सामने बयान दिया कि उनकी पत्नी के आरके शर्मा से संबंध थे.

264 गवाहों के बयान सुनने और साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 18 मार्च 2008 को आरके शर्मा, श्री भगवान, सत्यप्रकाश और प्रदीप शर्मा को आईपीसी की धारा 120 बी और 302 के तहत दोषी माना. जबकि सबूतों के अभाव ने दो आरोपियों वेद प्रकाश शर्मा और कालू को बरी कर दिया. उसी अदालत ने 24 मार्च 2008 को चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. इसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी.