पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

अजीत जोगी की जाति की जांच का आदेश

अजीत जोगी की जाति की जांच का आदेश

नई दिल्ली. 13 अक्टूबर 2011

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रवक्ता रहे अजीत जोगी की जाति से संबंधित एक मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि राज्य सरकार एक हाई पावर कमेटी बनाये और इस बात की जांच करे कि वे आदिवासी हैं या नहीं. इसकी रिपोर्ट 3 महीने के अंदर सौंपने का निर्देश अदालत ने दिया है.

अजीत जोगी


गौरतलब है कि अजीत जोगी की जाति पर पिछले कई सालों से विवाद होता रहा है. भारतीय प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आये अजीत जोगी संसद सदस्य रहे हैं और छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद उन्हें राज्य का पहला मुख्यमंत्री भी बनाया गया था. अभी अजीत जोगी और उनकी पत्नी रेणु जोगी छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य हैं.

सबसे पहले अविभाजित मध्य प्रदेश के करीब 160 कांग्रेसी विधायकों ने अजीत जोगी की जाति का मुद्दा कांग्रेस नेतृत्व के सामने उठाते हुये ज्ञापन सौंपा था. बाद में छत्तीसगढ़ अळग होने के बाद अजीत जोगी के 2001 में मरवाही विधानसभा से चुनाव लड़ने के साथ ही यह विवाद खड़ा हो गया था कि जोगी आदिवासी हैं या नहीं. मरवाही आदिवासियों के लिये सुरक्षित सीट रही है.

एक राजनीतिक कार्यकर्ता संत कुमार नेताम ने राष्ट्रीय आदिवासी आयोग से शिकायत की थी. तब आयोग के अध्यक्ष दिलीप सिंह भूरिया ने सरकार से जांच का अनुरोध किया था. मामला आगे नहीं बढ़ा तो 2006 में संत कुमार नेताम इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में गये. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के सांसद नंदकुमार साय ने भी श्री जोगी के खिलाफ यह कह कर याचिका दायर की थी कि वर्ष 2003 में जोगी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित मरवाही विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था.

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में हाईकोर्ट की जस्टिस नायक और जस्टिस वीके श्रीवास्तव की बेंच ने आदेश दिया कि आदिवासी आयोग किसी की जाति से संबंधित निर्णय या जांच की अनुशंसा का अधिकार नहीं है. इसके अलावा उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता संत कुमार नेताम पर यह कहते हुये 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है.

बाद में यह मामला उच्चतम न्यायालय में गया. गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुये उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले को आंशिक रुप से स्वीकार करते हुये राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह पूरे मामले की हाई पावर कमेटी से जांच कराये. अदालत ने कहा कि अजीत जोगी की जाति पर निर्णय राज्य-स्तरीय छानबीन समिति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा माधुरी पाटिल प्रकरण में निर्धारित विधि के अनुसार करेगी और अपनी रिपोर्ट 3 महीने के अन्दर उसे सौपेगी.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in