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फिर उठ सकती है खालिस्तान की मांग

फिर उठ सकती है खालिस्तान की मांग

नई दिल्ली. 16 अक्टूबर 2011

पंजाब में अलग खालिस्तान बनाने के लिये आतंकवादी गतिविधियां एक बार फिर परवान चढ़ सकती हैं. पंजाब एक बार फिर खालिस्तान के नाम पर आतंकी गतिविधियों का केंद्र बन सकता है. पुलिस का मानना है कि अंबाला में बरामद किया गया विस्फोटक बेहद छोटा हिस्सा है और राज्य के कई इलाकों में बड़ी मात्रा में विस्फोटक होने की आशंका है.

खालिस्तान


ज्ञात रहे कि दो दिन पहले ही अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन की पार्किग में मिली कार से पांच किलो आरडीएक्स, डेटोनेटर्स और टाइमर्स बरामद हुए थे. पुलिस ने दावा किया कि आतंकियों की साजिश दीवाली के मौके पर राजधानी दिल्ली को दहलाने की थी. साजिश लश्कर ए तैयबा और बब्बर खालसा इंटरनेशनल ने मिलकर रची थी.

विस्फोटकों की बरामदगी के बाद देश के रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने आगाह किया है कि सभी को बेहद सतर्क रहने और समुद्री व जमीनी सीमा पर चौकस और भी ज्यादा रखने की जरूरत है. उन्होंने कहा है कि स्थिति काफी नाजुक और संवेदनशील है.

इधर पंजाब के डीजीपी ने एक रिपोर्ट में माना है कि राज्य में भारी मात्रा में विस्फोटक हो सकते हैं. डीजीपी ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई है. पुलिस खुद ही मान रही है कि अंबाला में जो विस्फोटक बरामद हुआ है, वह एक छोटा नमूना भर है. राज्य में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की मदद से बब्बर खालसा ने अपना नेटवर्क एक बार फिर से फैला लिया है और उसने ही अंबाला में विस्फोटक मांगाये थे.

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार बब्बर खालसा के लोगों ने दिल्ली की एक अदालत में विस्फोट की योजना बनाई थी. डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय पर भी हमला किया जा सकता था. इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई थी लेकिन ऐन मौके पर विस्फोटकों की बरामदगी के कारण आतंकी अपनी योजना को अंजाम नहीं दे सके.

माना जा रहा है कि सिखों के खालिस्तान अलग राज्य के लिये आतंकवादियों ने एक बार फिर से कमर कस ली है और आईएसआई इसमें पूरी मदद कर रहा है.

ज्ञात रहे कि 1980 के दशक में सिखों के लिये अलग खालिस्तान की मांग उठी थी और जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में खालिस्तान आंदोलन परवान चढ़ा था. पूरे पंजाब में आंतकवादी गतिविधियां चरम पर थीं. 1984 में स्वर्ण मंदिर से आतंकियों को हटाने के नाम पर सेना की कार्रवाई ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद खालिस्तान का आंदोलन और भड़का और आतंकियों ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी थी. जिसके बाद देश भर में भयानक दंगे फैले.

1985 में आतंकियों ने कनाडा से भारत आ रहे एयर इंडिया के एक विमान को विस्फोट कर के उड़ा दिया था, जिसमें 329 यात्री मारे गये थे. इसके बाद पंजाब पुलिस ने जूलियो रिबेरो और के पी एस गिल के नेतृत्व में सेना के साथ मिल कर पंजाब में कई ऑपरेशन चलाये. इन ऑपरेशनों में आतंकियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम लोगों को भी पुलिस ने मार गिराया, जिसकी कड़ी आलोचना हुई.

माना गया कि के पी एस गिल के कारण पंजाब से आतंकवाद का उम्मूलन कर लिया गया लेकिन 1995 में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या ने इस तरह की बातों का खारिज कर दिया. हाल ही में पंजाब सहित देश के कई भागों में शिरोमणि अकाली दल की ओर से खालिस्तान और भिंडराँवाला के समर्थन में पोस्टर लगाए गये थे.

अमरीका समेत कई देशों में पिछले कई सालों से खालिस्तान आंदोलन चलता रहा है. भिंडरावाले टाइगर फोर्स ऑफ खालिस्तान, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान टाइगर फोर्स, खालिस्तान कमांडो फोर्स, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स जैसे संगठनों से जुड़े चरमपंथी समय-समय पर गिरफ्तार किये जाते रहे हैं. ऐसे में अंबाला में विस्फोटकों की बरामदगी ने इस बात को और बल दिया है कि खालिस्तान का आंदोलन कभी भी अपने पुराने स्वरुप में लौट सकता है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Sanjeet Tripathi [ved.sanju@gmail.com] Raipur - 2011-10-16 19:00:18

 
  ये बहुत ही चिंता की बात है, केंद्र से लेकर राज्य सरकार को भी इस मुद्दे पर कड़ी चौकसी बरतते हुये मंथन करना चाहिये कि ऐसे हालात फिर से क्यों आ रहे हैं, जो खालिस्तान की मांग पुनर्जीवित होती दिखाई पड़ रही है. 
   
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