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तय थी कुलदीप विश्नोई की जीत

तय थी कुलदीप विश्नोई की जीत

हिसार. 17 अक्टूबर 2011


हिसार उपचुनाव में कुलदीप विश्नोई की जीत और कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश की जमानत जप्त होने को सीधे तौर पर अन्ना हजारे फैक्टर से जोड़ कर देखा जा रहा है. लेकिन हिसार सीट की राजनीति और कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश के राजनीतिक जीवन पर नजर रखने वाले टीम अन्ना को इस जीत का श्रेय देने के पक्ष में नहीं हैं. हरियाणा जनहित कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे कुलदीप विश्नोई के बाद दूसरे नंबर पर आईएनडी के अजय चौटाला रहे हैं. कांग्रेस के जयप्रकाश की जमानत जप्त हो गई.

कुलदीप विश्नोई


हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के निधन के कारण खाली हुई लोकसभा सीट पर हुये उपचुनाव में टीम अन्ना ने इलाके में प्रचार करते हुये जनता से अनुरोध किया था कि वे लोकपाल प्रस्ताव को पारित नहीं करने के कारण उसके खिलाफ वोट करें. अब चुनाव परिणाम आने के बाद टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने कहा, ‘हमने मतदाताओं को यह बताने की कोशिश की कि कौन जनलोकपाल के साथ है और कौन नहीं है. यह एक मिशन है, यह जन सेवा है.’

टीम अन्ना के अन्य सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हिसार में कांग्रेस की हार में उनका योगदान है. लेकिन बीजेपी गठबंधन की जीत में उनका कोई योगदान नहीं है. केजरीवाल ने कहा, ‘इस हार से यदि कांग्रेस सबक सीखती है तो उसे जनलोकपाल बिल पारित कर देना चाहिए. यदि ऐसा होता है तो कुलदीप बिश्नोंई या कोई भी भ्रष्टागचार करने की हिम्मात नहीं करेगा.’टीम अन्ना के अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह कांग्रेस के लिये सबक लेने का समय है.

हालांकि राजनीतिक गलियारे में यह बात बहुत साफ तौर पर कही जा रही है कि यह ओम प्रकाश चौटाला की परंपरागत सीट रही है, इसलिये कुलदीप विश्नोई इस सीट के साफ दावेदार थे. कांग्रेस की ओर से तमाम नेता यही दावा कर रहे हैं कि इस चुनाव में अन्ना फैक्टर का कोई लेना-देना नहीं है. यहां तक कि कुलदीप विश्नोई भी इसे अपने दम पर लड़ा हुआ चुनाव बता रहे हैं. विजेता कुलदीप बिश्नोई ने भी यही दावा किया और कहा, 'भजनलाल जी ने हिसार सहित पूरे प्रदेश के लिए काफी काम किया है. इसके अलावा भाजपा का आशीर्वाद हमें मिला. इस वजह से हमें जीत मिली है.

उन्होंने यह भी कहा कि अन्ना की ‘निगेटिव पॉलिटिक्स ’ यहां काम नहीं की है. बिश्नो्ई ने कहा, ' टीम अन्ना ने यदि एक पार्टी के खिलाफ वोट देने की अपील की तो उनसे बाकी 39 दलों को फायदा हुआ है. उन्हें किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में वोट के लिए अपील करना चाहिए था.'

2009 में हुये आम चुनाव में हरियाणा की 10 में से 9 सीटें कांग्रेस के हाथ आईँ थी. एकमात्र हिसार सीट पर ही कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था. इस सीट पर हरियाणा जनहित कांग्रेस के भजनलाल ने सबको पटखनी दी थी. कांग्रेस पार्टी उस समय भी यहां तीसरे नंबर पर थी. बाद में आदमपुर विधानसभा सीट पर भी जयप्रकाश चुनाव हार गये थे. मतलब ये कि जयप्रकाश पहले से ही लगभग हारे हुये प्रत्याशी माने जा रहे थे. ऊपर से टीम अन्ना के कांग्रेस के खिलाफ किये गये प्रचार ने जयप्रकाश की हार को लगभग तय कर दिया था.


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