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भंवरी देवी कांड में मंत्री मदेरणा पर कसा शिकंजा

भंवरी देवी कांड में मंत्री मदेरणा पर कसा शिकंजा

जयपुर. 16 अक्टूबर 2011


राजस्थान की लोक कलाकार और नर्स भंवरी देवी के मामले में हाईकोर्ट की फटकार के बाद अंततः रविवार को राज्य सरकार की नींद खुली और उसने अपने मंत्री महिपाल मदेरणा को इस्तीफा देने का निर्देश दे दिया. इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल से भी मुलाकात की थी. समझा जाता है कि उन्होंने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिये राज्यपाल से मुलाकात की है. भंवरी देवी के अपहरण के पहले दिन से ही मदेरणा के खिलाफ कार्रवाई की बात की जा रही थी लेकिन सरकार अब तक उन पर कोई सीधा आरोप नहीं होने का दावा करते हुये टाल-मटोल कर रही थी. अब मदेरणा के इस्तीफे का प्रसंग सामने आते ही माना जा रहा है कि उन पर भंवरी देवी अपहरण कांड में शिकंजा कसना शुरु हो गया है.

भंवरी देवी


उल्लेखनीय है कि जोधपुर की नर्स और लोक कलाकार भंवरी देवी एक सितंबर से ही लापता हैं. माना जा रहा है कि राज्य सरकार के कुछ विधायक और मंत्री के साथ भंवरी देवी के कुछ आपत्तिजनक सीडी हैं और इसी कारण से उनका अपहरण किया गया है. लेकिन उनके अपहरणकर्ता अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर हैं. पुलिस ने दावा किया था कि गुजरात के पालनपुर इलाके से उस जीप को बरामद कर लिया है, जिसमें भंवरी देवी का अपहरण किया गया था. हालांकि पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है लेकिन पुलिस अब तक भंवरी देवी को नहीं तलाश पाई है.

इस मामले में जोधपुर जिले की एक अदालत ने भंवरी देवी के पति के इस्तगासे के आधार पर जलदाय मंत्री महिपाल मदेरणा के खिलाफ भी मामला दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए थे. इसके बाद से ही मदेरणा को हटाने की बात होने लगी थी. लेकिन सरकार मदेरणा को हटा कर जाट वोटों का नुकसान नहीं उठाना चाहती थी. मदेरणा के पिता और राजस्थान में विधानसभा अध्यक्ष रहे स्व.परसराम मदरेणा जाटों के बड़े नेता माने जाते थे. माना जाता है कि महिपाल मदेरणा के हाथों में अब भी जाटों का एक बड़ा वोट बैंक है. और राज्य के कम से कम 40 विधानसभा सीटों पर जाट वोट निर्णायक माने जाते हैं.

मामला उच्च न्यायालय में पहुंचने के बाद जब अदालत ने फटकार लगाई तो राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने मंत्री महिपाल मदेरणा पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया. इस मामले में सरकार को सोमवार को उच्च न्यायालय में जवाब पेश करना है. सरकार चाहती थी कि कम से कम अदालत को जवाब में यह तो कहा ही जा सके कि मदरेणा को पद से हटा कर सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच कराये जाने के पक्ष में है. 1970 में हुए दिलीप सिंह हत्या कांड में मदेरणा को भी शामिल पाया गया था और वे उस मामले में सजा भुगत चुके हैं.